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अपने ही बुने जाल में उलझी हुई है भारतीय जनता पार्टी

  • नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर पेंच दर पेंच

  • पिछली बार भी इसी झाविमो का सवाल था

  • तब छह विधायक भाजपा में चले गये थे

  • फिर से उसी घटनाक्रम को दोहराने की तैयारी

संवाददाता

रांचीः अपने ही बुने जाल से अभी भाजपा को सबसे अधिक परेशानी है। भाजपा की सबसे

बड़ी परेशानी अभी पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिलना

है। लेकिन इस काम में अड़चन का रास्ता भी भाजपा का ही दिखाया हुआ है। पिछले

विधानसभा चुनाव के बाद जब झारखंड विकास मोर्चा के छह विधायक रातोंरात खेमा

बदल कर भाजपा में शामिल हो गये थे तो भाजपा को सरकार बनाने में आसानी हुई थी।

अपने ही चाल  जाकर उल्टी पड़ रही है

उस वक्त भाजपा ने अपनी सरकार बचाने के लिए जिन दलीलों का सहारा लिया था और

विधानसभा में इस मामले को जिस तरीके से लटकाया जाता रहा। अब बदली हुई

परिस्थितियों में वही सारी कार्रवाई भाजपा के गले की फांस बनी है। पिछली सरकार और

विधानसभा में भाजपा की तरफ से जो कुछ किया गया, उसे जायज ठहराने के बाद अभी

जो कुछ चल रहा है, उसे गलत बताने की दलील से दाल नहीं गलने वाली है।

इस बीच भाजपा के अंदर भी सब कुछ ठीक है, ऐसी स्थिति तो बिल्कुल नहीं है। पार्टी के

अंदर सबसे बड़ा वर्ग संघर्ष पुराने और नये लोगों के बीच है। अनेक लोग चुनाव से ठीक

पहले पार्टी में शामिल हुए हैं। जिला स्तर के संगठन में ऐसे लोगों को उचित प्रतिनिधित्व

अब तक नहीं मिल पाया है। पार्टी के पुराने लोग नया नया शामिल होने वाले विधायकों के

समर्थकों के लिए स्थान छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। लिहाजा विधानसभा से लेकर

विधायक के कार्यक्षेत्रों तक अलग किस्म के घमासान की स्थिति बनी हुई है।

चुनाव आयोग से बाबूलाल मरांडी के विलय के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिये जाने के बाद

भी विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की मान्यता नहीं दी है। इस संबंध में दोनों

तरफ से शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी सुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है। ऐसी

ही प्रक्रिया पिछले विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव के कार्यकाल में भी हुई थी। तब भी

इसी झारखंड विकास मोर्चा के विलय का ही सवाल विचारार्थ था। लिहाजा यह माना जा

सकता है कि फिलहाल बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिलाने के रास्ते में

भाजपा की पूर्व की कारगुजारियां ही सबसे बड़ी बाधक बनी हुई है।


 

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