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चुनाव से ठीक पहले उत्तरप्रदेश बीजेपी में भगदड़ जैसी हालत




  • हर दिन बढ़ती जा रही है भाजपा की परेशानी
  • आज भी छह लोगों ने इस्तीफा देने का एलान किया
  • अचानक से बदल गयी है पूरी राजनीतिक फिजां ही
  • ओबीसी की उपेक्षा का आरोप लगा योगी सरकार पर
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः चुनाव से ठीक पहले भाजपा की ऐसी हालत हो जाएगी, किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। खासकर बड़े चैनल जिस तरीके से तस्वीर को प्रस्तुत कर रहे थे, उससे साफ था कि भाजपा बहुत मजबूत स्थिति में हैं। विधानसभा चुनाव का एलान होने के बाद से यह सारी परिस्थिति पूरी तरह उलट गयी है।




भाजपा के कुल 11 विधायकों ने अब तक पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि ऐसे लोगों को भाजपा की जीत के बारे में संदेह है और वे चुनाव जीतने के लिए दूसरा ठौर तलाश रहे हैं।

इसके बीच ही चुनावी रणनीति के जानकार लगातार विधायकों के सपा में शामिल होने के मुद्दे पर यह संदेह व्यक्त कर चुके हैं कि कहीं समाजवादी पार्टी भी भाजपा की पश्चिम बंगाल वाली गलती तो नहीं दोहराने जा रही है।

भाजपा का खेमा छोड़ने का एलान मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने सबसे पहले किया था। पार्टी छोड़ते ही उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की बात सामने आ गयी।

लेकिन इस तरीके से विरोधियों को धमकाने की कोशिशों का शायद उल्टा असर हुआ। गुरुवार को भी छह विधायकों ने भाजपा से त्यागपत्र देने के एलान कर दिया है। आज की सूचना के मुताबिक मंत्री धर्मसिंह सैनी के अलावा भी अन्य विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है।




चुनाव से ठीक पहले ऐसा होना भाजपा के लिए झटका

इसके पहले तिंदवारी विधानसभा से भाजपा के विधायक विधायक ब्रजेश प्रजापति, विधायक रोशन लाल वर्मा, भगवती सागर ने इस्तीफा दे दिया था। आज मंत्री धर्मसिंह सैनी, शिकोहाबाद से विधायक मुकेश वर्मा और औरया के बिधूना विधायक विनय शाक्य ने इस्तीफा दे दिया।

बुधवार को ही विनय शाक्य ने भाजपा से जाने का एलान किया था। विधायक ने कहा था कि स्वामी प्रसाद जहां कहेंगे वहां जाएंगे। इसके अलावा लखीमपुर खीरी से विधायक बाला प्रसाद अवस्थी भी बीजेपी से जानेवालों की कतार में हैं। भाजपा में मची भगदड़ के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य का नया ट्वीट सामने आया है।

उन्होंने कहा है कि नाग रूपी आरएसएस और सांप रूपी बीजेपी को स्वामी रूपी नेवला यूपी से खत्म करके ही दम लेगा। इस बयान से माहौल में और गरमी आ गयी है और भाजपा का ओबीसी मतदाता का सारा समीकरण ही ध्वस्त होता नजर आ रहा है।

पार्टी छोड़ने वालों का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को कोई तवज्जों नहीं दी गई और न उन्हें उचित सम्मान दिया गया। प्रदेश सरकार द्वारा ही दलितों, पिछड़ों, किसानों व बेरोजगारों नौजवानों और छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की भी घोर उपेक्षा की गई है।



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