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भगवान बिरसा मुंडा जैविक उद्यान में नये प्रवेश द्वार के मॉडल का किया विरोध

ओरमांझीः भगवान बिरसा जैविक उद्यान ओरमांझी को देश के टॉप टेन में शामिल कर

लिया गया है जिसके बाद सरकार द्वारा अनेकों तरह की योजनाएं सरकार द्वारा चलाने

का निर्णय लिया गया है इसी कड़ी में उद्यान के मैन गेट को एस्टेन्स प्लाजा (प्रवेश द्वार)

के रूप में करने की बात चल रही है जिसका लागत दो करोड़ बताई जा रही है जो एस्टेन्स

प्लाजा का निर्माण होगा वह आधुनिक संथाली मॉडल का होगा । जिसका विरोध झारखंड

प्रदेश आदिवासी सरना पड़हा समाज मुन्ना पत्रा चकला ओरमांझी राँची के अध्यक्ष प्रो0

प्रेमनाथ मुंडा व पड़हा समाज के संरक्षक रमेश उरांव बालक पाहन काशीनाथ पाहन दिल

रंजन पाहन व अन्य सदस्यों ने इसका विरोध जताते हुए सरकार से मांग किया है कि

प्रवेश द्वार अत्याधुनिक संथाली के बजाए झारखंड के धरती आबा बिरसा मुंडा का मॉडल

का बनाया जाए और प्रवेश द्वार के आगे 30 फीट का बिरसा मुंडा का प्रतिमा स्थापित

किया जाए क्योंकि शर्मा जी का चिड़िया घर भगवान बिरसा जैविक उद्यान के नामांकन

से चल रहा है जिससे सरकार को करोड़ों करोड़ रुपए की मुनाफा होती है। सरकार द्वारा भी

विचार बनाया गया है इससे भगवान बिरसा मुंडा के आत्मा को अपमानित करने का काम

किया जा रहा है जिसे झारखंड प्रदेश आदिवासी करना पड़ा समाज बर्दाश्त नहीं करेगी चाहे

इसके लिए सरकार के आला अधिकारियों तक क्यों ना जाना पड़े।

भगवान बिरसा का असम्मान सहन नहीं किया जाएगा

इस तरह की मंशा से निश्चित तौर झारखंड के लोगों को काफी आहत होगी इस तरह की

मांग करना जायज है क्योंकि जिनके नाम से झारखंड का बना आज उन्हीं के नाम को

मिटाने की कोशिश किया जा रहा है समिति में चिड़ियाखाना के निर्देशक एवं वन विभाग

के नियमों को ठीक नहीं बताया है समिति ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार से अपेक्षा

जताया है कि जो गलत निर्णय लिया गया है उसका सुधार हो ।


 

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