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बेतिया राज घराने का उपेक्षित पत्थर का प्रवेशद्वार ध्वस्त होने के कगार पर

  • राष्ट्रीय ख़बर

बेतिया,पच: बेतिया राज की ऐतिहासिक पहचान पत्थर का बना प्रवेश द्वार अब

खतरनाक बन गया है। वह दरवाजा कब ध्वस्त होकर कब दुर्घटना को अंजाम देगा, यह

बताना मुश्किल है। पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया के लाल बाजार स्थित जोड़ा

शिवालय मंदिर से राज ड्योढ़ी में प्रवेश करने के लिए पत्थर दरवाजा बना हुआ था। 1896

में अंग्रेजों ने बेतिया राज को कोर्ट ऑफ वार्ड्स में शामिल कर लिया। उसी समय से

राजघराने की संपत्ति पर गिद्ध दृष्टि लग गई। लाल बाज़ार से राज (कैंपस) ड्योढ़ी में

प्रवेश करेंगे एक पुराना ध्वस्त पत्थर निर्मित दरवाजा स्थित है। जिसके गिरने से दुर्घटना

की आशंका बनी रहती है। अब बेतिया राज के अवशेष के रुप मे पत्थर निर्मित दरवाजा है,

जो कभी भी गिर सकता है और आने जाने वाले लोग दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं। राज

घराना के प्रवेश द्वार पर बने पत्थर के खंभे पर हल्की नक्काशी बने हुए हैं। शासन व

प्रशासन की गाड़ियां आती जाती रहती है। किंतु ऐतिहासिक प्रवेश द्वार के संरक्षण पर

किसी का ध्यान नहीं जाना स्वतः एक आश्चर्य है। इस पत्थर दरवाजा की एक ऐतिहासिक

कहानी है। जिसे शायद बहुत कम लोग ही जानते हैं, फिर भी आज के समय में इसकी एक

अलग ही महत्ता है। बेतिया राज के समय में आने वाले आगंतुक अपना जूता -चप्पल,

छाता, छड़ी यहीं पर उतारकर राज ड्योढ़ी में प्रवेश करते और अपनी समस्याओं या

फरियाद को महाराज के सामने रखते। उसका समाधान लेकर वापस जाते थे।

बेतिया राज के जमान में दरवाजे पर दिन भर नगाड़े बजा करते थे

इस दरवाजे पर बेतिया राज के समय दिनभर नगाड़े बजते रहते थे।यहां तक कि आने वाले

आगंतुकों को जाते समय लड्डू भी दिया जाता था। ऐसा कहा जाता है किंतु यह

ऐतिहासिक धरोहर पत्थर दरवाजा अपनी दूर्दशा पर आंसू बहा रहा है। इसके संरक्षण की

आवश्यकता है, यह ऐतिहासिक धरोहर आज भी लोगों के लिए दर्शनीय हो सकता है। इधर

से बेतिया राज के प्रबंधक भी आते-जाते रहते हैं। किंतु वह भी इस पर ध्यान नहीं देते हैं।

यदि इसकी शीघ्र मरम्मत नहीं किया गया तो किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित करने से

नहीं रोका जा सकता है और ऐतिहासिक धरोहर से बेतियावासी व अन्य जन कभी नहीं

जान पाएंगे। आवश्यकता है बेतिया राज घराना से जुड़े तथ्यों को बोर्ड लगाकर उसपर

अंकित किया जाए तो आनेवाली पीढ़ियों को क्षेत्रीय ऐतिहासिकता की जानकारी मिले। इस

संबंध में बेतिया राज प्रबंधक से संपर्क नहीं होने के कारण उनका पक्ष नहीं उपलब्ध हो

सका है।

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