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कैंसर के स्थायी उपचार में भारतीय वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान




  • नैनो टेक्नोलॉजी की मदद से इलाके के कैंसर को समाप्त करना संभव

  • साफ साफ नजर आती है कैंसर कोशिका और उनका अंत

  • पशुओं पर हुआ परीक्षण पूरी तरह सफल रहा

  • शरीर पर कोई और प्रतिकूल प्रभाव नहीं


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः कैंसर के स्थायी उपचार की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों का भी उल्लेखनीय योगदान सामने आया है।

इस बार पहले से चल रही नैनो टेक्नोल़जी की मदद से किसी खास इलाके के कैंसर की कोशिकाओं को समाप्त करने में सफलता मिली है।

वर्तमान में कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने की विकिरण की विधि ही प्रचलन में है।

इसके माध्यम से कैंसर के बढ़ने को रोका जाता है।


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अब नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम इसी परेशानी को दूर करने के शोध पर नैनो टेक्नोलॉजी की दिशा में नई प्रगति हुई है।

अब इस विधि को परिष्कृत करने में थेरानोस्टिक टूल के नाम से एक नया तरीका बनाया गया है।

यह पद्धति कैंसर का पता लगाने, इसका इलाका निर्धारित करने और इसके उपचार की विधि तैयार की गयी है।

कैंसर के स्थायी उपचार की यह विधि बनाने में भारतीय वैज्ञानिकों ने इस काम में अमेरिकी शोधकर्ताओं के साथ काम किया है।

इस शोध दल में आइआइटी सुचेतन पाल, टीआइएफआर हैदराबाद के जगन्नाथ मंडल और अनंगा राय शामिल थे।

वैसे इस दल में अमेरिकी दल में मारिट्ज एफ क्रिशर, क्राइसाफिस एंड्रयू, मासाटामो माइदा, नेक्सहिज बेरिजा,

जियांग यांग, शियाओ टिंग शू, एंटोन ओसेलडाइचिक, याडोंग झाउ, शेंगली झाउ, रिचार्ड टोलेडो,

टाटिनी रक्षित और मारेक वाल्डार्क शामिल थे।

इस बारे में प्रकाशित शोध प्रबंध के प्रथम लेखक डॉ सुचेतन पॉल ने कहा कि

चूंकि इसमें कैंसर कोशिकाओं पर जो प्रकाश का प्रभाव पड़ता है, वह न्यूनतम होता है इसलिए इसके काफी फायदे हैं।

पशुओं पर हुए परीक्षण में कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने में यह विधि सफल हुई है।

इसके साथ ही इसका शरीर के अन्य अंगों पर कोई कुप्रभाव भी नहीं देखा गया है।

कैंसर के स्थायी उपचार की विधि में घोल से इलाके को रोशन करते हैं

इसके लिए खास विधि से तैयार घोल को शरीर के नसों के माध्यम से कैंसर प्रभावित कोशिकाओं तक पहुंचाया जा सकता है।

यह रसायन दो-तीन घंटे में अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है।

वहां पहुंचने के बाद रोशनी की मदद से यह कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना प्रारंभ करता है

जबकि आस पास के स्वस्थ इलाकों पर इसका कोई प्रभाव भी नहीं होता।

इससे अच्छी कोशिकाएं यथावत सक्रिय बनी रहती हैं।

साथ ही इंफ्रा रेड लेजर के लिए कैंसर प्रभावित इलाकों को साफ साफ देख पाने की वजह से

उन्हें समाप्त होते हुए भी देखा जा सकता है।

कैंसर के स्थायी उपचार में निम्न स्तरीय लेजर के इस्तेमाल से यह परीक्षण किया गया है।

इस विधि में नैनो पार्टिकल्स को काफी स्तर पर गर्मी प्रदान की जाती है।

इसके जरिए कैंसर प्रभावित इलाकों में कैंसर कोषों को नष्ट किया जाता है।

इस विधि का प्रारंभिक प्रयोग कैंसर कोशिकाओं के ईलाज की पहचान करना है।

इसी विधि को आगे बढ़ाते हुए कैंसर प्रभावित इलाकों को बढ़ने से रोकने के लिए तरीके को और परिष्कृत किया गया।

फ्लूरोसेंस इमेजिंग के विधि से तब यहां से रोशनी का विकिरण प्रारंभ होता है।

किसी खास इलाके तक इसका असर होने पर इस इलाके की तस्वीर स्पष्ट हो जाती है।

वैज्ञानिक विधि के बारे में दी गयी जानकारी के मुताबिक रमण फोटोन के माध्यम से यह तस्वीर स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है।

एक ही प्रकाश केंद्र से दोनों ही तरीके की तस्वीरें प्राप्त की जा सकती है।

कैंसर के ईलाज में इस विधि को और बेहतर बनाया गया है।

फोटो थर्मल विधि से कैंसर का इलाका भी स्पष्ट हो जाता है




वैज्ञानिकों ने फोटो थर्मल विधि से कैंसर कोशिकाओं पर जब इन फोटोन समूहों का प्रहार किया जाता है

तो ये क्रमवार तरीके से नष्ट किये जाते हैं।

दी गयी जानकारी के मुताबिक यह रोशनी कैंसर कोशिकाओं के बाहरी आवरण को तोड़न के बाद

अंदर की तरह प्रवेश करती जाती हैं।

उल्लेखनीय है कि इसके लिए सोने के नैनो पार्टकलों की मदद से कैंसर कोशिकाओं पर पड़ने वाली रोशनी

को नियंत्रित किया जा सकता है।

कैंसर के स्थायी उपचार के इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस काम को करने के लिए

शरीर के डीएनए क्रम को काम में लगाया गया है।

वे ही इस संकेत को शरीर के कैंसर प्रभावित इलाकों तक आसानी से पहुंचा देते हैं।

इस विधि का लाभ यह है कि खास इलाके तक ही इसका प्रभाव सीमित होने की वजह से शरीर पर इसका कुप्रभाव न्यूनतम हो जाता है।

इस बारे में डॉ जगन्नाथ मंडल ने बताया कि अब इसी तरीके से और परिष्कृत करने की तैयारी चल रही है।

प्रायोग में इसे सफल पाया गया है।

लिहाजा इसे क्लीनिकल ट्रायल के पहले पूरी तरह ठीक करने का काम चल रहा है।

यह काम पूरा होने के बाद इंसानी शरीर पर इसका प्रयोग किया जाएगा।

यदि यह विधि सफल होती है तो यह अब तक विकसित कैंसर के ईलाज की सबसे आसान और कम कष्टकारी विधि साबित होगी।

चूंकि इस विधि में कैंसर कोशिकाओं को जड़ से समाप्त किया जा सकता है

तो इसके प्रयोग से कैंसर पीड़ित रोगियों को भी इस जानलेवा बीमारी से

स्थायी तौर पर छुटकारा मिल सकेगा।

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