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बिहार के पूर्व मंत्री अकलू राम महतो को अंतिम विदाई

बोकारो: बिहार के पूर्व मंत्री तथा बोकारो जिला के पूर्व विधायक अकलू राम महतो का

शुक्रवार सुबह चार बजे बीजीएच में निधन हो गया। वे किडनी रोग से ग्रसित थे। उन्हें

इलाज के लिए बोकारो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान उनका

निधन हो गया। उनके पुत्र राजेश महतो के ने बताया कि अकलू राम महतो को मंगलवार

को बोकारो जनरल अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हें किडनी की बीमारी थी और

लंग्स में पानी भी आ गया था। डॉक्टर ने उनका डायलिसिस करने के लिए कहा था। वह

पहले से ही डायबिटीज और बीपी के पेशेंट भी थे। परिवार के सदस्यों ने उनको बेहतर

इलाज के लिए किसी अन्य अस्पताल में शुक्रवार को ही लेकर जाने वाले थे। दाह संस्कार

से पूर्व स्व. अकलू राम महतो के पार्थिव शरीर को उनके अंतिम दर्शन के लिए बोकारो

जनरल अस्पताल से सेक्टर 9 स्थित विस्थापित स्टेडियम महुआर, उनके जन्म स्थान

चिटाही बस्ती, बसंती मोड़ स्थित कुशवाहा पंचायत भवन के बाद पैतृक गांव चास स्थित

चौरा बस्ती ला गया। वहीं गांव से उनके पार्थिक शरीर को जुलस की शक्ल में बाईपास रोड

चास के पार्टी कार्यालय पहुंचा। जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार चास स्थित गरगा नदी

घाट में किया गया।

बिहार के पूर्व मंत्री अकलू राम महतो का राजनीतिक सफर

77 वर्षीय अकलू राम महतो का राजनीतिक सफर 1980 में विधानसभा चुनाव जीत कर

शुरु हुआ था। वह 1995 में भी विधानसभा चुनाव जीते थे। वह बिहार सरकार में मंत्री भी

रहे। उन्होंने धनबाद लोकसभा से चार बार और गिरिडीह व हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से

एक बार चुनाव लड़ा था। स्व. महतो अपने राजनीतिक सफर में कई राजनीतिक पार्टियों में

रहे। पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ थे। उनकी बोकारो के विस्थापित गांवों में

मजबूत पकड़ थी। वह टीएमसी में भी शामिल हुए थे, लेकिन बाद में समाजवादी पार्टी में

चले गए थे। एक दौर था, जब महतो बिहार-झारखंड की राजनीति में कद्दावर नेता माने

जाते थे। झारखंड में वह एक वक्त राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के सबसे विश्वस्त और

करीबी माने जाते थे। उन्होंने झारखंड प्रदेश राजद अध्यक्ष की कमान भी संभाली थी।

गरीब- शोषित, वंचित और अकलियत वर्गो के लिए करते रहे संघर्ष

अकलू राम महतो के करीबी रहे भुवनेश्वर पटेल ने कहा कि स्वर्गीय महतो संपूर्ण जीवन

गरीब-शोषित, वंचित और अकलियत वर्गो के लिए संघर्ष करते रहे। मजदूरों के अधिकारों

को लेकर भी उन्होंने लंबा आंदोलन किया

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