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पिछले चालीस वर्षों में लगातार बिगड़ी है कैलिफोर्निया की स्थिति




अमेरिका के इस इलाके में लगातार बढ़ रहा जलसंकट

कम वर्षा के लिए इंसानी छेड़खानी ही जिम्मेदार

अब रातों रात ही नहीं सुधर सकती है स्थिति

सारे आंकड़ों का विश्लेषण करने का नतीजा

कैलिफोर्नियाः पिछले चालीस वर्षों से ही धीरे धीरे इस इलाके की हालत बिगड़ने लगी थी। लेकिन इस बदलाव की गति इतनी धीमी थी कि लोग उसे समझ नहीं पाये थे। अब एक साल से यह संकट भयावह हो गया है।




वैज्ञानिकों ने वहां के आंकड़ों की जब नये सिरे से छानबीन की तो यह पता चला कि प्रकृति से छेड़छाड़ की वजह से वहां के हालात पिछले चार दशक से बिगड़ते जा रहे थे। अब जाकर भीषण जलसंकट से लोग परेशान हो गये हैं।

पैसिफिक नार्थवेस्ट नेशनल लैब (पीएनएनएल) ने कहा है कि पिछले चालीस वर्षों में जो हालत बिगड़ गये हैं, उसे फिर से सुधारने के लिए भी अब वक्त लगेगा और एक योजनाबद्ध तरीके से काम करते हुए ही धीरे धीरे सुधारा जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने बताया है कि ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव के साथ साथ कैलिफोर्निया के इलाके में इंसानों द्वारा लगातार प्रकृति से छेड़छाड़ की वजह से ही यह परिस्थिति उत्पन्न हुई है।




दूसरी तरफ इस बार बहुत कम बारिश होने की वजह से यहां के जलागारों और पाइप लाइनों से पानी की चोरी भी खूब हुई है। दरअसल वैज्ञानिक पिछले चालीस वर्षों का आंकड़ा समझ लेने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि बारिश का आंकड़ा धीरे धीरे कम होता चला गया है।

पिछले चालीस वर्षो में इंसान ने ही बिगाड़ी है हालत

यह इतनी धीमी गति से हुआ है कि आम आदमी इस बदलाव को समझ नहीं पाया है। अब परेशानी इतनी विकट हो गयी है कि इस पूरे इलाके की खेती पर संकट आ गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक किसी इलाके में बारिश का परिणाम वहां के पर्यावरण भी आधारित होता है।

इसलिए अगर यहां फिर से बारिश को पहले जैसा बनाना है तो यहां की परिस्थितियों को भी पूर्व स्थिति में लाना पड़ेगा, जो एक दिन में कतई नहीं हो सकता है। दूसरी तरफ वैज्ञानिक इस बात पर भी सहमत है कि इस माहौल के बिगड़ जाने का असली कारण इंसानों द्वारा प्रकृति से किया गया छेड़छाड़ ही है। इसलिए इंसानों ने पिछले चालीस सालों में जो गलती की है, उसे युद्धस्तर पर भी सुधारने की कोशिश हो तो उसमें भी समय लगना तय है।



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