Press "Enter" to skip to content

ब्लैक होल दरअसल गड्ढा नहीं वैज्ञानिकों का नया निष्कर्ष







  • यह आकार में चपटा भी हो सकता है

  • कंप्यूटर की सीडी के आकार के जैसा

  • बीच का हिस्सा ही गुरुत्वाकर्षण का है


नईदिल्लीः ब्लैक होल को लेकर काफी समय से संशय जैसी स्थिति बनी हुई थी। वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाने के बाद अब पूर्व के नतीजे को बदलने की बात कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की नई राय है कि ब्लैक होल दरअसल एक होल यानी गड्ढा ही नहीं है।

वीडियो में देखें कैसे काम करता होगा  यह ब्लैक होल

कल यानी गुरुवार को इस बारे में मिले तमाम आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिक इसी निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।

पिछले चार दशक से यह धारणा बनी हुई थी कि नजर नहीं आने वाला यह ब्लैक होल दरअसल एक विशाल और अत्यंत तीब्र गुरुत्वाकर्षण का एक गड्ढा है।

इसके अंदर से प्रकाश की किरणें तक नहीं लौट पाती हैं।

अब नये आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिक इसे गड्ढा मानने से इंकार कर रहे हैं।

इस किस्म के अनेक ब्लैक होल अंतरिक्ष में फैले हुए हैं।

ऐसा माना जाता है कि हमारी पृथ्वी के सौर मंडल के ठीक बीच में भी एक ऐसा ही विशाल ब्लैक होल विद्यमान है।

हाल के आंकड़ों और प्राप्त चित्रों के विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि दरअसल किसी अति विशाल तारा के टूटने से उत्पन्न स्थिति ही ब्लैक होल को जन्म दे रही है।

यह कोई गड्ढा नहीं है बल्कि अत्यंत अधिक गुरुत्वाकर्षण का एक क्षेत्र भी है, जिससे रोशनी तक नहीं लौटने की वजह से उसके गड्ढानूमा होने का अनुमान लगाया गया था।

वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह दरअसल किसी चपटी आकार का डिस्कनूमा हो सकता है।

जिसके अंदर का आकर्षण इतना अधिक है कि रोशनी तक इससे बाहर नहीं निकल पाती है।

ब्लैक होल का अध्ययन वहां तरंगों के माध्यम से किया गया

हाल के दिनों में तरंगों की मदद से इसकी एक तस्वीर भी तैयार की गयी थी।

उसके बाद से ही ब्लैक होल के विश्लेषण का यह काम तेज हो गया था।

कुछ लोगों का मत है कि यह दरअसल कंप्यूटर के सीडी ड्राइव के आकार का भी हो सकता है।

जिसके बीच का छेद ही गुरुत्वाकर्षण का असली केंद्र होता है।

बाहर की परिधि में टूटते हुए तारे और गैस के बादल मंडराते रहते हैं।

इसी स्थिति की वजह से इसके बाहर का हिस्सा अस्पष्ट लेकिन गोलाकार सा नजर आता रहता है।

हाल के दिनों में पहली बार इवेंट होरिजन टेलीस्कोप की मदद से इसकी पहली अस्पष्ट तस्वीर लेने के बाद अनुसंधान का यह काम तेज हुआ है।

जिसके आधार पर नये नये तथ्य निकलकर सामने आ रहे हैं।

तीन विश्वविद्यालयों ने किया ब्लैक होल के आंकड़ों पर अनुसंधान

नार्थ वेस्टर्न, ऑक्सपोर्ड और एम्सटरर्डम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने

इसके तमाम आंकड़ों का विश्लेषण कर कंप्यूटर के आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस की मदद से इसका विश्लेषण किया है।

इन विश्लेषणों का ही नतीजा है कि अब लोग इस ब्लैक होल को घना काला गड्ढा के बदले चपटा गोलाकार इलाका मान रहे हैं।

लेकिन चपटा आकार का होने के बाद भी इसकी मोटाई दरअसल क्या है,

अब तक इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सका है।

इस शोध से जुड़े नार्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के अलेकजेंडर टचेकोस्कवस्की ने कहा कि

यह लगभग वैसी ही स्थिति है कि किसी बोर्ड के ऊपर अचानक से एक तीर फेंका जाए।

ऐसा करते वक्त फेंकने वाले को भी नहीं पता होगा कि उसकी तीर बोर्ड के ठीक बीच में लगेगी अथवा नहीं।

अगर ऐसी कोई वस्तु इस ब्लैक होल के मध्य में चली जाए

तो निश्चित तौर पर वह गहरे काले रंग के गुरुत्वाकर्षण में समा जाएगी

लेकिन इससे बाहर की चीजें उसके चारों तरफ चक्कर काटती रहेगी।

लेकिन इतना तय है कि बाहर चक्कर काटते हुए तारों के विखंडन के बाद भी

उन्हें अंततः प्रचंड गुरुत्वाकर्षण के अंदर ही समा जाना है।

लेकिन सौर जगत में यह प्रक्रिया सतत जारी है।


विज्ञान की कुछ और रोचक खबरें यहां पढ़ें



Spread the love
  • 26
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •   
  •  
  •  
    26
    Shares

One Comment

Leave a Reply

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com