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कड़ाई से उपायों से हम रोक सकते हैं कोरोना की तीसरी लहर

कड़ाई से नियमों को लागू करना होगा। जिस तरीके से पहले चरण में लॉकडाउन की कड़ाई

हुई थी। उसी किस्म की सख्ती की अभी भी सख्त आवश्यकता है। यह कहने मे हिचक

नहीं होनी चाहिए कि औसत भारतीय अपने परिवेश की वजह से स्वअनुशासित नहीं

होता। उसे अनुशासित रखने के लिए पुलिस का डंडा काम करता है। वरना वह खुद भी

अच्छी तरह जानता है कि उसे कौन सा काम करना चाहिए और कौन सा नहीं करना

चाहिए। कोरोना संकट की रफ्तार सितंबर में थोड़ी धीमी पड़ने के बाद सरकार ने ढील क्या

दी, सारे के सारे बेलगाम घोड़े की तरह भागने लगे थे। उसका खामियजा अब हमारे सामने

हैं। प्रतिदिन चार लाख से अधिक का संक्रमण और चार हजार से अधिक मौतें दुखदायी है।

अगर हम इस दूसरी लहर के बाद यह नहीं चाहते हैं कि उसकी तीसरी लहर भी आये तो हमें

सीधे सीधे कड़ाई से नियमों और प्रावधानों को लागू करना पड़ेगा। केंद्र सरकार के प्रधान

वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने भी तीसरी लहर के आने की चेतावनी देने के दो

दिन बाद शुक्रवार को कहा कि अगर सख्त उपाय किए जाते हैं तब कोविड की तीसरी लहर

देश के सभी हिस्से में या कहीं भी नहीं आएगी। उन्होंने 5 मई को कहा था, हमें नई लहर के

लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लोग लापरवाही बरतेंगे और खुद की रक्षा

नहीं करते हैं तब संक्रमण के नए मौके तैयार हो सकते हैं। उन्होंने कहा, संक्रमण के इस

तरह के उतार-चढ़ाव और इसकी व्यापकता को जरूर कम किया जाना चाहिए। यह हमारे

हाथ में है।

कड़ाई से इसे रोकना पूरी तरह हमारी हाथों में है

उन्होंने यह भी कहा कि संक्रमण की लहर और संक्रमित लोगों की संख्या के बजाय स्थान,

समय और संक्रमण की तीव्रता पर बात करना ज्यादा उपयोगी होगा, हालांकि आम तौर

पर लहर और संक्रमितों की तादाद पर ही बात होती है। विजयराघवन ने कहा, ‘वायरस को

संक्रमण का मौका भले न मिले लेकिन यह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में जब भी वायरस को

संक्रमण के अनुकूल नए मौके मिलेंगे तब संक्रमण के मामले दिखेंगे। ऐसे में यह इस बात

पर निर्भर करेगा कि दिशानिर्देशों को कितने प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।’ उन्होंने

कहा कि जब तक टीकाकरण का कवरेज अधिकतम नहीं हो जाता तब तक प्रत्येक

निवारक कदम संक्रमण की बढ़ती रफ्तार में कमी ला सकता है और संक्रमितों की तादाद

कम हो सकती है। सरकार ने कहा है कि राज्यों को कुल 17 करोड़ खुराक की आपूर्ति की

गई है और राज्यों के पास अब भी 90 लाख से अधिक कोविड टीके की खुराक उपलब्ध है।

अगले तीन दिनों में राज्यों को 10 लाख खुराक और पहुंचाई जाएंगी। नीति आयोग के

सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने यह भी कहा कि स्पूतनिक टीके की एक खुराक तैयार

करने का वादा काफी आशाजनक है और भारत को इसके लिए इम्यूनोजेनिसिटी डेटा का

अध्ययन करना होगा। उन्होंने कहा, हम दावे की जांच करेंगे। थोड़ी और अधिक जानकारी

आने दें। हालांकि 15 राज्यों में संक्रमण के नए मामलों में गिरावट देखी जा रही है लेकिन

केंद्र सरकार दक्षिणी एवं पूर्वोत्तर राज्यों सहित 18 राज्यों में बढ़ते संक्रमण को लेकर

चिंतित है। स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव आरती आहूजा कहती हैं, हमने राज्यों

में संक्रमण के मामलों में गिरावट या बढ़ोतरी को देखने के लिए सात दिनों के औसत

मामलों का अध्ययन किया है। हमें संक्रमण के मामलों पर नजर बनाए रखनी होगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूरी स्थिति की फिर समीक्षा की है

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आठ राज्यों असम, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर

प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ कोविड-19 संक्रमण की स्थिति एवं प्रबंधन

की समीक्षा की है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ऑक्सीजन के लिए स्वीकृत 162 प्रेशर

स्विंग एडसॉप्र्शन (पीएसए) संयंत्रों में से 71 स्थापित किए जा चुके हैं और 109 मई महीने

के अंत तक स्थापित कर दिए जाएंगे। शेष संयंत्र जून के अंत तक स्थापित किए जाएंगे।

पूरे देश में कुल 1,594 पीएसए संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। विजयराघवन और पॉल ने

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना नदी में तैरते हुए मिले शवों पर चिंता को लेकर स्पष्ट

किया कि कोरोनावायरस जल-जनित नहीं है।

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