fbpx Press "Enter" to skip to content

ब्लैक रॉक डेजर्ट में कभी भी फट सकती है प्राचीन काल से जिंदा ज्वालामुखी

  • ऊपर से बिल्कुल सामान्य नजर आता है इलाका

  • करीब एक हजार साल से नीचे उबल रहा लावा

  • दो बार धरती डोलने के बाद इसकी जांच की गयी

  • भूकंप आने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे समझने का काम किया

राष्ट्रीय खबर

रांचीः ब्लैक रॉक डेजर्ट का इलाका मध्य उटाह के क्षेत्र में है। यहां के क्षेत्र से गुजरते हुए

लोगों को शांत पहाड़ और मैदानी इलाके नजर आते हैं। यानी कुल मिलाकर यह रेगिस्तान

जैसा कुछ भी नहीं दिखता है। गुजरने के दौरान इस पूरे इलाके को देखकर ऐसा कुछ नहीं

मालूम पड़ता है इस पूरे इलाके के नीचे धरती के अंदर दरअसल चल क्या रहा है। ऊपर से

बिल्कुल सामान्य सा नजर आऩे वाले इस जमीन के नीचे भी भीषण किस्म की उथल

पुथल मची हुई है। ऊपर से यह बिल्कुल शांत और निर्जन सा इलाका भर नजर आता है।

अलबत्ता यहां से गुजरते हुए आप इसे अन्य किसी सामान्य इलाके की तरह ही देख पायेंगे

और बार बार आपकी जेहन में यह सवाल उठेगा कि आखिर ब्लैक रॉक डेजर्ट इसका नाम

क्यों पड़ा है।

वीडियो में समझिये इस पूरी रिपोर्ट को

आगे बात बढ़े इससे पहले याद दिला दूं कि काफी अरसा पहले एक फिल्म बनी थी 2012

यह अंग्रेजी फिल्म मूल रुप से पर्यावरण के साथ इंसानों द्वारा खिलवाड़ किये जाने के

भीषण परिणामों को उजागर करने वाली एक अंग्रेजी साइंस फिक्शन फिल्म थी। इसमें भी

शांत पड़े इलाको के नीचे होने वाली गतिविधियों को समझने वाले वैज्ञानिक यह भांप रहे

थे कि बहुत बड़ा कोई हादसा होने वाला है। फिल्म के इस दृश्य में अचानक से धरती के

अंदर से विभिन्न स्थानों से ज्वालामुखी का फटकर बाहर आने का सिलसिला प्रारंभ हो

जाता है। उसके बाद इसके कई घटनाक्रम हैं, जो फिल्म में बड़ी कुशलता के साथ दर्शाये

गये हैं।

ब्लैक रॉक डेजर्ट में बार बार धरती डोली तो इस पर ध्यान गया

वर्ष 2018 और 2019 में जब उटाह के इस इलाके में लगातार भूकंप आने लगे तो वैज्ञानिकों

का ध्यान इसकी तरफ गया था। वैसे भी भूकंप और सूनामी की अधिकांश घटनाएं धरती

की गहराई में टेक्नोनिक प्लेटों के टकराव से ही उत्पन्न होती हैं। समुद्र की गहराई में जब

ऐसा कुछ होता है तो सूनामी की लहरें बनती है। भूकंप वाले इलाके में यह समुद्री लहर भले

ही कुछ फीटों का हो लेकिन उसकी गति बहुत तेज होती है। लेकिन जैसे जैसे यह फैलती

जाती है, उसका असर और मारक होता चला जाता है। समुद्री तटों पर सूनामी आने के

पहले का संकेत होता है कि तट का पानी अचानक से पीछे चला जाता है। दरअसल भीषण

लहर उठने की वजह से तट के जल को भी वह अपनी तरफ खींच लेता है। पानी के काफी

दूर तक लौट जाने के बाद ऊंची लहरों वाली सूनामी आती है जो समुद्री तल के करीब वाले

इलाकों में तबाही मचा देती है। भूकंप नापने के यंत्रों में इसे दर्ज किये जाने के दौरान लोग

भी अपने घरों में अथवा जहां कहीं भी हों, धरती को डोलते हुए महसूस करते हैं। कुछ ऐसा

