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ब्रिटेन में परीक्षण के पहले ही एक लाख वैक्सिन बनाने की तैयारी

  • हरी झंडी मिलते ही पूरी दुनिया तक पहुंचेगी दवा

  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में चल रहा है काम

  • कई संस्थाएं भी वैक्सिन बनाने में जुटी

  • सात केंद्रों से पूरी दुनिया को दवा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ब्रिटेन में कोरोना की लड़ाई में खुद को आगे रखने की तैयारियां जोरों पर हैं।

इस क्रम में वह क्लीनिकल ट्रायल पूरा होने के पहले ही एक लाख वैक्सिन बनाकर तैयार

रखने की योजना पर काम प्रारंभ कर चुकी है। दरअसल यह तैयारी इसलिए है ताकि जिस

वैक्सिन को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों पर खरा समझा जाए, उसका उत्पादन

प्रारंभ करने में विलंब नहीं हो। पहले से ही उत्पादन लाइन चालू होने की वजह से यह काम

मान्यता मिलने के अगले ही पल से प्रारंभ किया जा सकेगा। इस बीच ब्रिटेन में इस बीच

कोरोना का कहर थोड़ा कम होता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन इसके बाद भी संक्रमण की

जांच में वह कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। संक्रमण वाले इलाके के हर नागरिक की जांच

हो रही है और त्वरित गति से जांच का विश्लेषण भी हो रहा है। भारत की वास्तविक

स्थिति का पता इसलिए नहीं चल पा रहा है क्योंकि यहां जांच की प्रक्रिया बहुत धीमी है

और आबादी के अनुपात में यहां बहुत कम लोगों की जांच हुई है

ब्रिटेन में यह तैयारी सितंबर तक दवा लाने की तैयारी में

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने वैक्सिन बनाने का काम अभी से ही प्रारंभ किया है ताकि सितंबर तक

यह पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो सके। इस बीच वैक्सिन के ट्रायलों की प्रारंभिक रिपोर्ट भी

आने की उम्मीद है। ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की टीम ने एक परीक्षण उत्पाद

तैयार किया है। इसका नाम सीएचएडीओएक्स1एनसीओवी-19 रखा गया है। यह

दरअसल कई दवाइयों का मिश्रण है। इसे वायरल वैक्टर वैक्सिन की श्रेणी में रखा गया है।

इसी किस्म के 70 अन्य वैक्सिन भी अभी परीक्षण और अनुसंधान की दौड़ में शामिल हैं।

इन 70 में से पांच का इंसानों पर भी परीक्षण किया जा रहा है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय

के वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रारंभिक स्टेज में जांच के लिए स्वयंसेवकों को भी बहाल किया

जा रहा है। उत्पादन की सारी तैयारियां पूरी कर स्टॉक जुटाकर सुरक्षित रखने का काम

इसलिए किया गया है ताकि जिस भी वैक्सिन को मान्यता मिले, उसका इस्तेमाल तुरंत

प्रारंभ हो और साथ ही उसका उत्पादन भी तेज किया जा सके। अधिक उत्पादन इसलिए

नहीं किया जा रहा है क्योंकि असफल साबित होने पर यह वैक्सिन बेकार चला जाएगा

और उनके उत्पादन में खर्च भी व्यर्थ जाएगा।

दुनिया के हर हिस्से तक दवा पहुंचाने की योजना

इस काम ले जुड़े ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के जेनिफर इंस्टिटियूट के निदेशक और

प्रोफसर एड्रियान हिल ने कहा कि हमलोगों ने कम उत्पादन के बाद भी पूरी दुनिया में

इसके जल्द उत्पादन की सारी व्यवस्था कर रखी है। पूरी दुनिया में सात स्थानों पर एक

साथ उनका उत्पादन किया जा सकेगा। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि उत्पादन प्रारंभ

होने के बाद दुनिया के हर हिस्से में जल्द से जल्द यह वैक्सिन उपलब्ध कराया जा सके।

एक स्थान पर इसे केंद्रित रखने में उसे पूरी दुनिया में पहुंचान में अतिरिक्त संसाधन और

समय लगेगा। वर्तमान चुनौती के दौर में लोगों तक जल्द वैक्सिन पहुंचे, यही प्राथमिकता

है। उनके मुताबिक भारत में भी इस काम के लिए एक सहयोगी कंपनी है जो हरी झंडी

मिलते ही यह काम प्रारंभ कर देगी। भारत में भी इसके उत्पादन की सारी तैयारियां पूरी

कर ली गयी है।

सारी दुनिया में जल्द दवा पहुंचे इसलिए काफी पैसा निवेश

इस शोध के बारे में वैज्ञानिक मानते हैं कि यह एक बहुत बड़ा आर्थिक खतरा है क्योंकि इन

तैयारियों पर लाखो पाउंड खर्च किये जा चुके हैं। इस खर्च का विवरण नहीं देने के बाद भी

वैज्ञानिक मानते हैं कि तेजी से उत्पादन करने की पूर्व तैयारियों में बहुत कुछ इंतजाम

करना पड़ता है। उन सारी तैयारियों में आर्थिक खर्च तो निश्चित तौर पर शामिल रहता है।

दुनिया भर में इस कोरोना वायरस से अब तक 20 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं

और हर दिन यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। वैक्सिन का प्रारंभिक ट्रायल भी खास आयु

वर्ग के लोगों के बीच ही किया जाना है, उसकी घोषणा वैज्ञानिक दल के द्वारा कर दी गयी

है। इस वैक्सिन के ट्रायल में 18 से 55 आयु वर्ष के लोगों को ही शामिल किया जाएगा।

सही परिणाम आने के बाद उसे अन्य आयु के लोगों पर भी धीरे धीरे आजमाया जाएगा।

अंतिम चरण के ट्रायल में पांच हजार स्वयंसेवक इसमें शामिल होंगे।

ब्रिटिश सरकार भी इन तैयारियों के पक्ष में

दूसरी तरफ ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि वैक्सिन को लोगों तक जल्द पहुंचाने की योजना

को उसका पूरा समर्थन है। इसलिए सरकार ने भी इन तमाम योजनाओं के मद में 14

मिलियन पाउंड पूंजी निवेश किया है। 21 प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इन सभी का

मकसद कोरोना के लिए वैक्सिन जल्द बनाना ही है। इस काम में दो ऐसी संस्थाएं भी जुड़ी

हुई हैं जो लाभ कमाने के कारोबार से जुड़ी हुई नहीं हैं। यह जानकारी ब्रिटेन के वित्त मंत्री

आलोक शर्मा ने दी है। श्री शर्मा के मुताबिक इसके लिए अलग से एक टास्क फोर्स भी

गठित किया गया है जो आपसी तालमेल से इस संबंध में त्वरित फैसला लेने के लिए

अधिकृत है। इस टास्क फोर्स का नेतृत्व मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी पैट्रिक वालेंस कर रहे हैं

जबकि इस दल में प्रोफसर जोनाथन वैन टैम भी शामिल है


 

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