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आसन्न विधानसभा चुनाव में 370, एनआरसी और भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा

  • राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर ही मैदान में उतरेगी भाजपा
  • 370 पर कई कांग्रेसियों ने भी किया है समर्थन
  • जेल में बंद चिदांवरम को भ्रष्टाचार से जोड़ेंगे
  • दोनों सीएम की निजी छवि अब तक बेदाग है
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः आसन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने राष्ट्रीय मुद्दों को ही आजमाना चाहती है।

महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनावों में इन्हीं मुद्दों पर आधारित चुनाव प्रचार चलाया जा सकता है।

इनमें खास तौर पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करना, असम में एनआरसी को

पूरे देश में लागू करने तथा भ्रष्टाचार के भरोसे पार्टी जनता से वोट मांगेगी।

पार्टी के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि आसन्न चुनाव में स्थानीय मुद्दों के मुकाबले यह राष्ट्रीय मुद्दे जनता पर ज्यादा प्रभाव छोड़ेंगे।

इन दोनों राज्यों में चुनावी तैयारियों के बीच यह भी तय हो गया है कि इन दोनों राज्यों में चुनाव

की मुख्य जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंधों पर ही होगी।

वह खुद महाराष्ट्र में दस और हरियाणा में पांच बड़ी चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे।

वैसे इस बार के आसन्न चुनाव में अमित शाह के जिम्मे अधिक काम सौंपा जा रहा है।

वह पिछले बार के मुकाबले लगभग दोगुनी जनसभाओं को संबोधित करने वाले हैं।

वैसे पार्टी की तैयारी के मुताबिक अगर कोई और समस्या आयी तो इन दोनों के कार्यक्रमों

में तब्दीली भी की जा सकती है।

आसन्न विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों से भाजपा को लाभ

भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में

धारा 370 समाप्त करने के फैसले का देश भर में बेहतर प्रभाव पड़ा है।

इसलिए उस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाने से पार्टी को फायदा हो सकता है।

इसी तरह एनआरसी के मुद्दे पर विदेशी घुसपैठियों का मुद्दा खास तौर पर महाराष्ट्र

के कुछ इलाकों और मुंबई में खास प्रभाव छोड़ सकता है।

साथ ही विरोधी दलों के कई नेताओं के खिलाफ चल रहे मामले और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदांवरम

के जेल में बंद होने को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ चलायी जा रही सरकार की मुहिम से

जोड़कर प्रचार किया जा सकता है।

इससे जनता तक बेहतर संदेश आसानी से और किये गये कार्यों के आधार पर दावा करना

ज्यादा आसान और समझदारी भरा फैसला होगा।

भाजपा नेता मानते हैं कि इन तीनों ही मुद्दों पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह बचाव

की मुद्रा में है।

इसलिए मुद्दों को लेकर जनता के बीच वोट मांगने में कोई बुराई नहीं है।

यहां तक कि धारा 370 के मुद्दे पर कांग्रेस के भी कई नेताओं ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है।

पार्टी के लोग यह मान रहे हैं कि दोनों ही राज्यों मे दोबारा सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल करना कोई कठिन काम नहीं होगा।

इसके अलावा भी पार्टी की सोच है कि दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्री यानी देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर की सार्वजनिक छवि बेदाग है।

इसलिए विपक्ष को उनके नेतृत्व पर सवाल उठाने का कोई मौका भी नहीं मिलेगा।

महाराष्ट्र और हरियाणा से दिल्ली में फायदा मिल सकता है

इन तमाम कारणों से भाजपा के रणनीतिकार यह मान रहे हैं कि दोनों ही राज्यों में इस बार पार्टी को ज्यादा सीटें मिलने जा रही हैं।

पार्टी का आंतरिक आकलन है कि महाराष्ट्र में 288 में से 220 सीटों पर राजग के प्रत्याशी (शिवसेना सहित) विजयी होंगे।

दूसरी तरफ 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में भी पार्टी को 75 सीटें मिल सकती हैं।

इन दोनों ही राज्यों में पिछले चुनाव में राजग को क्रमशः 122 और 47 सीटें मिली थी।

वैसे इन दोनों ही राज्यों के चुनाव परिणाम झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी असर डाल सकते हैं।

इसी वजह से पार्टी यह चाहती है कि दोनों ही राज्यों में बेहतर परिणाम हासिल कर झारखंड में भी सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल करने का रास्ता सुगम किया जाए।

वैसे पार्टी यह मान रही है कि दिल्ली में तमाम परिस्थितियों के बाद भी आम आदमी पार्टी के साथ उसकी कड़ी टक्कर होने जा रही है।

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