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पीड़ित को ही जेल भेजा बिहार में यह कैसा सुशासन

  • सारे सीनियरों पर भारी पड़ रहा एक जिला का एसपी

  • अलग अलग जांच में पाया गया कि एसपी गलत हैं

  • जिसका पैसा लुटा वह नौ महीनों से जेल में बंद

  • लूटने से बचे पैसों को लूट की बरामदगी दर्शायी

दीपक नौरंगी

पटनाः पीड़ित को ही जेल भेजने के बाद एक एसपी अपने वरीय अधिकारियों की जांच को

भी गलत ठहरा रहा है। यह बिहार के पुलिस अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया

है। बिहार में यह कैसा सुशासन है, यह सवाल पुलिस के बीच इनदिनों ज्यादा चर्चित है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुशासन के लिए जाने जाते हैं। उन्हीं के राज्य में एक जिले के

एसपी के द्वारा लूट के मामले में पीड़ित को ही जेल भेज कर उसी की रकम बरामद कर

उसे लूट की रकम दिखा दी गयी। इस मामले में जब पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया तो

एसपी विशाल शर्मा पूरी तरह बौखलाहट में आ गए। बिहार के सुशासन राज में ऐसा हो

सकता है किसी ने सोचा भी नहीं होगा। पूर्णिया एसपी विशाल शर्मा ने निर्दोष व्यक्ति को

जेल भेज दिया और लूट के मामले में तीन दिनों में ही उदभेदन कर अपनी वाहवाही लूट

ली।

क्या था पूरा मामला

पूर्णिया जिला के धमदाहा थाना कांड संख्या 170/19, धारा 395 /397 भाo दo लूट का

मामला दर्ज हुआ। बीते वर्ष 3/06 /19 को पूर्णिया के एक्सिस बैंक से चार व्यापारियों के

द्वारा कुल 78 लाख रुपए की निकासी की गई। व्यापारी पूर्णिया से अपने घर भवानीपुर

लौट रहे थे। इसी क्रम में रास्ते में ही बोलेरो सवार पांच छह अपराधियों ने गाड़ी को

ओवरटेक कर 59 लाख रुपया लूट लिया। उक्त राशि में से अठारह लाख रुपये व्यापारी

अपने गाड़ी में ही छुपा कर रख लिए थे जिसके कारण व रुपए अपराधी के हाथ नहीं लग

सके। झकसू साह नामक व्यापारी को अपराधियों ने गोली मारकर घायल भी कर दिया।

जो शेष 18 लाख रुपया बच गया उक्त राशि को व्यापारी ने अपने भाई के यहां घर पर

भिजवा दिया।

पीड़ित को ही जेल भेजन के बाद घर के पैसे बरामद दिखाये

पूर्णिया एसपी विशाल शर्मा ने लूट के मामले में वाहवाही लूटने के लिए मात्र तीन दिनों ही

कांड का उदभेदन कर लिया। लूटने से बची शेष अठारह लाख की राशि बरामद दिखा कर

मामले का झूठा उदभेदन कर दिया। पीड़ित को ही यानी व्यापारी के गाड़ी का ड्राइवर अजय

पासवान और गाड़ी के स्टाफ को पुलिस के द्वारा जबरन मारपीट कर कोर्ट में 164 का

बयान दर्ज कराया गया। उक्त लूट कांड के मामले में सुबोध अग्रवाल लगातार नौ महीने से

जेल में है।

परिवार ने न्याय के लिए पुलिस मुख्यालय में लगाई गुहार

लूट के मामले में पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए पुलिस मुख्यालय में गुहार लगाई पुलिस

मुख्यालय में डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे से मिलकर न्याय के लिए आवेदन दिया। उसके बाद

डीजी टीम के आदेश के बाद अपर पुलिस महानिदेशक विधि व्यवस्था अमित कुमार ने

मामले की जांच के लिए पूर्णिया आईजी को पत्राचार किया कि मामले की जांच स्वयं करें

और इससे पहले अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने भी जांच के लिए एक टीम को

