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दागी शब्द से मुक्ति मिली बिहार के 94 बैच के दारोगा लोगों को

  • कई अफसर  मानते थे कि यह फैसला गलत है

  • सरकार ने पहले का अपना फैसला पलटा

  • थानाध्यक्ष और सर्किल इंस्पेक्टर बनेंगे

  • फिर से राष्ट्रीय खबर की पहल रंग लायी

दीपक नौरंगी

भागलपुरः दागी शब्द किसी बदनूमा दाग की तरह उन पुलिस वालों पर चस्पा था, जो

1994 बैच के सब इंस्पेक्टर थे। वैसे काफी पहले से इस बात पर चर्चा होती थी कि पूर्व के

डीजीपी द्वारा इस तरीके का आदेश दिया जाना गलत था। लेकिन ऐसी राय जाहिर करने

वाले उच्चाधिकारी भी औपचारिक तौर पर बयान देने से कतराते थे।

वीडियो में जान लीजिए पूरी रिपोर्ट को

अब जाकर एक खास वर्ष में बहाल होने वाले सब इंस्पेक्टरों को इस आरोप से मुक्ति मिल

गयी है। सरकार ने अपने पूर्व आदेश को पलट दिया है। पुलिस मुख्यालय के कई सीनियर

पुलिस अधिकारी अपने ही विभाग के एक खास बैच को दागी कहे जाने से नाराज थे

आखिरकार सरकार को जब पूरी जानकारी इस मामले की हुई तो सरकार ने पूरे लेने को

बदल दिया है। बेवजह दागी शब्द का प्रयोग पुलिस रैंक के अधिकारियों के साथ इस शब्द

का जो प्रयोग किया गया वह सरासर गलत था। अब सरकार के नये आदेश के तहत वैसे

दारोगा या इंस्पेक्टर जिन्हें 3 या उससे अधिक वृहद सजा मिली हो उन्हें थानाध्यक्ष या

सर्किल इंस्पेक्टर बनाया जा सकेगा,बशर्ते सजा की समय अवधि समाप्त हो गई हो। इस

संबंध में गृह विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि सजा का

कुप्रभाव समाप्त होने के बाद उन्हें थानाध्यक्ष अथवा अंचल पुलिस निरीक्षक के पद पर

पदस्थापन हेतु योग्य माना जाएगा। बशर्ते इस कंडिका की अन्य अहर्ता उन पर लागू ना

हो। गृह विभाग के संकल्प में कहा गया है कि जिन्हें विभागीय कार्यवाही अथवा पुलिस

हस्तक नियम के संचालन के बाद 3 या उससे अधिक वृहद सजा मिली हो वैसे दोषी पाए

गए पुलिस पदाधिकारी को थानाध्यक्ष अथवा अंचल पुलिस निरीक्षक के पद पर तब तक

पदस्थापित नहीं किया जाएगा जब तक उनके विरुद्ध किसी भी वृहद सजा का प्रभाव लागू

रहेगा।

दागी शब्द हटा लेकिन कुछ शर्तें लागू रहेंगी 

यह प्रभाव अंतिम घटना की तिथि जिसके लिए विभागीय कार्यवाही अथवा पुलिस हस्तक

नियम के तहत वृहद सजा मिली हो से 3 वर्ष तक रहेगा। बता दें कि बिहार सरकार ने यह

निर्णय लिया था कि जिन्हें तीन ब्लैक मार्का मिला हो उन्हें थानाध्यक्ष और सर्किल

इंस्पेक्टर नहीं बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश पर 24 जून 2019 को

यह आदेश जारी किया गया था। इसके बाद हजारो दारोगा और इंस्पेक्टर दागी हो गए थे।

लेकिन अब उस में बदलाव किया गया है सरकार के इस निर्णय से हजारों दारोगा और

इंस्पेक्टर को फायदा होगा और अभ वे थानाध्यक्ष और सर्किल इंस्पेक्टर बन सकते हैं।

पुलिस मैनुअल में भी दागी शब्द के बारे में कहीं कोई जिक्र नहीं था अब पुलिस मैनुअल के

खिलाफ यह आदेश गया था वापस जो पुलिस मैनुअल में नियम था उसी नियम के तहत

आगे की कार्रवाई होगी लेकिन पहले वाला जो आदेश था उसे सरकार ने निरस्त कर दिया

है। 1994 बैच और 2009 बैच के कई दरोगा और पुलिस इंस्पेक्टर को बेवजह दागी बना

दिया गया था। इस मामले को सिर्फ राष्ट्रीय खबर में प्रमुखता से उठाया गया था। इससे

संबंधित कई खबरें राष्ट्रीय खबर अखबार में लगातार प्रकाशित की गयी थी। आज सरकार

ने इस आदेश को पूरा पलट दिया है और निर्णय निकाल दिया है कि जिन पुलिस इस्पेक्टर

पर बेवजह दागी वाला दाग लगा था, वे अब जिले में तैनात हो सकते हैं। पहले निर्णय था

कि वह किसी भी जिले में तैनात नहीं रहेंगे।

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