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कैंसर रोगियों के लिए वैज्ञानिकों ने खोजी उम्मीद की किरण




  • कैंसर कोशिकाएं खुद ही खुद को नष्ट कर देंगी
  • पहले  जरूरी रक्त कोशिकाओं की पहचान हुई
  • उस प्रोटिन को खोजा गया जो यह काम करे
  • प्रोटिन स्विच के सहारे कैंसर को मारने की विधि

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कैंसर से पीड़ित रोगियों और उनके परिजनों के लिए वैज्ञानिकों ने अनुसंधान के बाद  उम्मीद की नई रोशनी खोजी है।

इस नई विधि से यह उम्मीद की जा रही है कि इस जानलेवा बीमारी के विषाणु खुद ही अपने आप को समाप्त कर लेंगे।

इससे अनेक कैंसर रोगियों को पूरी तरह स्वस्थ होने में मदद मिलेगी।

प्रयोग के सफल होने पर इसे जानलेवा रोग के ईलाज के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम के तौर पर आंका जाएगा।

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इस दिशा में शोध करने वाले वैज्ञानिकों ने नई विधि का आविष्कार किया है।

प्रारंभिक परीक्षणों में यह विधि कारगर साबित हुई है।

इसके तहत उस कोशिका की पहचान की गयी है जो सामान्य कोशिकाओं में सामान्य विकास के तौर पर होती है

लेकिन कैंसर कोशिकाओं में यह सारी प्रक्रिया को अत्यधिक बढ़ा देती है।

जिससे पूरे शरीर में कैंसर प्रभावित कोशिकाओं की संख्या बढ़ने लगती है।

इसी वजह मरीज के शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विस्फोट से ग्रंथियों का विकास होता है

जो अंततः ट्यूमर में तब्दील हो जाते है क्योंकि यह कैंसर कोशिकाएं एक जगह एकत्रित हो जाती हैं,

जहां की स्वस्थ कोशिकाएं इनके दबाव में मर जाती हैं।

अब इस कोशिका के अंदर मौजूद एक सेल एमवाईसी की पहचान कर ली गयी है।

यह सेल ही कोशिकाओं को इस तरीके से नियंत्रित करती हैं।

कैंसर के ईलाज के लिए वैज्ञानिकों ने अनुसंधान में प्रोटिन को खोज निकाला

वैज्ञानिकों ने अपने शोध के तहत एक प्रोटिन को इसमें शामिल किया है।

यह प्रोटिन एटीएफ-4 है। यह प्रोटिन ही कई काम करने में मददगार है।

यह पाया गया है कि जब इसे रोक दिया जाता है तो कैंसर प्रभावित कोशिकाएं अपने आप ही इतनी अधिक मात्रा में प्रोटिन पैदा करने लगी हैं कि उनकी मौत हो जाती है।

प्रयोगशाला में इस विधि को सफलतापूर्वक आजमाया जा चुका है।

वैज्ञानिकों ने निरंतर अलग अलग विधिओं को आजमाने के क्रम में इस प्रोटिन को खोजा जा सका है।

इस शोध और उसके निष्कर्षों के बारे में एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका में शोध प्रबंध भी प्रकाशित किये गये हैं।

इस विधि के सफल होने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे चूहों पर भी आजमाया है।

चूहों के ऊपर भी प्रोटिन की आपूर्ति रोके जाने से कैंसर कोशिकाओं के अंदर वह सारी गतिविधियां हुई

जो कैंसर कोशिकाओं को अतिरिक्त प्रोटिन उत्पन्न करने पर मजबूर करने के बाद मरने को बाध्य कर गयीं।

इस विधि के सफल होने के बाद अब उसे और परिष्कृत किया जा रहा है।

शोध से जुड़े कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफसर कॉंस्टटैंटिनोस कूमेनिस ने कहा कि

इस प्रयोग के यहां तक सफल होने के बाद उसे और भी परिष्कृत करने की आवश्यकता है

ताकि यह इंसानों के इस्तेमाल के लायक हो सके।

इस प्रोटिन की विधि से कैंसर प्रभावित कोशियों को इधर उधर भागने का भी मौका नहीं मिलता।

वे एक ही स्थान पर टिके रहने और धीरे धीरे मरने को विवश हो जाती हैं।

 ईलाज का बेहतर और आसान विकल्प सामने आयेगा




शोध कर्ता यह मान रहे है कि इस उपलब्ध के बाद कैंसर के ईलाज का एक नया विकल्प शीघ्र ही सामने लाया जा सकेगा।

इसमें कैंसर कोशिकाओं के बदले प्रोटिन एटीएफ 4 पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

शोध में इसी प्रोटिन को कोशिकाओं तक सूचना पहुंचाने के केंद्र के तौर पर पहचाना गया है।

इसलिए वैज्ञानिक कोशिकाओं को संदेश पहुंचाने वाले इस केंद्र के जरिए ही कैंसर कोशिकाओं को गलत सूचना पहुंचाना चाहते हैं।

जिसकी वजह से कैंसर कोशिकाएं खुद ही खुद को नष्ट कर लें।

इससे कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए अभी प्रचलित कष्टदायक विधि से भी मरीजों को छुटकारा मिल जाएगा।

कैंसर पीड़ित रोगी चलते फिरते ही इस विधि से ईलाज की वजह से पूरी तरह स्वस्थ भी हो जाएगा।

इस आंतरिक वैज्ञानिक गतिविधि के निष्कर्षों का अध्ययन कर वैज्ञानिकों द्वारा

एक अन्य प्रोटिन 4 ई-बीपी तैयार करने वाली पद्धति का अध्ययन किया जा रहा है

क्योंकि यह प्रोटिन भी बीमार तथा सामान्य कोशिकाओं के अंदर मौजूद होता है।

उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है ताकि इस जानलेवा बीमारी के ईलाज में कोई और विधि भी जोड़ी जा सके।


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Rashtriya Khabar


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