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जाटों के बीच पकड़ बनाये रखने की कवायद में जुटी भाजपा

  • पंजाब  के चुनाव परिणामों ने सारी हेकड़ी निकाल दी

  • चालीस लोकसभा सीटों का हो सकता है नुकसान

  • अप्रैल में और नुकसान हुआ तो रोकना मुश्किल

  • संजीव बलियान को सौंपी गयी है जिम्मेदारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः जाटों के बीच पकड़ बनाये रखना अब भाजपा के लिए टेढ़ी खीर बन गयी है।

भाजपा के बड़बोले नेताओं के बयानों और हरकतों ने जाट वोट बैंक को नाराज कर दिया

है। किसान आंदोलन के क्रम में यह नाराजगी दूसरे इलाकों तक फैल रही है। इस

परिस्थिति को भाजपा के रणनीतिकार भी गंभीर मान रहे हैं। दरअसल अप्रैल में उत्तर

प्रदेश के इन्हीं इलाकों में आगामी मार्च-अप्रैल में होने वाले यूपी के पंचायत चुनाव होने

वाले हैं। उसके साथ ही उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव भी करीब आता जा रहा है।

दूसरी तरफ किसान आंदोलन अब राजस्थान व हरियाणा में होने वाले किसान पंचायतों से

और व्यापक होता हुआ नजर आने लगा है। पंजाब के स्थानीय निकायों के चुनाव में

भाजपा का यह हाल होने वाला है, ऐसा भाजपा के जमीनी नेता पहले से ही समझ रहे थे।

उनलोगों का कहना है कि हालात इतने बिगड़े हुए हैं कि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी

उत्तर प्रदेश में भाजपा नेता अपने इलाकों में जाटों के बीच सही तरीके से दौरा तक नहीं

कर पा रहे हैं। हर स्थान पर उन्हें किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कृषि

कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच पंजाब में हुए निकाय चुनाव के नतीजे आ रहे हैं।

जाटों के बीच भाजपा नेताओं का जाना भी मुश्किल हुआ

अब तक के नतीजे कांग्रेस को जहां सुकून देने वाले हैं, वहीं भाजपा को परेशान करने वाले

हैं। पंजाब निकाय चुनाव के नतीजों में कांग्रेस जबरदस्त जीत की ओर बढ़ती दिख रही है,

वहीं भाजपा और शिअद का प्रदर्शन काफी खराब दिख रहा है। अगले साल होने वाले

विधानसभा चुनाव से पहले की अग्नि परीक्षा के तौर पर स्थानीय निकाय चुनाव के लिए

आज वोटों की गिनती यही संकेत दे रहे हैं। पंजाब में 14 फरवरी को 117 स्थानीय निकायों

पर चुनाव हुए थे, जिसमें से 109 नगरपालिका परिषद और नगर पंचायत हैं, वहीं, 8 नगर

निगम शामिल हैं। आठ नगर निगम अबोहर, बठिंडा, बाटला, कपूरथला, मोहाली,

होशियारपुर, पठानकोट और मोगा और 109 मगर पालिका परिषदों के 2252 वार्ड्स का

रिजल्ट आज शाम तक स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल, शुरुआती नतीजों में कांग्रेस कमाल

करती दिख रही है, वहीं नतीजों से ऐसा लग रहा है कि भाजपा को कृषि कानूनों का

नुकसान होता दिख रहा है।

नरेंद्र तोमर ने कहा किसानों की वजह से नहीं हारे पंजाब में

इस मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री अब भी खुलकर किसानों की नाराजगी को जिम्मेदार नहीं

मानते हैं। उन्होंने पंजाब नगर निगम चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार पर कहा कि

उन नतीजों को किसानों के आंदोलन से जोड़ना अनुचित है। हम पंजाब में कमजोर थे और

इसके पहले हम अकाली दल के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ते थे। लेकिन हमने इस बार

अलग से चुनाव लड़ा है, जिससे वहां पार्टी को चुनाव के दौरान नुकसान हुआ है। इसके साथ

ही केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे

किसानों से अब भी बात करना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में

कह चुके हैं कि सरकार तीनों कानूनों पर बिंदुवार बात करना चाहती है। उन्होंने कहा, हम

लगातार आंदोलनकारी किसानों के संपर्क में हैं। भारत सरकार कृषि कानूनों पर उनके

साथ बात करने के लिए तैयार है। तोमर ने हालांकि इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी कि

दोनों पक्षों के बीच बातचीत कब फिर से शुरू होने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि

अगले वित्त वर्ष के बजट में कृषक समुदाय के कल्याण के लिए कई योजनाओं का प्रस्ताव

किया गया है। लेकिन जाटों के बीच के बीच जो नाराजगी है वह कोई छिपी बात नहीं है।

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