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बोकारो की अलबतिया भी पीठ पर बच्चा बांधकर लड़ती थी अंग्रेजों से

गोमियाः बोकारो की अलबतिया देवी यहां की एकमात्र महिला स्वतंत्रता सेनानी हैं। जिनके

बारे में वर्तमान लोग बहुत कम ही जानते होंगे। लेकिन अब स्थानीय लोगों ने उनके

उपेक्षित स्मारक की दशा सुधारने का बीड़ा उठाया है।

वीडियो में देखिये क्या हुआ है फैसला

बता दें कि इस महिला स्वतंत्रता सेनानी यानी बोकारो की अलबतिया अपनी दो साल की

बच्ची को पीठ में बांधकर अंग्रेजों से लोहा लेने निकल जाया करती थी। जिन लोगों ने देश

की आजादी के लिए अपनी पूरी जिंदगी न्योछावर कर दी, अब कोई उन्हें याद करने वाला

भी नहीं। हाल ये हैं कि इनकी स्मारक स्थल घनी झाड़ियों के बीच छिपकर रह गया है।

स्मारक स्थल साल के दो राष्ट्रीय त्यौहार पर भी साफ नहीं होती है। ये हालात पेटरवार

प्रखण्ड मुख्यालय पर बने शहीद स्मारक के हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में ये

स्मारक बना है। यहां कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम यहां लिखे हैं। मगर

बदइंतजामी के चलते ये नाम झाड़ियों में छुप गया है। जिसकी पहचान धरोहर के रूप में

होना चाहिए था उसकी पहचान अब मुश्किल है। साफ सफाई न होने से यह स्थिति

बनी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को वह सम्मान अब तक नहीं मिला जिसके वे हकदार

हैं। कई लोग गुमनामी के साथ ही खत्म हो गए। स्मारक बनाकर केवल औपचारिकता पूरी

कर दी गई।

बोकारो की अलबतिया का स्मारक भी झाड़ियों में छिप गया था

बोकारो की इकलौती महिला स्वतंत्रता सेनानी 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बच्चा

होने के पहले ही कुद पड़ी थी। पेटरवार प्रखण्ड के कोह पंचायत अंतगर्त काटमकुल्हि गांव

के रहने वाले शिवदयाल महतो स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे इनसे प्रेरित होकर पति

जटाशंकर महतो के साथ अलबतिया देवी भी आंदोलन में कूद पड़ी थी। इन्होंने अंग्रेजों की

नींद हराम कर रखी थी। साधारण परिवार के होने के वावजूद आज़ादी के प्रति इनकी

दीवानगी देखने लायक थी। गठरी में चूड़ा बांधकर और हाथों में तिरंगा लेकर तीनों निकल

पड़ते थे। उस समय जटाशंकर और अलबतिया की बड़ी बेटी महज दो वर्ष की थी।

अलबतिया उसे पीठ पर बांधकर अंग्रेजों से लड़ने भिड़ने निकल पड़ती थी। भूख और

मौसम की मार से रोती बच्ची भी अलबतिया को विचलित नहीं कर पाई।

पेटरवार प्रखण्ड विकास पदाधिकारी शैलेन्द्र चौरसिया से जब इस संदर्भ में बात की गई तो

उन्होंने बताया कि जब यहां पदस्थापित हुआ था तो उस वक्त ही उस शिलापट्ट को देखा

था। पंचायत समिति की बैठक में इस योजना को लिया गया है पंचायत प्रतिनिधियों ने

एक मत कहा है कि इस क्षेत्र को शहीद स्मारक स्थल और थीम पार्क बनाने का योजना है।

कुछ विभागीय पेंच के कारण नही हो सका है। जल्द ही उस स्थल को विकसित किया

जाएगा। तत्काल उस क्षेत्र में उग आए झाड़ियों की साफ सफाई की जाएगी।ऐसे स्थलों

सहेज कर रखा जायेगा।

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