कालेधन की जांच कर रही एसआईटी भी आरटीआई के दायरे में, खुलेंगे सबके राज

एसआईटी विदेशों में रखे गये कालेधन के मामलों की जांच कर रही है।

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कालेधन पर उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एक सरकारी अधिसूचना के जरिये 2014 में एसआईटी का गठन किया गया।

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद कालेधन पर गठित विशेष जांच दल एसआईटी सूचना के अधिकार कानून जुल्का ने एसआईटी को आरटीआई कानून के दायरे में लाते हुये कहा कि सरकार का हर कदम जनता की बेहतरी और लोक हित में होना चाहिये।

कालेधन पर उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एक सरकारी

अधिसूचना के जरिये 2014 में एसआईटी का गठन किया गया।

इसका मकसद अर्थव्यवस्था में कालेधन का आकलन करना और

उसके सृजन पर अंकुश के लिये उपाय सुझाने के लिये किया गया।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एम बी शाह की अध्यक्षता

में कालेधन पर एसआईटी का गठन किया गया।

एसआईटी विदेशों में रखे गये कालेधन के मामलों की जांच कर रही है।

इस मामले में वह भारतीय रिजर्व बैंक, खुफिया ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय

और केन्द्रीय जांच ब्यूरो तथा वित्तीय आसूचना इकाई और शोध

एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के अलावा डीआरआई जैसी विभिन्न सरकारी

एजेंसियों के साथ समन्वय बिठाते हुये काम रही है।

एसआईटी के आरटीआई कानून में दायरे में आने के संबंध

में आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने वित्त मंत्रालय से

जानकारी मांगी थी। इसमें उन्होंने सात बिंदुओं पर जानकारी

मांगी थी जिसमें एचएसबीसी बैंक की जिनेवा शाखा के पूर्व

कर्मचारी हर्वे फाल्सिनी द्वारा एसआईटी चेयरमैन को भेजे गये पत्र और उसकी प्रतिलिपी मांगी थी।

वित्त मंत्रालय और आयकर विभाग ने आरटीआई के तहत मांगी गई कुछ जानकारी देने से यह कहते हुये इनकार किया था कि यह किसी के विश्वास का मामला है और इसमें जांच चल रही है। यह भी कहा गया कि इसमें कुछ जानकारी एसआईटी के सदस्य सचिव के पास उपलब्ध होगी। इसके बाद नायक ने सूचना आयोग का रुख किया और आयोग से इस संबंध में एसआईटी को उपयुक्त आदेश देने का आग्रह किया।

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