सीतामढ़ी के मामले में सुशासन सरकार ने तुरंत लिया फैसला

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  • आईजी की रिपोर्ट में एसपी की नाकामी हुई उजागर

  • रिपोर्ट के बाद एसपी को हटाने को अनुशंसा

दीपक नौरंगी

भागलपुरः सीतामढ़ी के मामले में सुशासन सरकार नीतीश कुमार ने तुरंत फैसला लिया

और सीतामढ़ी के एसपी अमरकेस डी बदल दिए गए ।

पुलिस प्रशासन के नए मुखिया गुप्तेश्वर पांडेय के बनने के बाद एक नई टीम

पुलिस मुख्यालय में काम करने लगी है

जिसमें मुख्यालय के अपर पुलिस महानिदेशक कुंदन कृष्णन, विधि व्यवस्था अपर पुलिस महानिदेशक

अमित कुमार, सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, स्पेशल ब्रांच के अपर पुलिस

महानिदेशक जे एस गंगवार यह पूरी टीम बिहार की विधि व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखी हुई है

कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं जो बिहार की विधि व्यवस्था सही माने जा रहे हैं

हाल फिलहाल सुर्खियों में आए पूर्व सीतामढ़ी के एसपी को बड़ी लापरवाही के मामले में

तुरंत निर्णय लिया गया

जो बिहार के हित में माना गया

सीतामढ़ी एसपी अमरकेश डी को राज्य सरकार ने हटा दिया है।

एसपी पर गंभीर आरोप लगे है।

जोनल आईजी नैयर हसनैन खान की रिपोर्ट के आधार पर सूबे के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने

एसपी को हटाने अनुरोध राज्य सरकार से किया था।

सीतामढ़ी के डुमरा थाना में पुलिस कस्टडी में दो आरोपियों की मौत और

उसके बाद उत्पन्न स्थिति को संभालने में एसपी की भूमिका संदिग्ध रही।

जोनल आईजी की जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।

डीजीपी को भेजे गए रिपोर्ट में आईजी ने जिक्र किया है कि पूरे प्रकरण में सीतामढ़ी एसपी के द्वारा

उक्त उत्पन्न स्थिति को नियंत्रण करने में घोर लापरवाही व गैर व्यवसायिक तरीके से काम किया गया।

इस अवधि में सीतामढ़ी में कैंप कर रहे तिरहुत डीआईजी से बात कर आईजी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे थे।

लेकिन एसपी के द्वारा बहुत से महत्वपूर्ण तथ्यों को वरीय पदाधिकारी के संज्ञान में नहीं दिया गया

एवं स्थिति से गैर जिम्मेदाराना और गैर व्यवसायिक तरीके तरीके से निपटने का प्रयास किया गया।

जांच में यह भी पाया गया कि एसपी के द्वारा घटनाक्रम के बारे में दी गई जानकारी एवं वास्तविक स्थिति में काफी विरोधाभास था।

यानी एसपी ने अपने वरीय पदाधिकारियों को घटना के बारे में कई झूठी जानकारी दी और तथ्यों को छुपाया भी।

घटना के बारे में एसपी के द्वारा दी गई भ्रामक सूचना के कारण जिले के आम लोग एवं मीडिया में पुलिस की छवि अत्यंत धूमिल हुई है।

आईजी ने लिखा है कि सीतामढ़ी जिला सांप्रदायिक एवं विधि व्यवस्था व अपराध के दृष्टिकोण से

अतिसंवेदनशील है।

एसपी के कार्यकलाप एवं कार्यशैली से सीतामढ़ी में कभी भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

एसपी के कार्यकलापों के बारे में डीआईजी की जांच रिपोर्ट में विस्तृत रूप से उल्लेख किया गया है।

हत्या व लूटकांड के मामले में गिरफ्तार पूर्वी चंपारण के चकिया के दो बदमाशों की मौत बुधवार की शाम संदेहास्पद स्थिति में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी ।

बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें डुमरा थाने की हाजत में रखा गया था।

पुलिस दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी कर रही थी।

इसी बीच हाजत में ही दोनों की कथित तौर पर अचानक तबीयत खराब हो गई थी।

जिसके बाद पुलिस ने दोनों को शाम चार बजे के करीब सदर अस्पताल में भर्ती कराया था,

जहां इलाज के दौरान एक घंटे बाद दोनों की मौत हो गई थी।

मृतकों में पूर्वी चंपारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडिहा निवासी मो. मुलाजिम के पुत्र मो. तस्लीम और मो. मैनुल के पुत्र मो. गुफरान शामिल हैं।

इधर, इस घटना में एसपी सहित 10 पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

जिसमें डुमरा थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष चन्द्रभूषण कुमार सिंह सहित आठ पुलिस कर्मियों पर हत्या का मुकदमा चलाया जा रहा है।

वहीं रुन्नीसैदपुर थानाध्यक्ष भूदेव दास को डुमरा थानाध्यक्ष व अन्य के पुलिस हिरासत फरार होने के मामले में निलंबित कर दिया गया है।

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