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ईश निंदा के आरोप में पाकिस्तान के प्रोफसर को सजा ए मौत

  • अमेरिका से पढ़ाई कर स्वदेश लौटा था युवक

  • पिछले छह साल से जेल में किया गया बंद

  • पिता ने कहा साजिश के तहत फंसाया गया

इस्लामाबादः ईश निंदा का दूसरा चर्चित आरोप इस बार पाकिस्तान

के एक प्रोफसर पर लगा है। उन्हें इस आरोप में फांसी की सजा सुनायी

गयी है। उनपर आरोप है कि वह फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर ईश

निंदा कर रहे थे। आरोप के मुताबिक इसके लिए उन्होने एक कथित

तौर पर लिबरल्स ऑफ पाकिस्तान नाम का समूह भी बना रखा था।

जिस व्यक्ति को यह सजा ए मौत सुनायी गयी है, उसका नाम जुनैद

हाफिज है। वह 33 साल के हैं तथा पाकिस्तान के एक विश्वविद्यालय

में लेक्चरर हैं। उन्हें गत शनिवार को अदालत ने यह सजा सुनायी है।

दूसरी तरफ जुनैद का परिवार इसे साजिश का हिस्सा मानता है

क्योंकि जिस पद के लिए जुनैद को चुना गया था, उस नौकरी के लिए

जुनैद आवेदन हीं नहीं करैं, इसके लिए एक कट्टरपंथी समूह ने पहले ही

उन्हें चेतावनी दी थी।

अमनेस्टी इंटरनेशनल ने घटना की निंदा की

इस घटना के सामने आने के बाद अमनेस्टी इंटरनेशलन की तरफ से

राबिया महमूद ने अपने ट्विटर के माध्यम से एक शिक्षक को ऐसी

सजा दिये जाने की आलोचना की है। जुनैद पर ईश निंदा का आरोप

लगने के बाद वह पिछले छह वर्षों से कैद में हैं। इसमें से अधिकांश

समय उन्हें अकेले की सेल में बंद रखा गया है। सजा ए मौत की सजा

सुनाये जाने क बाद जुनैद के वकील असद जमाल ने कहा कि अदालत

के इस फैसले के खिलाफ वे लोग ऊपर की अदालत में अपील दायर

करेंगे। जमाल ने कहा कि ईश निंदा एक ऐसा विषय है, जिसमें

पाकिस्तान की निचली अदालतों में न्याय पाना कठिन है। उनके

मुताबिक यहां की परिपाटी ही कुछ ऐसी बन चुकी है कि ऐसे आरोप में

अदालतें भी तर्क को सुनना ही नहीं चाहती। इसी वजह से अधिकांश

ऐसे मामले ऊपर की अदालतों तक जाते हैं। दूसरी तरफ सरकारी

वकील ऐराज अली ने कहा कि सत्य और न्याय की जीत हुई है।

मुलतान के बहरुद्दीन जाकारिया विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के शिक्षक

जुनैद ने यहां वर्ष 2011 में काम करना प्रारंभ किया था। वहां योगदान

देने के बाद से ही एक छात्र समूह उनके खिलाफ हो गया। ठात्रों का

कहना था कि जुनैद की शिक्षा इस्लाम के खिलाफ है। यही विवाद बाद

में बढ़ता ही चला गया। जिसके परिणामस्वरुप मार्च 2013 में उसे

गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी में आरोप लगा कि उन्होंने

फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर प्रोफेट मोहम्मद की निंदा की है।

ईश निंदा का आरोप कट्टरपंथियों की साजिशः पिता

जुनैद की पिता का आरोप है कि दरअसल इस पद के लिए कट्टरपंथी

समूह किसी अपने व्यक्ति को बैठाना चाहते थे। उसके लिए जुनैद को

पहले ही आवेदन नहीं भरने की चेतावनी दी गयी थी। लेकिन अपनी

योग्यता के बल पर जुनैद इस नौकरी में चुना गया। जुनैद के पिता

हजीर उल नसीर का कहना है कि स्थानीय कट्टरपंथी समूह

जमायत इ तलाबा अपने किसी आदमी को इस पद पर लाना चाहता

था। जुनैद के आवेदन करने की वजह से यह समूह उससे नाराज हो

गया था। बाकी का सारा कुछ इसी समूह का किया धरा है। जुनैद को

बदनाम करने के लिए वहां पर्चे भी बांटे गये। कई बार उसे अमेरिकी

एजेंट तक बताया गया। इसके बाद ईश निंदा का यह ऐसा आरोप मढ़

दिया गया, जो पाकिस्तान के लिए आज भी अत्यंत संवेदनशील मुद्दा

समझा जाता है। दुर्भाग्य यह है कि अमेरिका से अपनी पढ़ाई पूरी कर

अपने देश लौट आने वाले युवक को ऐसा घिनौना आरोप झेलना पड़

रहा है जबकि वह देश सेवा के लिए ही स्वदेश लौटा था।

ईश निंदा के मामले में अनेक मामले चर्चित हुए हैं

पाकिस्तान में ईश निंदा हमेशा से ही विवादों से घिरा रहा है। अभी हाल

ही में आसिया बीबी नामक एक महिला पर भी ईश निंदा के आरोप लगे

थे। यह महिला ईसाई थी और उसे भी ऊपर की अदालत ने बाइज्जत

बरी कर दिया था। लेकिन अदालत से बरी किये जाने के फैसले के बाद

पूरे पाकिस्तान में इसका जोरदार और हिंसक विरोध हुआ था। यहां के

अल्पसंख्यक संप्रदाय के लोगों का आरोप है कि हमेशा ही उन्हें दबाने

के लिए इस ईश निंदा नाम के हथियार का दुरुपयोग किया जाता है।

इसी आरोप में अनेक इसाई और हिंदुओं की यहां हत्या भी कर दी गयी

है। यहां तक कि मानसिक तौर पर बीमार एक ईसाई लड़की को भी इस

आरोप में जेल में डाला गया था। उस पर आरोप था कि वह कुरान के

पन्ने जला रही थी। बाद में अदालत ने उसकी बीमारी की पुष्टि होने पर

उसे रिहा कर दिया था। लेकिन उसके रिहा होने के बाद हिंसा भड़की

थी। जान बचाने के लिए यह परिवार कनाडा भाग गया था। 2014

में एक ईसाई दंपति को कुरान के अपमान के आरोप में पीट पीटकर

मार डाला गया था। बाद में दोनों की लाशों को एक ईट भट्टे में जला

दिया गया था।

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