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तीन अलग-अलग अभियानों में बीएसएफ ने बीस तस्करों को गिरफ्तार किया

  • सभी सीमा पर अभी बरती जा रही है खास सतर्कता

  • सीमा पार के लिए 15,000 रुपये प्रति तस्कर को मिलता है

  • मवेशियों की तस्करी से जुड़े हैं अनेक लोग

  • हर रोज छह सौ से हजार मवेशियों की तस्करी

  • सीमा पार कर बांग्लादेश भेजा जाता है मवेशी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: तीन अलग- अलग अभियानों में पशु तस्करी से जुड़े बीस तस्कर सीमा सुरक्षा

बल के हाथों गिरफ्तार किये गये हैं। भारत में कोविद -19 लॉकडाउन का लाभ उठाकर

मवेशियों की तस्करी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। असम के धुबरी जिले के दक्षिण सलामारा

में तीन अलग-अलग अभियानों में, सीमा सुरक्षा के गुवाहाटी फ्रंटियर के सैनिक फोर्स ने

बीस तस्करों को गिरफ्तार किया है। पिछली रात बीएसएफ़ ने दोनों देशों को

बांटती विशालकाय ब्रह्मपुत्र नदी से तस्करी किए जा रहे मवेशी पकड़े हैं। सीमा सुरक्षा बल

(बीएसएफ) के सीमा सुरक्षा का गुवाहाटी फ्रंटियर के जवानों ने असम के धुबरी जिले में

भारत-बांग्लादेश सीमा के पास मवेशियों की तस्करी को नाकाम करते हुए पाँच पशु

तस्करों को गिरफ्तार किया है। बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तीन

तस्करों को 5 मवेशियों के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा के पास इलाके से जवानों ने

गिरफ्तार किया जब मवेशियों को ब्रह्मपुत्र नदी में बहाकर बांग्लादेश में तस्करी की

कोशिश की जा रही थी। असम के धुबरी जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पार कराने के लिए

प्रति तस्कर को मिलते हैं 15,000 रुपये। बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि ये तीनों

तस्कर काफी समय से पशु तस्करी में लिप्त हैं तथा ये भारत-बांग्लादेश सीमा पर

“रखाल” (अंतर्राष्ट्रीय सीमा को पार कराने वाला) के रूप में काम करते हैं। इनका कार्य

धुबरी आदि से लेकर भारत से बांग्लादेश पहुंचाने का है। भारत के सीमावर्ती इलाके

मुर्शिदाबाद, मालदा, कूचबिहार और धुबरी आदि में बड़े पैमाने पर गायों की तस्करी होती

है। पूछताछ में पता चला है कि इस तरह से तस्कर व्यक्ति को भारत से बांग्लादेश तक

मवेशियों को ले जाने के लिए 15000 प्रति मवेशी मिलते हैं। इस बीच, असम में सोनापुर

पशु तस्करी के लिए एक संक्रमण बिंदु के रूप में उभरा है।

तीन अलग-अलग अभियानों में पशु तस्करी के अनेक राज खुले

पिछले कुछ वर्षों में असम राज्य में मवेशियों की तस्करी बड़े पैमाने पर हुई है।कुछ लोगों

ने असम और गुवाहाटी में एक पशु तस्करी सिंडिकेट के अस्तित्व पर आरोप लगाया है।

बीएसएफ अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, हरियाणा

और बिहार से लाया जाता है और हर दिन वे 600 से 1,000 मवेशियों को असम से

बांग्लादेश ले जाते हैं। इसका उल्लेख करें कि असम राज्य के धुबरी ज़िले की ये आखिरी

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर आउट-पोस्ट है जो मीलों तक नदी से घिरी हुई है।कुछ गांव वाले

पकड़े गए मवेशियों को चारा देने के लिए बुलाए गए हैं और पहली नज़र में ही साफ़ हो

जाता है कि इस कद-काठी वाले मवेशी असम में ढूंढ़ने पर भी नहीं मिलते। निगरानी करने

वाले गार्ड बताते हैं कि इन दिनों तस्करों ने ज़मीन से कम और नदी में तैराकर तस्करी

करने पर ज़्यादा ध्यान दिया हुआ है। भारत और बांग्लादेश बॉर्डर 4,000 किलोमीटर से भी

लंबा है जो दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी सीमा है। अकेले असम में ये सीमा 250

किलोमीटर से ज़्यादा लंबी है और जटिल भी क्योंकि अधिकांश ब्रह्मपुत्र नदी के पानी से

बँटी हुई है। अनुमान है कि इस सीमा से हर साल क़रीब 10 लाख मवेशियों की तस्करी

बांग्लादेश में होती रही है।2014 में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार सत्ता में

आई थी और उसने गाय की तस्करी बंद करने का वादा किया था। 2015 में गृह मंत्री

राजनाथ सिंह ने बॉर्डर दौरे के क्रम में कहा था, “सभी राज्यों को तस्करी रोकने के लिए

क़दम उठाने होंगे। हम इन मवेशियों को बांग्लादेश नहीं जाने देंगे।

भाजपा की सरकार के बाद भी नहीं रुकी है तस्करी

इस बीच 2016 में असम में विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 15 साल से सत्ता में रही

कांग्रेस को शिकस्त दी। आम जनता के पास सवाल है कि अब केंद्र में भी सरकार भाजपा

की है और प्रदेश में भी। तो फिर मवेशियों की तस्करी पर लेटेस्ट क्या है? बीएसएफ

अधिकारी ने कहना है कि इंडो-बांग्ला फ्रंटियर पर सीमा पार से होने वाली तस्करी को पूरी

तरह नहीं रोका जा सकता है। बीएसएफ ने इस खतरे से निपटने के लिए बांग्लादेश के

सीमा बल से अधिक से अधिक सहयोग की मांग की है। दोनों देशों की सीमा की सुरक्षा

करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सीमा गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के लिए

मवेशी, ड्रग्स और नशीले पदार्थों, चमड़ा, हथियार और गोला-बारूद की तस्करी बड़ी

चुनौती है।


 

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