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ब्राजिल में भी पाया गया अज्ञात वायरस

  • पामपुल्हा झील से मिला है यह नया विषाणु

  • इसके अधिकांश जिनोम अपरिचित साबित हुए

  • शायद आकार छोटा कर खुद को बदला है इसने

  • कोरोना और तिब्बत के ग्लेशियरों के बाद नई चेतावनी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ब्राजिल में भी एक अज्ञात किस्म का वायरस पाया गया है।

इस वायरस की पहचान होने के बाद भी वह पहले से मिले वायरसों से

मेल नहीं खाता है। इसलिए उसे नई प्रजाति का वायरस माना गया है ।

इसे यारा वायरस का नाम दिया गया है। इस नाम के पीछे भी ब्राजिल

की किवंदति शामिल है। दरअसल ब्राजिल में पानी की रानी को

पौराणिक कथाओं में यारा अथवा लारा कहा जाता रहा है। इसी आधार

पर इस वायरस की पहचान वहां से पामपुल्हा झील से होने के बाद

उसका भी नाम इसी आधार कर किया गया है। अब तक इसके घातक

हमलों की जानकारी तो नहीं मिली है। लेकिन अपने किस्म का पहला

वायरस नजर आने के बाद वैज्ञानिक इसके खतरों पर शोध कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों को प्रारंभिक अनुसंधान में यह पता ही नहीं चल पा रहा है

कि दरअसल इस अनजाने वायरस को किस प्रजाति का वायरस माना

जाए। पानी में मौजूद होने की वजह से उसे एमियोबल वायरस की

श्रेणी में रखा गया है। लेकिन इसका जुड़ाव किस प्रजाति से है, यह

स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसकी उत्पत्ति कहां से हुई है, इस बारे में भी

अब तक वैज्ञानिक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाये हैं।

ब्राजिल के पहले तिब्बत में भी वायरस पाये गये हैं

उल्लेखनीय है कि हाल ही में चीन के वूहान शहर में कोरोना वायरस का

पता चला है। इस वायरस की वजह से वहां करीब एक हजार लोग मारे

गये हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पांच लाख लोग इसकी चपेट में

आ चुके हैं। शोध करने वालों ने इस वायरस के फैलने का कारण

पैंगोलिन नामक जीव को माना है। इसे हिंदीपट्टी में वज्रकीट के नाम से

जाना जाता है। इसके अलावा तिब्बत के हिम शिखरों पर बर्फ के अंदर

से निकलने वाले 28 किस्म के नये वायरसों का पता चला है। लेकिन

बर्फ के अंदर से निकलने की वजह से यह माना गया है कि वे पृथ्वी पर

काफी समय से मौजूद हैं सिर्फ घने बर्फ के नीचे दबे होने की वजह से वे

सुप्तावस्था में थे। बर्फ पिघलने की वजह से वे जब बाहर आये हैं तो

अपनी गहरी निद्रा से जागकर पानी में घूल रहे हैं। इस लिहाजा से हाल

के दिनों में ब्राजित में तीसरे किस्म के अज्ञात वायरस की जानकारी

दुनिया को मिली है।

फ्रांस के एइक्स मार्शेली विश्वविद्यालय और ब्राजिल के फेडरल विश्व

विद्यालय के शोधकर्ताओं ने इसका पता लगाया है।  इस शोध से जुड़े

लोगों ने करीब दो वर्ष पूर्व पानी के एक अन्य टूपान वायरस की खोज

की थी। अब नये वायरस की संरचना के बारे में भी इसी दल ने पता

लगाया है। टूपान वायरस का पता लगाने के क्रम में यह बताया गया

था कि आकार में ये वायरस थोड़े बड़े हैं और उनके बाहरी हिस्से पर

प्रोटिन का मजबूत आवरण भी है। अब तक के अनुसंधान में यह पाया

गया है कि उनकी वनावट भी काफी जटिल है। इन्हीं जटिलताओं की

वजह से ऐसे वायरस के पास कई नये हथियार भी पाये गये हैं।

इसकी संरचना देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं

मसलन वे  अपने डीएनए में खुद ही सुधार कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे अपने डीएनए की पूरी नकल कर रहे हैं। उनपर आम हमला

असर नहीं कर पाता है। इनके इसी गुण की वजह से वैज्ञानिकों को

पहली बार इस बात की जानकारी मिली है कि वायरस भी अपने आप

ही बहुत कुछ कर पाते हैं। इससे पहले वायरसों की इस क्षमता का पता

वैज्ञानिकों को नहीं था। अब इस नये यारा वायरस के बारे में पता चला

है कि यह आकार में टूपान वायरस से काफी छोटा है। लेकिन इसकी

जिनोम संरचना बिल्कुल अलग है। उनके गुणों की वजह से इसे अपने

किस्म का पहला वायरस माना जा रहा है। लिहाजा उसकी पूरी संरचना

को वर्गीकरण किया जा रहा है। वैज्ञानिक इस बात को जानकर भी

हैरान हैं कि इसकी संरचना में कुछ जीन ऐसे भी हैं, जिनके बारे में

पहले से कोई जानकारी नहीं रही है। इनकी संरचना में सिर्फ छह ऐसे

जीन हैं, जो पहले से ज्ञात हैं। वैज्ञानिकों के पास मौजूद साढ़े आठ

हजार से अधिक जिनोम में से कोई भी इसकी शेष संरचना से मेल नहीं

खाता है। अभी के तथ्यों के मुताबिक यह वायरस की श्रेणी में भी नहीं

आता है लेकिन बाकी आचरण से वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि कभी

विशाल आकार का रहा यह वायरस विवर्तन की प्रक्रिया के तहत खुद

को अत्यंत छोटे आकार का बनाने में कामयाब रहा है।

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