ही जापान के बड़े भूकंप और उसके बाद की सूनामी में हुआ था। इसी भीषण सूनामी की

वजह से जापान का परमाणु बिजली घर भी तबाह हुआ था। उटाह के ब्लैक रॉक डेजर्ट के

इलाके में भी भूकंप के झटके महसूस किये जाने के बाद यह समझा जा सका है कि इसके

नीचे भी लावा का प्रवाह चल रहा है। यूं तो वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इस ज्वालामुखी के

फिलहाल फटकर बाहर आने की कोई आशंका नहीं है। लेकिन लावा के विस्फोट से जिस

किस्म की तबाही आती है, उसे हम कई बार देख चुके हैं।

इसके नीचे एक हजार साल से अधिक पुरानी जिंदा ज्वालामुखी है

यानी ब्लैक रॉक डेजर्ट के नीचे भी जिंदा ज्वालामुखी है और वह कभी भी फट सकती है।

वैसे इस भूकंप अथवा ज्वालामुखी के फटने का पूर्वानुमान व्यक्त करने की तकनीक अब

तक विकसित नहीं हुई है। लिहाजा जो शांत पहाड़ दिख रहा है, वह अचानक किसी

ज्वालामुखी की तरह नहीं फटेगा, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। वैसे कई बार ऐसी

परिस्थिति इंसानी गलतियों की वजह से भी पैदा होती हैं।

ब्लैक रॉक डेजर्ट के अलावा भी धरती के अन्य इलाकों में हमने ज्वालामुखी विस्फोट को

देखा है। लेकिन इस खास इलाके के बार में वैज्ञानिक निष्कर्ष है कि यहां काफी समय से

ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। इसलिए फिलहाल कोई खतरा नहीं होने के बाद भी यह तय है

कि किसी न किसी दिन यह अचानक से विस्फोट कर बाहर आयेगा। वहां आने वाले भूकंप

दरअसल इसी वजह से हो रहे हैं, जिनमें भूकंप आने के बाद आफ्टर एफेक्ट भी लंबे समय

तक बने रहते हैं।

उटाह विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इलाके की गहन जांच की है

उटाह विश्वविद्यालय की भूकंप वैज्ञानिक मारिया मेसिमारी कहती हैं कि जमीन के नीचे

ज्वालामुखी की तरलता बनी हुई है। इसके प्रवाह की गति में बदलाव होने की वजह से जो

ऊर्जा पैदा होती है, उसी वजह से ऊपर में लोग भूकंप के झटकों को इस ब्लैक रॉक डेजर्ट के

इलाके में महसूस करते हैं। यह जान लेना जरूरी है कि एक बार जब धरती के ऊपर किसी

पहाड़ से ज्वालामुखी विस्फोट के बाद लावा बाहर निकलने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है तो

यह क्रम काफी लंबे समय तक चलता रहता है। धरती की गहराई से निकलने वाला यह

लावा करीब दो हजार डिग्री तक गर्म होता है। इस वजह से वह जहां से भी गुजरता है, सब

कुछ नष्ट कर जलाता हुआ आगे बढ़ता जाता है। इसका दूसरा खतरा यह भी है कि यह

कभी भी अपनी दिशा बदल लेता है और हवा के संपर्क में आने वाले लावा के ठंडा होने के

बाद भी उसके नीचे से गर्म तरल लावा का बहना जारी रहता है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग की

देखरेख में किये गये एक प्रयोग से यह साबित हो चुका है कि ब्लैक रॉक डेजर्ट के इलाके में

जो हलचल हो रही है, वह किसी टेक्टोनिक प्लेटों की रगड़ की वजह से नहीं है। यहां के

भूकंप जमीन के ढाई किलोमीटर नीचे से आ रहे हैं, जहां तेजी से लावा का प्रवाह हो रहा है।

लिहाजा यह कुछ दूसरे ही किस्म का खतरा है. इन दो भूकंपों की वजह से ब्लैक रॉक डेजर्ट

के कुछ इलाकों की भौगोलिक स्थिति भी बदली है। शोध से पता चला है कि यहां करीब

एक हजार वर्ष पूर्व भी ज्वालामुखी विस्फोट हो चुका है। शायद उस दौर का क्रम जमीन की

गहराई में अब भी जारी है। जो भविष्य में कभी भी फिर से उभरकर बाहर आ सकता है।


विज्ञान से संबंधित कुछ रोचक खबरें यहां पढ़ें

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »
More from यू एस एMore posts in यू एस ए »

Be First to Comment

... ... ...
%d bloggers like this: