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बुस्टर डोज को लेकर वैज्ञानिक तो एकमत हों




बुस्टर डोज को लेकर चिकित्सा विज्ञानी भी एकमत नहीं हैं। कई देशों, जिनमें भारत भी शामिल हैं, इस बुस्टर डोज की वकालत की जा रही है। दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जब तक पूरी दुनिया को कोरोना के टीके नहीं लग जाते हैं, ऐसे किसी बुस्टर डोज का कोई फायदा नहीं है। इसलिए आम लोगों के बीच इस मुद्दे पर भ्रम की स्थिति अब भी बनी हुई है।




दरअसल चिकित्सा विज्ञान के जटिल वैज्ञानिक परिभाषाओँ को आम आदमी समझ भी नहीं पा रहा है। दूसरी तरफ तमाम तरह के दावों के बीच यह भी साफ नहीं हो पाया है कि यह वायरस किस रास्ते से इंसानों तक पहुंचा है। यूरोप के कई देशों में इस वायरस के अस्तित्व पर ही सवाल उठाये जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि यह दरअसल एक वैश्विक धोखा है।

ऐसी स्थिति में सबसे अधिक जरूरी है कि चिकित्सा विज्ञान इस मुद्दे पर एक राय कायम करे ताकि जनता के बीच जो भ्रम की स्थिति बनी है, वह दूर किया जा सके।

अब भारत की बात करें तो भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 रोधी टीके की बूस्टर खुराक (यानी तीसरी खुराक) देने की जरूरत के समर्थन में अब तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि फिलहाल वयस्क आबादी को टीके की दूसरी खुराक दी जाए। सूत्रों के मुताबिक, भारत में टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) की अगली बैठक में बूस्टर खुराक को लेकर चर्चा की जा सकती है।

बुस्टर डोज लगाने की भारत में तैयारी जारी है

भार्गव ने बताया, सरकार की फिलहाल प्राथमिकता है कि संपूर्ण वयस्क आबादी को टीके की दूसरी खुराक लगाई जाए और न सिर्फ भारत में बल्कि की पूरी दुनिया में टीकाकरण सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा, वहीं, कोविड के खिलाफ बूस्टर खुराक की जरूरत का समर्थन करने के लिए अब तक वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है।

बूस्टर खुराक लगाने की संभावना पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल में कहा था कि टीकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और लक्ष्य है कि आबादी को टीके की दोनों खुराकें लगाई जाएं।

उन्होंने कहा था कि विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर बूस्टर खुराक पर निर्णय लिया जाएगा। मंत्री ने कहा था, सरकार ऐसे मामले में सीधा फैसला नहीं ले सकती है। जब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और विशेषज्ञ टीम कहेगी कि बूस्टर खुराक दी जानी चाहिए, तब हम इस पर विचार करेंगे।




उन्होंने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा विशेषज्ञ की राय पर निर्भर रहे हैं, चाहे वह टीके का अनुसंधान हो, निर्माण हो या मंजूरी हो। अधिकारियों के अनुसार, भारत में लगभग 82 प्रतिशत पात्र आबादी को टीके की पहली खुराक लग गई है, जबकि लगभग 43 प्रतिशत जनसंख्या का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है।

सुबह सात बजे तक के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोविड रोधी टीके की कुल 116.87 करोड़ से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं। इस साल नवंबर और दिसंबर माह के दौरान शादी-विवाह या सगाई समारोहों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कलसर्किल्स के सोमवार को जारी एक सर्वे में कहा गया है कि अब ऐसे लोगों की संख्या कम रह गई है, जो ऐसे समारोहों में शामिल होने से कोविड-19 संक्रमण का खतरा बढऩे की बात मानते हैं।

लगातार लग रही भीड़ का खतरा यूरोप में दिख गया है

इस सर्वे में 17,000 से अधिक लोगों की प्रतिक्रिया ली गई। सर्वे के निष्कर्ष के अनुसार, नवंबर-दिसंबर की अवधि में 10 में से प्रत्येक छह भारतीय परिवारों के सगाई और शादियों में शामिल होने की संभावना है।

इस अवधि में शादी या सगाई समारोहों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या में तीन गुना की वृद्धि हुई है। सर्वे में कहा गया है कि इसकी मुख्य वजह देश में कोविड के घटते मामलों के साथ टीकाकरण की तीव्र गति भी है, जिसके चलते लोगों का भरोसा लौटा है।

वर्ष 2020 में जब लोगों से इसी तरह का सवाल किया गया था, तो 35 प्रतिशत ने कहा था कि उन्हें शादी और सगाई समारोहों में भाग लेने का न्योता मिला है, लेकिन वे उसमें नहीं जा रहे हैं। इस बार ऐसा कहने वालों की संख्या घटकर मात्र 12 प्रतिशत रह गई।

इस तरह के आयोजनों में शामिल होने पर कोविड-19 के जोखिम संबंधी एक सवाल पर समारोहों में शामिल होने की योजना बना रहे 76 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कोविड के प्रसार का जोखिम औसत, कम या न के बराबर है।

तीन प्रतिशत ने कहा कि इस तरह का कोई जोखिम नहीं है। वही दो प्रतिशत ने कोई राय नहीं दी। इसलिए दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक हमें धैर्यपूर्वक इंतजार करना होगा।



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