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हिरन शिकार मामले में डीएफओ की बड़ी कार्रवाई, दो वनरक्षी निलंबित

  • पैसे लेकर शिकारियों को छोड़ खुद मांस का किया था भोज

चतरा : हिरन शिकार मामले में वन विभाग को वनों और वन्य जीवों की सुरक्षा की

जिम्मेवारी सौंपी गई है। ऐसे में वनकर्मियों के कंधो पर ही न सिर्फ वनों को संरक्षित रखने

की जिम्मेदारी है बल्कि वन्य जीवों को भी सुरक्षा प्रदान करना है। लेकिन अगर जंगल के

रक्षक ही उसके भक्षक बन जाएं तो स्थिति क्या होगी इसकी अंदाजा लगाया जा सकता है।

वन और वन्य जीव भगवान भरोसे ही रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला चतरा में प्रकाश में

आया है। जहां न सिर्फ वनकर्मियों ने विलुप्तप्राय हिरन के शिकारियों को पैसे लेकर जंगल

से ही छोड़ दिया बल्कि उसके मांस को खुद ही गटक गए। हालांकि मामला संज्ञान में आते

ही डीएफओ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जहां मामले में संलिप्त दो वनरक्षियों को तत्काल

प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं वनपाल के विरुद्ध भी कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है।

चतरा दक्षिणी वन प्रमंडल अंतर्गत सिमरिया पूर्वी वनक्षेत्र इनदिनों चर्चा में है।

हिरन शिकार मामले में चर्चा भी क्यूं न हो

यहां पदस्थापित वनकर्मियों ने काम ही ऐसा किया है। सिमरिया पूर्वी वनक्षेत्र में बीते

मंगलवार को गांव के लोगों द्वारा पानी की प्यास बुझाने के लिए भटक रहे हिरण को मार

दिया गया था। मारने के उपरांत कान्हूखाप के दोमुहाना नदी किनारे तस्कर हिरण को

काटकर उसका मांस निकालकर बेच रहे थे। इसी बीच ग्रामीणों की सूचना पर वनक्षेत्र के

वनपाल इंद्रदेव पांडेय व वनरक्षी अंकित कुमार और संजीव कुमार सिंह जंगल मे आग की

मिली सूचना पर पड़ताल के लिए पहुंचे थे। यहां वनकर्मियों ने तस्करों को अपने कब्जे में

ले लिया और उसे सिमरिया वन क्षेत्र पदाधिकारी कार्यालय ले जाने लगे। लेकिन रास्ते मे

ही इनलोगों ने तस्करों से सांठगांठ कर पैसे लेकर उसे रास्ते मे ही छोड़ दिया, और हिरण

के मांस को लेकर अपने आवास में चले गए। जहां सभी ने पकाकर उसे खा भी लिया। मौके

पर हिरण का मांस खरीदने पहुंचे लोगों से वनकर्मियों ने 22-22 हजार भी वसूल लिए।

इतना हीं नहीं वनकर्मी मांस खरीदार का स्कूटी भी अपने साथ रिश्वत के एवज में लेकर

चलते बने। इसी बीच मामले की जानकारी डीएफओ को मिल गई। जिसके बाद उन्होंने

मामले की जांच रेंजर से कराते हुए जांचोपरांत सभी तीनों आरोपियों को हिरन का शिकार

करने के आरोपियों को छोड़ने व रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित कर दिया है। जबकि

वनपाल इंद्रदेव पांडेय पर कार्रवाई करने की अनुशंसा को लेकर वन विभाग वरीय

अधिकारी (सीएफ) को डीएफओ द्वारा पत्र लिखा गया है। डीएफओ ने बताया कि

निलंबित किए गए कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। डीएफओ ने इस

बात के भी संकेत दिए है कि वनपाल इंद्रदेव पांडेय पर भी विभागीय गाज गिरना लगभग

तय है।

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