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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से दशा बदल रही है पूरे गांव की

  • देवरी गांव के हर आंगन और खेत में ‘एलोवेरा’ की खेती

  • अपने दायरे में खेती कर पैसे कमा रही हैं महिलाएं

  • एलोवेरा की मांग हाल के दिनों में पूरे देश में बढ़ी है

  • अब उन्नत और फायदेमंद खेती सीख गये हैं ग्रामीण

राष्ट्रीय खबर

रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय अपने ग्रामीण मिशन के तहत फिर से एक नया

कीर्तिमान स्थापित कर चुका है। झारखंड में रांची के नगड़ी प्रखंड का देवरी गांव देश-

दुनिया में “एलोवेरा विलेज” के रूप में नई पहचान स्थापित कर रहा है। गांव के जहां हर

आंगन और खेत में पनप रहा एलोवेरा गांव की महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन का

माध्यम बन रहा है। हाल के दिनों में इसकी आयुर्वैदिक उपयोगिता के बारे में अधिक प्रचार

होने से इसका बाजार भी व्यापक हो गया है। अकेले रांची में इसी एलोवेरा की एक

अमेरिकी कंपनी हर माह करोड़ों का कारोबार कर रही है। फॉर एवर नाम की इस कंपनी की

एलोवेरा खरीदने पूरे राज्य के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी हर रोज सैकड़ों लोग आते हैं।

अब नगरी के देवरी गांव की बात करें तो मंजू कच्छप, मुन्नी दीदी, रेणु समेत दर्जनों

महिलाएं एलोवेरा के नन्हें पौधों को सींच खुद के स्वावलंबन की वाहक बन रहीं हैं। मंजू

कहतीं हैं एलोवेरा ने पूरे राज्य में हमारे गांव का मान बढ़ाया है। अब इस गांव को लोग

एलोवेरा विलेज के नाम से जानते हैं जो हमें गौरवान्वित करता है। हम पूरी मेहनत से

राष्ट्रीय स्तर पर अपने गांव का नाम रोशन करेंगे। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के

सहयोग से एलोवेरा विलेज में उगाये जा रहे एलोवेरा की मांग पूरे राज्य में है। महिलाएं 35

रुपये किलो के हिसाब से इसके पत्ते बेच रहीं हैं। मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने महिलाओं को राह दिखाई

यही वजह है कि अन्य खेतिहर परिवार भी एलोवेरा की खेती में आगे आ रहें हैं। मंजू ने

बताया कि एलोवेरा जेल की मांग इन दिनों बढ़ी है। हमें जेल निकालने की मशीन सरकार

जल्द उपलब्ध करा रही है। इसके बाद पत्तों के साथ साथ हम जेल भी तैयार करेंगे। इसके

लिए उत्पादक समूह बनाने की कार्ययोजना है। महिलाओं का कहना है कि अत्यधिक धूप

की वजह से सिंचाई की जरूरत पड़ती है। इसके पौधारोपण में भी किसी प्रकार का खर्च नहीं

होता। पौधा से दूसरा पौधा तैयार होता है, जिसमें किसी प्रकार का निवेश नहीं होता और

बाजार भी उपलब्ध है, ऐसे में और क्या चाहिए। इन्हीं पौधों से अन्य खेतों में भी रोपण

कार्य हुआ है, जिसका सुखद परिणाम कुछ माह बाद देखने को मिलेगा। राज्य सरकार का

साथ यूं ही मिलता रहा तो वृहत पैमाने पर खेती करने से महिलाएं पीछे नहीं हटेंगी।

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