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कैंसर के ईलाज में किमोथैरापी का दर्द कम करेगी यह नई विधि







    • इस विधि में रोगी को होता है शारीरिक कष्ट
    • दर्द की वजह से ईलाज छोड़ देते हैं कई मरीज
    • अब सीधे कैंसर कोशिकाओं को जलाने की विधि
    • किमोथैरापी का डोज कम करने में सफलता मिली
    प्रतिनिधि

    नईदिल्लीः कैंसर के ईलाज की वर्तमान पद्धति में किमोथैरापी एक अनिवार्य
    हिस्सा है। इसके तहत रोगी के शरीर के अंदर मौजूद कैंसर के कोशों को इसी
    किरण के माध्यम से मारा जाता है। लेकिन सुनने में यह बेहतर लगने के बाद भी
    दरअसल यह एक ऐसी  प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को शारीरिक कष्ट से गुजरना पड़ता है।

    इसी प्रक्रिया को समझते हुए वैज्ञानिकों ने इससे निजात दिलाने की एक विधि
    तैयार की है।  यह सर्वविदित है कि किमोथैरापी के मरीजों में से काफी लोग इसी
    कष्ट को नहीं झेल  पाने की वजह से बीच में ही यह ईलाज छोड़ देते हैं।

    अब जेरुशलम के हिब्रू विश्वविद्यालय ने इससे बचने का नया तरीका खोज
    निकाला है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने किमोथैरापी को सीधे कैंसर पीड़ित
    कोशिकाओं तक पहुंचाने का तरीका तैयार किया है।

    इस प्रक्रिया की वजह से शरीर की अन्य कोशिकाओं को किमोथैरापी के इस कष्ट
    से नहीं  गुजरना पड़ता। इससे रोगी का शारीरिक कष्ट काफी कम हो जाता है।

    किमोथैरापी के कष्ट के साथ साथ वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया के साइड एफेक्ट को
    भी कम करने का काम किया है।

    यह सर्वविदित है कि किमोथैरापी से कैंसर की कोशिकाएं तो मरती हैं लेकिन
    इसके दूसरे बुरे असर भी शरीर पर पड़ते हैं।

    कैंसर के ईलाज की इस विधि को शोध प्रबंध में बताया गया है

    इस शोध के बारे में प्रकाशित शोध प्रबंध में बताया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया को
    कैंसर कोशिकाओं के टीआरपीवी2 प्रोटिन पर केंद्रित किया गया था।

    जब इस प्रक्रिया के तहत काम प्रारंभ होता है तो इस प्रोटिन की वजह से सभी
    कोशिकाओं के अंदर एक नया रास्ता खुल जाता है।

    इसी रास्ते से कम मात्रा में डोक्सोरुबिसीन नामक दवा को अंदर पहुचाता जाता
    है। जिससे कैंसर की कोशिकाओं का खात्मा होता है।

    कैंसर पीड़ित कोशिकाओं के अंदर दवा होने की वजह से किमोथैरापी का प्रभाव
    सिर्फ  इन्हीं कोशिकाओं पर पड़ता है, जिससे कैंसर पीड़ित कोशिकाएं जल जाती
    हैं।

    वर्तमान में लीवर कैंसर के रोगी पर इस विधि को आजमाया गया है।

    दूसरी तरफ यह भी पाया गया है कि कैंसर पीड़ित रोगियों में से अधिकांश लोगों
    की मौत अंततः हार्ट फेल अथवा रक्त धमनियों की समस्याओं की वजह से होती
    है।

    अकेले अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों में करीब 32 लाख कैंसर के रोगी इन्हीं
    कारणों से  मारे गये हैं।

    इन रोगियों की मुख्य समस्या कैंसर थी लेकिन रोग के बढ़ने के बाद वह अंततः
    अन्य  कारणों से असमय मौत के मुंह में समा गये।

    इसकी खास वजह भी शायद कैंसर के ईलाज के दौरान किमोथैरापी का उपयोग
    है। वर्तमान में इस विधि के प्रयोग से शरीर के अन्य स्वस्थ्य सेल भी इसकी चपेट
    में आते हैं। इससे शरीर में अन्य किस्म के विकार पैदा हो जाते हैं।

    अमेरिका में कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा भयावह है

    अमेरिका में प्रकाशित
    एक रिपोर्ट में इस बात
    का उल्लेख किया गया है
    कि 32,34,256
    कैंसर पीड़ित मरीजों में से
    सिर्फ 38 प्रतिशत की
    मौत ही कैंसर की वजह से हुई।

    दूसरी तरफ 11 फीसद लोग अन्य कारणों से मर गये। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया
    है कि  कैंसर होने के एक वर्ष के अंदर मरने वाले 35 वर्ष से कम उम्र के रोगियों में
    यह क्रम  ज्यादा रहा।

    अब किमोथैरापी का डोज कम होने तथा उसका कष्ट भी कम होने के बाद उम्मीद
    की जा रही है कि इस स्थिति में भी सुधार कर पाना संभव होगा।

    साथ ही ईलाज का दर्द कम होने की वजह से अधिक रोगी इस कठिन प्रक्रिया को
    सही तरीके से पूरा कर पायेंगे।

    वैसे भी दुनिया में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के कई अन्य परीक्षणों के
    सफल होने की सूचना है। इनमें से अधिकांश जेनेटिक पद्धति पर आधारित है।

    परीक्षण में सफल होने के बाद भी इसका क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

    इस परीक्षण में सफल होने के बाद अगर वे कारगर रहे तो आने वाले दिनों में हो
    सकता है कि कैंसर के ईलाज की पद्धति ही बदल जाएगी और मरीजों को इस किमोथैरापी के कष्ट से ही नहीं गुजरना पड़ेगा।



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