जुमलों पर दोनों पक्षों की जुमलेबाजी महज चुनावी पैंतरा

जुमलों पर दोनों पक्षों की जुमलेबाजी
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जुमलों पर चुनावी जुमलेबाजी जोरदार तरीके से हो रही है।

वैसे इस शब्द यानी जुमला को सबसे अधिक चर्चित बनाया था जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने।

देशद्रोह के आरोप में जेल से छूटकर आने के बाद कन्हैया ने जब जेएनयू परिसर में जोरदार भाषण दिया था

तभी उसने जुमला और जुमलेबाजों की  बात कही थी।

उसके बाद से हर मौके पर वह इसकी याद दिलाना भी नहीं भूलते।

इसलिए जब इस किस्म की कोई बात होती है तो फिर से यह शब्द बरबस ही याद आ जाता है।

इस बार बारी केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान की है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि नारेबाजी से न तो किसानों की समस्यायें दूर हो सकती हैं,

न ही ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता सुधर सकती है।

श्री जेटली ने अपने ब्लॉग पर यूपीए और एनडीए सरकार के कामकाज की तुलना करते हुये कहा कि

वर्ष 1971 के बाद से कांग्रेस की नीति जुमलों की रही है, न कि संसाधन की।

ठीक इसके उलट कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की तमाम चुनावी वादों को

फिर से जुमला करार देते हुए कहा है कि

इस सरकार ने अपना एक भी वादा ठीक ढंग से पूरा नहीं किया है।

श्री जेटली कहते हैं कि राजग ने ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधन झोंका है।

इससे बुनियादी ढाँचों में सुधार हुआ है और लोगों की जीवन की गुणवत्ता भी सुधरी है।

इससे कृषि उत्पादकता बढ़ी है और किसानों को बेहतर कीमत देने की कोशिश की गयी है।

उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्ष तो सिर्फ शुरुआत है।

जुमलों की बारिश में जेटली ने इस साढ़े चार साल का उल्लेख किया

यदि इस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में अगले दो दशक तक वार्षिक वृद्धि के साथ निवेश जारी रहेगा

तो लोगों को बेहतर जीवनशैली मिल सकेगी और शहरी क्षेत्रों की तरह ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर भी होंगे।

उन्होंने कहा कि किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और उनकी आय में बढ़ोतरी के लिए

सरकार ने पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है।

कृषि शोध एवं शिक्षा पर निवेश बढ़ाया गया है। सिंचाई में भी निवेश बढ़ाया गया है।

गरीबों की मदद के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए मनरेगा पर इस वर्ष

60 हजार करोड़ रुपये दिये गये हैं जो संप्रग सरकार के कार्यकाल में किये गये व्यय की तुलना में दो गुना है।

ग्रामीण गरीबों सहित सभी गरीबों के लिए खाद्य सब्सिडी के वास्ते 1.6 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

दूसरी तरफ राहुल गांधी कह रहे हैं कि मोदी सरकार के बेरोजगारों को धोखा देने का ही नतीजा है कि

रोजगार नहीं मिलने से परेशान अलवर के चार युवकों को आत्महत्या करनी पड़ी।

श्री गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था

लेकिन उन्होंने जनता को धोखा दिया तथा हालात यहां तक हो गए कि हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार अलवर में 4 युवाओं ने रोजगार के अभाव में आत्महत्या की।

राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह हर भाषण में भारत माता की जय बोलते हैं।

यह उनका दिखावा है असल में वह भारत माता की जय भाषण में ही बोलते हैं

लेकिन काम करते हैं अनिल अंबानी, ललित मोदी, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के लिए।

राहुल के जुमलों में मोदी को कोसने के अलावा कुछ विशेष नहीं

श्री गांधी ने कहा कि राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनते ही 10 दिन में कर्ज माफ करेगी।

उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने काला धन के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात कहीं थी लेकिन नोट बंदी कर आम जनता को कतार में लगा दिया।

कुल मिलाकर दोनों पक्ष जिन मुद्दों को बात कर रहे हैं उसमें भविष्य की कोई ठोस योजना अथवा सामने नजर नहीं आती।

श्री जेटली अब भी पुरानी सरकार के साथ अपनी तुलना में व्यस्त हैं और यह नहीं बता पा रहे है कि

उनकी सरकार ने अपने चुनावी वादों में से कितनों को किस हद तक पूरा किया है अथवा पूरा करने की कोशिश की है।

दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष भी मोदी सरकार को कोसने के अलावा अपनी तरफ से

ठोस किसी कार्ययोजना पर बात करने की शायद स्थिति में ही नहीं हैं।

यानी दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पक्ष अब तक यह शायद समझ भी नहीं पा रहे हैं कि

देश की जनता की सोच इनदिनों बदल चुकी है।

वह इतिहास से सबक तो लेती है पर इतिहास के भरोसे भविष्य को भूलना नहीं चाहती।

दोनों ही दल सिर्फ चुनावी जुमलेबाजी से जनता को भरमाने का भ्रम पाले बैठे हैं।

इसी बात से चुनावी समर अचानक कठिन होता जा रहा है

क्योंकि दलगत नीतियों में कोई स्पष्टता नहीं होने की वजह से अब मतदाता प्रत्याशी पर ध्यान दे रहे हैं।

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