कैंसर की दवा एक साल में तैयार करने का दावा

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  • पहले ही दिन से कारगर होने का दावा

  • कुछ हफ्तों में ईलाज होगी पूरी

  • यह दवा बहुत सस्ती भी होगी

  • अन्य को शोध पर है कई किस्म के संदेह

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कैंसर की दवा अगले एक साल के भीतर तैयार हो जाएगी।

यह दवा कैंसर जैसी जानलेवी बीमारी के लिए अचूक होगी और पहले ही दिन से काम करने लगेगी।

ऐसा दावा इजराइल की एक कंपनी का है।

इजरायल की इस कंपनी का नाम एक्सीलरेटेड इवॉल्युशन बॉयोटेक्नोलॉजीस लिमिटेड है।

इस कंपनी के प्रमुख डैन एरिडोर ने दवा की इस उपलब्धि का दावा किया है।

श्री एरिडोर ने कहा है कि एक साल के भीतर यह दवा बनकर तैयार हो जाएगी।

वैसे इसी किस्म की शोध में लगे अन्य वैज्ञानिक और शोधकर्ता इस दावे को तुरंत ही स्वीकारने को तैयार नहीं हैं।

शोध से जुड़े लोगों का मानना है कि इस दवा के निर्माण और बाकी जानकारी के बिना इस दावे को स्वीकारा नहीं जा सकता।

श्री एरिडोर का कहना है कि उनकी दवा तैयार होने के बाद पहले ही दिन से काम करेगी और पूरा ईलाज सिर्फ कुछ हफ्तों का होगा।

साथ ही इस दवा का कोई साइड एफेक्ट भी नहीं होगा,

जो आम तौर पर कैंसर के ईलाज की सबसे बड़ी चुनौती बनती है।

साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इसकी कीमत भी बहुत कम होगी

जबकि इसे जेनेरिक तथा निजी तौर पर अलग अलग उपलब्ध कराया जाएगा।

इस दवा के बारे में बहुत कम जानकारी दी गयी है।

जितनी जानकारी उपलब्ध करायी गयी है, उसके मुताबिक कंपनी के वैज्ञानिकों ने काफी पहले से प्रचलित विधि का ही इस्तेमाल किया है।

इस दवा को तैयार करने के लिए कंपनी के शोधकर्ता कैंसर कोशिकाओं को समूल नष्ट करने का दावा कर रहे हैं।

इसके लिए एमिनो एसिड पर आधारित सिद्धांत का पालन किया जा रहा है।

वैसे इससे अधिक की जानकारी स्पष्ट नहीं होने की वजह से इसी किस्म के शोध में लगे वैज्ञानिक इसके बारे में कोई राय नहीं बना पा रहे हैं।

कैंसर की इस दवा के बारे में वैज्ञानिक जानकारी कम

कंपनी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए

काम आने वाली इस दवा का किस स्तर तक का परीक्षण किया गया है।

आम तौर पर किसी भी दवा को तैयार करने के बाद उसे कई स्तरों के परीक्षण से गुजरना पड़ता है।

अंतिम कड़ी में इंसानों पर परीक्षण और उसके तमाम निष्कर्षों के आकलन के बाद ही दवा को इस्तेमाल की स्वीकृति दी जाती है।

पूर्व में भी मुख्य बीमारी के ईलाज में कारगर साबित होने वाली कई दवाइयों के साइड एफेक्ट भयानक रहे हैं।

जिनका पता बाद में चला है जबकि दवा के प्रभाव में हजारों लोगों की मौत हुई है

अथवा हजारों विकलांग शिशु पैदा हुए हैं।

इसलिए अब दवा मानकों में काफी कड़ाई कर दी गयी है।

इन स्थापित मानकों के आधार पर इस नई दवा का शोध कहां तक पहुंचा है, इस बारे में कंपनी ने कोई जानकारी अब तक नहीं दी है।

दूसरी तरफ कंपनी के इस दावे पर यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि

कहीं यह सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश तो नहीं है।

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