पूर्णिया भेजा। अपराध अनुसंधान विभाग की टीम पूर्णिया भेजा गया जिसमें एक डीएसपी

और एक पुलिस निरीक्षक ने मामले की जांच की और अपर पुलिस महानिदेशक सीआईडी

विनय कुमार को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी जिसमें साफ तौर पर लिखा कि पूर्णिया एसपी

विशाल शर्मा ने अनुसंधान को विपरीत दिशा में ले गए और पीड़ित व्यक्ति को ही सलाखों

के पीछे भेज दिया।

सीनियर अधिकारियों के आदेश को पूर्णिया के एसपी ने की अनदेखी

पूर्णिया एसपी विशाल शर्मा ने लूट के मामले में डीजीपी और अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के आदेश की अनदेखी की और अपनी ही जांच रिपोर्ट को सही बताया और सीनियर अधिकारी की बात ना मानकर अपनी जिद में अड़े हुए हैं और अपनी झूठी जांच रिपोर्ट को सही बता रहे हैं। सीआईडी के सीनियर अधिकारियों ने पूर्णिया एसपी की जांच रिपोर्ट को गलत पाया फिर पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद पूर्णिया आईजी विनोद कुमार ने पूरे मामले की जांच की तो आईजी पूर्णिया ने पुलिस मुख्यालय के आदेश को

गंभीरता से लेते हुए लूट कांड के पूरे मामले की नए सिरे से जांच की और जांच में पाया कि

पूर्णिया एसपी विशाल शर्मा ने बड़ी लापरवाही की है। पूर्णिया एसपी विशाल शर्मा फिर नहीं

माने और उन्होंने आईजी की जांच रिपोर्ट को गलत ठहराते हुए अपना जवाब पुलिस

मुख्यालय को दे दिया कि मेरे द्वारा दी गई सुपरविजन रिपोर्ट और जांच सही है। पूरा

मामले को पूर्णिया और पुलिस मुख्यालय के सभी आईपीएस अधिकारी के बीच सुर्खियों में

है।

अपर पुलिस महानिदेशक सीआईडी की साख दांव पर

बिहार में किसी भी गंभीर मामले में यदि जिला पुलिस के द्वारा लापरवाही पाई जाती है तो

सीआईडी टीम उसे नए सिरे से जांच करती है लेकिन इस मामले में सीआईडी के सीनियर

पुलिस अधिकारी विनय कुमार की साख दांव पर है क्योंकि विनय कुमार ने साफ तौर पर

लूट के मामले में पूर्णिया एसपी के द्वारा पीड़ित को ही जेल भेज देने की जो कार्रवाई की

गई है उसे गलत ठहराया है। आईजी पूर्णिया ने अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेज

दी है और सीआईडी के अधिकारी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है। पूर्णिया एसपी

विशाल शर्मा अपनी जांच रिपोर्ट को सही करार दे रहे हैं। अब अंतिम फैसला बिहार के

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को लेना है।

पीड़ित के बुजुर्ग पिता ने कहा सुशासन सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी

लूट कांड में जेल में बंद सुबोध कुमार अग्रवाल के अस्सी वर्षीय पिता गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार का शासन काफी अच्छा मैं मानता था लेकिन मेरा कभी कोई परिवार का लड़का या कोई व्यक्ति अपराधिक घटना में शामिल नहीं है ना हम लोग

कभी थाना और पुलिस का मुंह देखे थे। नीतीश कुमार के सुशासन सरकार से ऐसी उम्मीद

मुझे नहीं थी लेकिन पूर्णिया एसपी ने हमें बर्बाद कर दिया। मेरा पुत्र सुबोध अग्रवाल नौ

महीने से जेल के सलाखों के पीछे हैं उसका एक लड़का अमित कुमार है जो नाबालिक है

और एक छोटी बेटी पांच साल की है जो होली के दिन अपने पिता को आंखों से निहारती

रही और खोजती रही मेरे पुत्र सुबोध अग्रवाल की पत्नी कंचन देवी की तबीयत लगातार

खराब रहती है क्योंकि उसे आज तक यही पता नहीं लगा कि मेरे पति को पुलिस ने किस

अपराध में जेल की सलाखों के पीछे भेजा है।


 

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