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नहर की निकासी रोक दी तो डेढ़ हजार बीघा की फसल पानी में

प्रतिनिधि

मालदाः नहर की निकासी रोक दी गयी है। पहले इस निकासी के खुला होने की वजह से

किसानों को कोई परेशानी नहीं होती थी। लेकिन अब नहर की निकासी के रास्ते की जमीन

का मालिक बदल गया है। नये मालिक ने नहर का रास्ता रोक दिया है। इसका नतीजा है

कि इस इलाके के कई हजार बीघा मे लगी फसल पानी में डूब रही है। चाचोल इलाके के

हरिशचंद्रपुर ब्लॉक नंबर 1 के बसतपुर के इलाके में यह बड़ी परेशानी खड़ी हुई है। इस

इलाके में पानी की निकासी तुरंत करने के लिए किसान जिला प्रशासन के दरवाजे भी

पहुंचे हैं। दरअसल वहां हरिशचंद्रपुर के बारुई, तुलसीहाटा और रशीदाबाद ग्राम पंचायत के

इलाके में पानी की निकासी का रास्ता ही बंद कर दिया गया है।

यहां के बहादुरा पुल के नीचे से घघा नहर होते हुए यह पानी सीधे

महानंदा नदी में चली जाती थी इस इलाके में नहर के रास्ते में

कुछ रैयती जमीन भी है। प्राकृतिक तौर पर नहर का पानी ढलान

के रास्ते से होते हुए महानंदा में जाने से पानी की निकासी होती

रहती थी।

लेकिन इसी रास्ते के बीच की एक जमीन को उसके पुराने मालिक ने बेच दिया है। पुराने

मालिकों की तरफ से नहर के पानी को रोकने की कार्रवाई नहीं की गयी थी। लेकिन नये

मालिक ने वहां अपनी जमीन पर बांध बना लिया है। शायद उनकी अपनी जमीन पर

मछली पालन अथवा कोई और योजना है।

इससे कई हजार बीघा में लगे जूट की खेती के साथ साथ धान के

बिचड़े भी पानी में डूबकर सड़ने लगे हैं। प्रशासन का ध्यान

आकृष्ट करने के साथ साथ कृषि और कृषक बचाओ समिति के

तहत स्थानीय लोग भी आंदोलन पर उतर आये हैं क्योंकि यह उनकी कमाई से जुड़ा हुआ मामला है।

नहर के पानी की निकासी नये मालिक ने रोक दी

मामला पेचिदा होन के बाद बीडीओ अनिर्वाण बासु ने कहा कि इस समस्या के त्वरित

समाधान के लिए जिला प्रशासन से दिशा निर्देश मांगा गया है। स्थानीय किसान महबूब

आलम और लक्षण साहा जैसे किसान बता रहे हैं कि लगातार पानी में डूबे होने की वजह से

जूट की खेती का निचला हिस्सा सड़ रहा है। दूसरी तरफ धान के बीज भी पानी में डूब जाने

की वजह से सड़ने की स्थिति में आ गये हैं। इससे पूरे इलाके के किसानों को काफी

नुकसान हो सकता है। इनमें से अधिकांश ने कर्ज लेकर खेती की है। मामला गरमाने के

बाद जिला परिषद के सदस्य संतोष चौधरी ने भी इलाके का दौरा किया है। उन्होंने कहा कि

मामला गंभीर है और स्थानीय किसानों को नुकसान ना हो, इसके लिए प्रबंध किये जा रहे

हैं। ताकि पानी की निकासी हो और किसानों की पैदावार बचायी जा सके।


 

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