एयर इंडिया की कमान 64 साल बाद फिर से टाटा ग्रुप के हाथ में

1948 में एयर इंडिया इंटरनेशनल की स्थापना की।

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एयर इंडिया की फ्लीट में 118 जहाज हैं और भारत से सबसे ज्यादा पैसेंजर्स को मंजिल तक पहुंचाता है।

आज से 85 साल पहले एयर इंडिया की स्थापना करने वाले टाटा ग्रुप को कंपनी का नियंत्रण छोड़ना पड़ा था, लेकिन टाटा ग्रुप अब फिर से एयर इंडिया को अपना हिस्सा बनाना चाहता है।

अगर टाटा ग्रुप एयर इंडिया का अधिग्रहण कर लेता है तो

वह एयर इंडिया का स्वामित्व उसके राष्ट्रीयकरण होने के

64 साल बाद पा लेगा। सरकार घाटे में चल रहे एयर इंडिया को बेचने की तैयारी में है।

टाटा सन्स ने टाटा एयरलाइंस की स्थापना 1932 में की थी।

कराची से बॉम्बे की पहली फ्लाइट खुद जेआरडी टाटा ने उड़ाई थी।

आजादी से पहले 1946 में टाटा एयरलाइंस सार्वजनिक कंपनी

बन गई और इसका नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया।

प्लेन उड़ाना जेआरडी टाटा का जुनून था। कंपनी की वेबसाइट के

मुताबिक, जहाज उड़ाने के लिए क्वालिफाई करने वाले वह पहले

भारतीय थे। वेबसाइट में बताया गया है, ‘हवाई जहाज

उड़ाने का लाइसेंस उन्हें 1929 में मिला। भारत में कमर्शल

एविएशन लाने वाले वह पहले व्यक्ति थे। 1948 में उन्होंने

एयर इंडिया इंटरनैशनल की स्थापना की। 1978 तक

वह एयर इंडिया की जिम्मेदारी संभाले रहे।’

1953 में जब सरकार ने ‘बैकडोर से’ (जैसा जेआरडी टाटा कहते हैं)

एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया तब वह दुनिया की श्रेष्ठ

एयरलाइंस में थी। टाटा को जब पता चला कि तत्कालीन पीएम

जवाहर लाल नेहरू ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया है वह भी उन्हें बिना बताए तो उन्हें बड़ा झटका लगा। हालांकि टाटा ने राष्ट्रीयकरण के बाद एयरलाइंस के चेयरमैन का पद संभाल लिया। उनके नेतृत्व में कंपनी 1977 तक अच्छे से संचालित होती रही। 1977 में पीएम मोरारजी देसाई ने टाटा को उनके पद से हटा दिया।

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