रिम्स में खून जांच की टेंडर का मामला फिर गरमाया

रिम्स में खून जांच मामला गरमाया
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प्रशांत कुमार झा-

रांची : रिम्स में नेट मशीन का पीपीपी मोड में संचालन को लेकर लगभग सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

जल्द ही रिम्स में उक्त मशीन का इस्टॉलेशन का भी काम प्रारंभ होने वाला है।

लेकिन इसको लेकर अब विवाद हो गया है।

इसकी शिकायत स्वास्थ सचिव तक पहुंच गई है

हालांकि इस बारे में अभी स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुछ भी अधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है।

नेट मशीन का पीपीपी मोड में संचालन को लेकर एनआरएचएम के द्वारा टेंडर निकाला गया था।

किसी खास कम्पनी को लाभ देने के लिए उक्त टेंडर प्रक्रिया के आखिर में टेंडर में कुछ क्लॉज को जोड़ गया है।

मामला किस प्रकार विवादित है इसे इस बात से ही समझा जा सकता है

कि कम्पनी के चयन प्रक्रिया से संबंधित फाईल में रिम्स के ब्लड बैंक के वर्तमान एचडी के बजाय

ब्लड बैंक के किसी छोटे अधिकारी के द्वारा हस्ताक्षर कराकर ट्रेंड प्रक्रिया फाइनल की गयी है।

मामले की छानबीन प्रारंभ होने के बाद रोज नये खुलासे हो रहे हैं।

जिसमें यह स्पष्ट होता जा रहा है कि दरअसल अधिकारियों के एक गुट ने पूरी प्रक्रिया

तथा यहां एनएचआरएम से जारी होने वाले तमाम टेंडरों को निजी कमाई का जरिया बना लिया है।

कैसे काम करेगी नेट मशीन-

हेपेटाइटिस और एचआईबी से ग्रसित मरीज की विंडो प्रियेड अर्थात इस बीमारी से ग्रसित होने के

तीन महीने के दौरान इस नेट मशीन से ही रक्त जांच करने पर उसकी सही रिपोर्ट आयेगी।

सामान्य मशीन से इस समय अवधि के दौरान रक्त नमूनों की जांच से इसी रिपोर्ट नहीं आयेगा।

इस मशीन के रिम्स में लग जाने से हेपेटाइटिस और एचआईबी की

सही जांच रिपोर्ट मिलने से मरीज का ईलाज सही समय पर प्रारंभ हो जायेगा।

मात्र रिम्स में होगी यह व्यवस्था-

हेपेटाइटिस और एचआईबी की विंडो प्रियेड में जांचने के लिए

पूरे राज्य में केवल रिम्स में ही रिम्स में नेट मशीन को पीपीपी मोड में संचालन की व्यवस्था की जा रही है।

मामले पर एनआरएचएम का कहना है कि हमारी कोशिश है

कि जल्द ही इस मशीन का संचालन राज्य के तीनों मेडिकल कॉलेज में हो।

आथोर्पैडिक विशेषज्ञ तय कर रहे हैं मानदंड-

इस टेंडर में जो कमेटी काम कर रही है, उसका नेतृत्व करने वाले मुख्य व्यक्ति अपने ईलाज के लिए फिलहाल रांची से बाहर है।

उनके स्थान पर एक आथोर्पेडिक विशेषज्ञ ही एक खास कंपनी की तकनीक लेने के लिए अधिक जोर लगा रहे हैं।

खबर है कि उन्हें भी इसके लिए खास निर्देश ऊपर से मिले हुए हैं।

दूसरी तरफ इस टेंडर कमेटी में शामिल अन्य लोगों ने पहले ही अनौपचारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया था

कि उनलोगों से दबाव डालकर सहमति ली गयी है लेकिन वे किसी विवाद का हिस्सा बनना ही नहीं चाहते।

दूसरी तरफ ब्लड बैंक के प्रमुख को इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हीं नहीं किया गया है।

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