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पारस को मंत्री बनाने के लिए नीतीश का लगा वीटो पावर

  • अधर में चिराग, धर्म संकट से मुक्त नहीं हो पाई भाजपा

  • नए हनुमान जरूरी लेकिन पुराने हनुमान भी मजबूरी

  • चिराग के लिए सभी ने खोले अपने दरवाजे

रंजीत कुमार तिवारी
राष्ट्रीय खबर

पटना : पारस को मंत्री बनाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी समर्थन

होने की बात बाहर आयी है। विगत सप्ताह से लोजपा में टूट के बाद भाजपा और जदयू के

नए हनुमान रूपी विभीषण पशुपति पारस के लिये मंत्री पद की कवायद निरंतर जारी है।

सत्ता के गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक उनके दावा को पुख्ता बनाने के लिए

जदयू और स्वयं मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा व पर्दे के पीछे गुफ्तगू भी हो गया है। लेकिन

पिक्चर अभी बाकी है। अंदरखानों की मानें तो भाजपा नेतृत्व को अब भी अपने पुराने

हनुमान चिराग पासवान याद हैं, जिसे लेकर उनके पास एक छोटा सा धर्म संकट बचा है।

पुराने हनुमान की वफादारी के अनुरूप उन्हें भी कोई आश्वासन या लॉलीपॉप देने की

तैयारी चलना लाजिमी है। ताकि भविष्य में दलित राजनीति पर भाजपा का पकड़ बरकरार

रहे। यूं भी वंशवाद की राजनीति के तहत रामविलास पासवान की विरासत पर उनके पुत्र

चिराग पासवान का हीं दावा बनता है। इसमें कोई शक नहीं कि पिता के निधन के बाद

पासवान व दलित समाज की सहानुभूति चिराग के पाले में नजर आती है। ऐसे में भाजपा

कोई रिस्क नहीं लेगी और वह नए हनुमान पशुपति पारस को पुरस्कृत तो करेगी ही,

लेकिन पुराने हनुमान चिराग को भी किन्हीं नए चाशनी में फंसा कर रखना चाहेगी। इसके

लिए ही दिल्ली दरबार में महामंथन का दौर चल रहा है। देखना है कौन सा आश्वासन व

कौन सा लॉलीपॉप पासवान के लिए आता है। वैसे चिराग पासवान के लिए कांग्रेस और

राजद ने भी अपने दरवाजे खुले रखे हैं। लेकिन चिराग पासवान ने अपने वजूद को बनाए

रखने का निर्णय लिया है। ऐसी स्थिति में उनके लिए भाजपा ने दोस्ती के दरवाजे बंद नहीं

किए हैं। शीर्ष नेतृत्व चिराग से सहानुभूति को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

पारस को मंत्री बनाने की दावेदारी में पीछ से भाजपा भी

कभी अपना ठीकरा नीतीश कुमार और जदयू पर फोड़ते हैं तो कभी अपने लिए सहानुभूति

वाला चिट्ठी जारी करते हैं। आम कार्यकर्ताओं से लेकर राजनेताओं के लिए ये पत्र जारी

किए जा रहे है। पशुपति पारस को घर का भेदी लंका ढाए की तर्ज पर विभीषण की उपाधि

दी जा रही है। ऐसे में भाजपा आलाकमान द्वारा चिराग के लिए बनाये गए स्पेस का लोगों

को बेसब्री से इंतजार है। मालूम हो कि लोजपा में टूट के बाद चिराग पासवान ने ट्विटर पर

कल एक चिट्ठी शेयर करते हुए जदयू, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अपने चाचा पशुपति

पारस पर निशाना साधा व कई आरोप लगाये हैं। चिट्ठी में चिराग ने लिखा है कि जदयू ने

हमेशा लोजपा को तोड़ने का काम किया है। 2005 फरवरी के चुनाव में हमारे 29 विधायकों

को तोड़ा गया। 2005 नवंबर में हुए चुनाव में हमारे जीते हुए सभी विधायकों को जदयू ने

तोड़ा। इसके बाद 2020 में हमारी पार्टी से जीते हुए एक विधायक को तोड़ा गया। कई बार

नीतीश के द्वारा मेरे पिता और लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की राजनीतिक

हत्या का प्रयास किया गया। दलित और महादलित में बंटवारा करवाना उसी का एक

उदाहरण है। नीतीश जी ने मेरे पिता को और मुझे राजनीतिक तौर पर समाप्त करने का

कोई मौका नहीं छोड़ा। पापा ने कभी नीतीश कुमार के साथ कोई समझौता नहीं किया।

चाचा ने मुझे सिर्फ अपना प्रतिस्पर्धी समझा और अंतिम समय में धोखा दिया। फ़िलवक्त

चिराग इसी प्रकार सहानुभूति बटोरो अभियान में लगे हुए हैं। और इस काम में उन्हें

सफलता मिलती हुई दिख रही है। जनता का समर्थन व सहानुभूति मिलना चिराग के लिए

अच्छी अच्छी तो दूसरे गुट के लिए अशांतिपूर्ण खबर है।

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