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खनन कार्य में जमीन के अंदर से निकली लक्ष्मी नारायण की बड़ी प्रतिमा




तालाब खोदने के क्रम में निकली लक्ष्मी नारायण की विशाल मूर्ति

प्रतिमा बाहर निकलते ही वहां पूजा अर्चना प्रारंभ

संजय महली नामक व्यक्ति को दिखा था पहले

थाना को सौंपने के लिए तैयार नही थे ग्रामीण

राष्ट्रीय खबर

मालदाः खनन कार्य सरकारी था। इस योजना के तहत लोगों को एक सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एक तालाब खोदने का काम चल रहा था। यह घटना हबीबपुर थाना के कारतुर्का पंचायत के लोनसा गांव की है। वहां लोग जब तालाब खोदने के काम कर रहे थे तो अचानक उसके बीच से ही इस मूर्ति को देखा गया।




मूर्ति नजर आते ही वहां काम करने वाले मजदूरों ने बाकी काम छोड़कर चारों तरफ से सावधानी से खुदाई की। खुदाई में लक्ष्मी नारायण की यह प्रतिमा बाहर निकली। समझदारी से किये गये खनन की वजह से इस विशाल प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

भगवान की प्रतिमा निकलने की सूचना पाते ही आस पास के लोग वहां जुट गये। प्रतिमा पर सिंदूर का लेप लगाकर उसे पूर्ण श्रद्धा क साथ पूजा भी गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह प्रतिमा कष्टिपाथर की बनी है और कई सौ साल पुरानी भी हो सकती है।

वैसे पूजा प्रारंभ होने के बाद लोगों ने पहले तो इसे पुलिस को सौंपने से इंकार कर दिया था। उनका तर्क था कि चूंकि यह प्रतिमा उनके इलाके से निकली है, इसलिए इस प्रतिमा को गांव में ही स्थापित किया जाए। बाद में लोगों के सहयोग से एक मंदिर का निर्माण भी करा लिया जाएगा।




इस बीच सूचना पाकर थाना से पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गयी थी। मूर्ति को अपने कब्जे में लेने के लिए पुलिस को वहां ग्रामीणों के साथ काफी विवाद करना पड़ा। कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर किसी तरह ग्रामीणो को इस मूर्ति के लिए मनाया गया वरना लोग इसे पुलिस को देने के लिए तैयार ही नहीं थे।

खनन कार्य से निकली प्रतिमा गांव में रखना चाहते थे

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मूर्ति वह अपने पास नहीं रखेंगे बल्कि नियम के मुताबिक इसे पुरातत्व विभाग को सुपुर्द कर देंगे। काफी देर के बाद विवाद के बाद अंततः ग्रामीण यह मूर्ति पुलिस को देने के लिए सहमत हुए हैं। इसके बीच ही हजारों लोगों ने तालाब खोदने से निकली इस प्रतिमा का पूजन भी कर लिया था।

पुलिस इस प्रतिमा को अपने साथ थाना ले आयी है। वहां के थाना प्रभारी अमिताभ सरकार ने बताया कि वहां तालाब खोदने के दौरान संजय महली ने सबसे पहले इस प्रतिमा को देखा था। अपने कुदाल से मिट्टी हटाने के क्रम में उसे अचानक ही इस प्रतिमा के वहां होने का पता चला था।

वहां के दूसरे मजदूरों ने काफी दूरी रखते हुए चारों तरफ से वहां की पूरी मिट्टी हटायी तो प्रतिमा बाहर निकली। यह प्रतिमा करीब एक फीट ऊंची है। मकर संक्रांति के दिन वहां प्रतिमा मिलने की सूचना मिलने के बाद अब आस पास के लोग थाना में भी इस प्रतिमा की पूजा करने पहुंच रहे हैं।



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