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बॉडीगार्ड के खेल में हलकान है रांची का श्री महावीर मंडल

  • दोनों गुट के अलग अलग चुनाव

  • बॉडीगार्ड लेने के लिए मरे जाते हैं लोग

  • अखाड़ाधारी कहते हैं सम्मान घटता है

संवाददाता

रांचीः बॉडीगार्ड के खेल में श्री महावीर मंडल की नई समिति को लेकर इस बार फिर से

तनातनी का माहौल है। हर बार रामनवमी के पहले श्री महावीर मंडल के चुनाव की तिथि

करीब आते ही यह स्थिति बन आती है। इस मुद्दे पर बार बार के हंगामे पर रांची के पुराने

अखाड़ाधारियों की राय से अजीब बात सामने आयी है। इनलोगों ने साफ शब्दों में कहा कि

दरअसल महावीर मंडल पर पदाधिकारी बनने के पीछे समाज सेवा अथवा रामनवमी का

जुलूस भव्य तरीके से निकालने की कोई सोच कुछ लोगों में बिल्कुल नहीं है। इन्हीं लोगों

ने बताया कि दरअसल यह सारा खेल सरकारी अंगरक्षक हासिल करने का है। इस बारे में

जानकारों ने कहा कि श्री महावीर मंडल के अध्यक्ष को एक साल के लिए जिला प्रशासन

की तरफ से अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाता है। इस अंगरक्षक के साल भर सरकारी खर्च

पर होने से पदाधिकारी को अन्य इलाकों में भी रौब गांठने का पूरा अवसर मिल जाता है।

इसी वजह से कुछ लोग श्री महावीर मंडल के पदों से चिपके रहना चाहते हैं।

बॉडीगार्ड उपलब्ध कराता है जिला प्रशासन

वैसे पिछले दो वर्षों से चुनाव नहीं होने को अधिकांश अखाड़ाधारी गलत मानते हैं। लेकिन

इनलोगों का कहना है कि हमारी निष्ठा तो श्रद्धापूर्वक रामनवमी का जुलूस निकालने की

है। इस किस्म की राजनीति के पचड़े में पड़ने से हमारा अपना आयोजन भी बाधित होता

है। इसलिए जिनलोगों के वरीय प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी पहचान बनाये

रखने की चुनौती है, वे ही इस किस्म की गतिविधियों में शामिल होते हैं। वरना आम तौर

पर चुनाव के माध्यम से नये नये लोगों को आगे आने का अवसर मिलना ही चाहिए।

वैसे अखाड़ा के लोग यह मानते हैं कि बार बार की ऐसी हरकत से अंततः श्री महावीर मंडल

की ही छवि धूमिल होती है। इस किस्म की हरकतों से प्रशासनिक अधिकारी भी मंडल के

पदाधिकारियों की बातों को हल्के में लेने लगते हैं।


 

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