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बिहार में अभी तक के सबसे बड़े घोटाले के अभियुक्त अब भी आराम से

  • सीबीआई की कार्रवाई पड़ती जा रही है धीमी
  • किसी बड़े अफसर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं
  • सृजन घोटाले को पकड़ में आये ढाई साल बीत चुके हैं
  • करीबी अफसरों की भूमिका सृजन घोटाले में काफी संदिग्ध रही है
दीपक नौरंगी

भागलपुर : बिहार के अभी तक के सबसे बड़े घोटाले भागलपुर के सृजन घोटाले में

सीबीआई जांच टीम की कार्रवाई दिन पर दिन काफी धीमी पड़ती जा रही है। क्योंकि बैंक

अधिकारियों और जिला प्रशासन के एक दो कर्मचारियों को छोड़ सीबीआई ने किसी भी

घोटालेबाज पर अभीतक किसी प्रकार की बड़ी कार्रवाई नहीं की है। क्योंकि घोटाले को ढाई

साल से भीऊपर होने जा रहे हैं। लेकिन सीबीआई जांच एजेंसी के द्वारा अभी तक जिला

प्रशासन के किसी आईएएस रैंक या आईपीएस अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है।

सृजन घोटाले मैं जिस प्रकार से आईएएस अधिकारियों ने नियम और कानून को ताक पर

रखकर सृजन संस्थान की मालिका मनोरमा देवी को लाभ पहुंचाने के लिए पद का

दुरुपयोग किया है। वैसे आईएएस अधिकारियों पर सीबीआई के द्वारा कोई भी कार्रवाई

होती नहीं दिख रही।

सरकार के काफी करीबी अफसरों की भूमिका सृजन घोटाले में काफी संदिग्ध रही है।

कई बड़ो राज्यों में कई अन्य मामलों में सीबीआई के द्वारा कई बड़ी कार्रवाई की गई है।

लेकिन भागलपुर के सृजन घोटाले में सीबीआई कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगा है।

क्योंकि सृजन घोटाले में स्थानीय प्रिंट मीडिया की भूमिका भीपूरी तरह संदिग्ध देखी जा

रही है। क्योंकि सृजन घोटाले में कई पत्रकार ऐसे हैं, जो अपने आप को साफ सुथरा बताते

हैं, लेकिन सृजन घोटाले से निजी लाभ लेने के लिए उनके द्वारा चेक से कई मोटी रकम

लिए जाने की बात जांच में सामने आ चुकी है।

बिहार में अभी तक का सबसे बड़ा घोटाला है सृजन का 

अब देखना यह है कि बिहार के सबसे बड़े घोटाले में आने वाले दिनों में कोई कार्रवाई होगी

या नहीं या जांच के नाम पर धीरे-धीरे यह मामला आम लोग इसे नजर ओझल नजर

आएगा इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

क्योंकि सृजन घोटाले के मुख्य आरोपी अमित कुमार और रजनी प्रिया अभी भी सीबीआई

के शिकंजे में नहीं आए हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं ना कहीं

सीबीआई टीम के बड़े अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। सवाल यह उठता है

कि यदि इसी तरह घोटाला होता रहा और आरोपी बचते रहे तो आने वाले दिनों में आम

लोग किस जांच एजेंसी पर भरोसा करेंगे। यह अपने आप में एक सवाल है। इसका जवाब

कौन देगा यह तो आने वाला समय बताएगा।

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