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किसानों की नाराजगी की आंधी में पूरी तरह उड़ गयी भाजपा




  • पंजाब में कांग्रेस की एकतरफा जीत

  • कैप्टन ने कहा यह तो फिल्म का ट्रेलर है

  • भाजपा खेमा में भीषण मायूसी पर सभी चुप

  • शिअद को भी भाजपा से रिश्ता का नुकसान

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़ः किसानों की नाराजगी से उपजी आंधी ने पंजाब में भाजपा का सूपड़ा साफ कर

दिया। स्थानीय निकायों के चुनाव में उसकी इतनी बुरी दुर्गति हुई कि भाजपा के प्रदेश

स्तरीय नेता इस बारे में कांग्रेस सरकार को कोस रहे हैं लेकिन अंदरखाने में इस बात की

चर्चा होने लगी है कि किसानों को नाराज करने से भाजपा को क्या घाटा हुआ है। दूसरी

तरफ स्थानीय निकाय के चुनाव परिणाम यह भी दर्शा गये कि अभी भाजपा से रिश्ता तोड़

लेने वाले शिरोमणि अकाली दल को भी पंजाब के किसानों ने माफ नहीं किया और वे भी

धरती पर लेट गये। जानकार मानते हैं कि शहरी क्षेत्र के चुनाव में इस किस्म का परिणाम

यह स्पष्ट कर देता है कि कृषि कानूनों पर भाजपा की जिद का आम लोगों पर क्या प्रभाव

पड़ा है। इन चुनावों में शहरी मतदाताओं ने ही हिस्सा लिया था, जो किसानों के आंदोलन

से सीधे तौर पर जुड़े नहीं होने के बाद भी परिस्थितियों को अपनी तरफ से तौल रहे थे।

कांग्रेस ने सात नगर निगमों में सीधी जीत दर्ज की है। आज जो चुनाव परिणाम घोषित

हुए हैं उनमें होशियारपुर, कपूरथला, अबोहर, पठानकोट, बटाला और भटिंडा में ऐसा

परिणाम आये हैं। इनमें से भटिंडा का परिणाम वाकई कांग्रेस के लिए किसी ईनाम से कम

नहीं क्योंकि यहां 53 वर्षों के बाद कांग्रेस जीत पायी है। मोगा में किसी को स्पष्ट बहुमत

नहीं मिलने के बाद भी कांग्रेस ही सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। मोहाली के चुनाव

परिणामों की घोषणा कल होने वाली है।

किसानों की नाराजगी पर चुप हैं भाजपा नेता

इन चुनाव परिणामों के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा सरकार

के कृषि कानूनों पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को तो अभी सिर्फ फिल्म का ट्रैलर

दिखाई पड़ा है। उनके मुताबिक पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी किसान

आंदोलन से जो मनोदशा बनी है, उससे भाजपा कमसे कम चालीस लोकसभा सीटें अभी ही

गंवा चुकी है। उनके मुताबिक भाजपा के नेता भी अच्छी तरह इस स्थिति को समझ रहे हैं

लेकिन वे नरेंद्र मोदी और अमित शाह को इस बारे में कुछ बोल नहीं रहे हैं। कैप्टन सिंह ने

कहा कि जिस प्रचंड बहुमत के सहारे भाजपा मनमाने फैसले लेने पर आमादा है, जनता ने

यह बता दिया है कि उसे ऐसी सरकार और इस सरकार का अड़ियनपन स्वीकार्य नहीं हैं।

अगले लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को इसका पता चल जाएगा। पिछले 53 वर्षों से

भटिंडा के इलाके पर शिरोमणि अकाली दल का वर्चस्व रहा है। केंद्रीय मंत्री सभा से हाल ही

में त्यागपत्र देने वाली हरसिमरन कौर बादल यहां की सांसद है। इसके बाद भी यह

स्थानीय निकाय अब कांग्रेस की झोली में जा चुका है। इससे स्पष्ट है कि शिअद ने

किसान आंदोलन के मुद्दे पर भाजपा से अपने रिश्ते तोड़ने में देर कर दी थी, जिससे

किसानों और उनके समर्थकों के बीच गलत संदेश गया था। कल शेष सीटों पर मतों की

गिनती का काम पूरा होने के बाद आज शाम तक कांग्रेस ने 1815 सीटों में से 1199 जीत

लिये हैं। राज्य की 350 नगर निगम सीटों में से 281 पर कांग्रेस का कब्जा हो चुका है।

दूसरे नंबर पर शिअद है, जिसके क्रमशः 289 और 33 प्रत्याशी इन चुनावों में जीत पाये हैं।

भाजपा के पास 38 और बीस तथा आम आदमी पार्टी के खाते में 57 और नौ सीटें गयी हैं।



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