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किसान आंदोलन के लंबा खींचने के बाद अब केंद्र सरकार सतर्क मुद्रा में




  • किसान नेताओं के साथ पहले दौर की वार्ता विफल

  • अमित शाह को योगेंद्र यादव पर आपत्ति

  • भाजपा के कई मंत्री पहले एक साथ बैठे

  • हम अंतिम फैसला चाहते हैं: टिकैत

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्ली: किसान आंदोलन के लगातार लंबा खींचने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की

अपीलों का किसान आंदोलनकारियों पर कोई असर नहीं होने के बाद अब भाजपा इसे

लेकर चिंतित है। भाजपा के कई बड़े नेताओं की आपसी चर्चा के बाद पहली बार इस मुद्दे

पर किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया था। पहले दौर

की वार्ता का कोई नतीजा तो नहीं निकला लेकिन इस बात पर सहमति बनी कि इस मुद्दे

पर अगले दौर की वार्ता होगी।

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और

किसान संगठनों के बीच चली बैठक मंगलवार शाम को खत्म हो गई। हालांकि, बैठक में

कोई भी नतीजा नहीं निकल सका है और फिर से तीन दिसंबर को बातचीत होगी। वहीं,

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा से आए हजारों किसानों का

पिछले पांच दिनों से हल्ला बोल जारी है। देश की राजधानी दिल्ली की सीमा पर हजारों

किसान पिछले पांच दिनों से धरना पर डटे हैं और आज उनके प्रदर्शन का छठा दिन है।

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ उनका यह धरना सोमवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर

गया। इन कानूनों के बारे में किसानों को आशंका है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य

समाप्त हो जाएगा। किसानों के प्रदर्शन की वजह से सिंघु और टिकरी बॉर्डर बंद है, वहीं

गाजीपुर बॉर्डर पर ठोस बैरिकेडिंग की गई। बीकेयू के अध्यक्ष नरेश टिकैत गाजीपुर-

गाजियाबाद (दिल्ली-यूपी) सीमा पर मंगलवार को कहा कि सरकार ने दोपहर तीन बजे

पंजाब प्रतिनिधिमंडल को बुलाया। बाद में, सरकार आज शाम सात बजे उत्तर प्रदेश,

उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी।

किसान आंदोलन से जुड़े नेता स्पष्ट फैसला चाहते हैं

हम सभी मामले पर अंतिम निर्णय चाहते हैं। नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और

हरियाणा से आए हजारों किसानों का छह दिनों से प्रदर्शन जारी है। ये किसान दिल्ली बॉर्डर

पर लगातार डटे हुए हैं। इस बीच आज ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ

सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर पहुंचकर इस

प्रदर्शन को लेकर बैठक की। ये बैठक ऐसे समय में हुई है जब आज ही केंद्रीय कृषि मंत्री

नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान संगठनों के नेताओं बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। तोंमर

ने बताया कि अब यह बैठक एक दिसम्बर को राष्ट्रीय राजधानी स्थित विज्ञान भवन में

दोपहर तीन बजे बुलायी गई है। उन्होंने बताया कि 13 नवम्बर को हुई बैठक में शामिल

सभी किसान नेताओं को इस बार भी आमंत्रित किया गया है।

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के किसान नेताओं से बात की और श्री

योगेंद्र यादव को इस बैठक में शामिल नहीं करने का आग्रह किया। इस पर किसान

संगठनों ने वार्ता का बहिष्कार करने का फैसला किया लेकिन श्री यादव को जब इसकी

जानकारी मिली तो उन्होंने स्वयं बैठक में शामिल होने इनकार कर दिया। बैठक में

शामिल होने से पहले संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया कि उनकी सरकार के

साथ बातचीत तभी संभव हो पायेगा जब उनके साथ सर्वश्री योगेंद्र यादव, हन्नान मोल्ला,

शिव कुमार कक्काजी तथा गुरनाम सिंह चादुनी को बैठक में शामिल होने की अनुमति दी

जाएगी। श्री यादव ने कहा कि बातचीत महत्वपूर्ण है इसलिए उनकी वजह से वार्ता को

रोकना सही नहीं है। उन्होंने किसानों नेताओं से कहा कि बिना उनके बारे में सोचे अपना

निर्णय लें। पुलिस की सुरक्षा में दो बसों में किसान नेताओं को बैठक स्थल पर लाया गया

था।

इस विषय पर कनाडा की राय को किया खारिज

नयी दिल्ली: भारत ने देश में किसानों के आंदोलन को लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन

ट्रूडो के बयान को अपने आंतरिक मामलों में अवांछित हस्तक्षेप करार दिया है और

कनाडाई नेतृत्व को सलाह दी है कि राजनयिक बातचीत का राजनीतिक मकसद से

इस्तेमाल नहीं किया जाये। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने आज यहां

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘हमने कनाडाई नेताओं द्वारा भारत में

किसानों से संबंधित कुछ टिप्पणियों को देखा है जो पर्याप्त जानकारी पर आधारित नहीं

हैं। किसी लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों से संबंधित ऐसी टिप्पणियां अनुचित एवं

अवांछित हैं।’’ प्रवक्ता ने कनाडा के नेतृत्व को स्पष्ट संदेश देते हुए यह भी कहा, ‘‘अच्छा

हो कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए राजनयिक बातचीत को गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं

किया जाये।’’ सिखों के प्रथम गुरु नानक देव के 551वें प्रकाश पर्व पर एक ऑनलाइन

कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री ने भारत में किसानों के आंदोलन पर

चिंता जताई। कनाडा में सिख समुदाय को संबोधित करते हुए श्री ट्रूडो ने कहा, ‘‘किसानों

के विरोध के बारे में भारत से ख़बरें आ रही हैं। स्थिति चिंताजनक है और हम सभी परिवार

और दोस्तों के बारे में बहुत चिंतित हैं। मुझे पता है कि आप में से कई लोगों के लिए यह

एक वास्तविकता है। मैं आपको याद दिला दूँ, कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों

की रक्षा करेगा। हम बातचीत के महत्व पर विश्वास करते हैं और इसीलिए, हमने अपनी

चिंताओं को उजागर करने के लिए सीधे भारत के अधिकारियों से कई माध्यमों से संपर्क

किया है। यह हम सभी के लिए एक साथ आने का क्षण है।



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