मधुमक्खी को अपने काम की गिनती आती है

मधुमक्खी को अपने काम की गिनती आती है
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  • वैज्ञानिक शोध में पता चला उनके दिमाग में है मात्रा चार स्नायु सेल
  • कितना और कहां है, यह समझ लेती है
  • हल्का और भारी का फर्क भी कर लेती है
  • सभी स्नायुतंत्र आपस में जुड़े होते हैं
  • नई पीढ़ी के रोबोट बनाने में मिलेगी मदद

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः मधुमक्खी अपने काम की चीजों को न सिर्फ गिन सकती हैं बल्कि उन्हें याद भी रख सकती है। अपनी जरूरत की वस्तुओं में से कौन सी वस्तु कहां और कितनी मात्रा में हैं, यह उन्हें पता और याद होता है। इसी क्षमता की वजह से वे अपना काम भी करती रहती हैं। मधुमक्खियों को यह सारा काम करने में अपने दिमाग के सिर्फ चार स्नायु तंत्र काम में लाना पड़ता है।

मधुमक्खी पर यह शोध लंदन के क्वीन मेरी विश्वविद्यालय में हुआ

लंदन के क्वीन मेरी विश्वविद्यालय के शोध दल ने मधुमक्खियों की इस गुण का पता लगाया है। इस शोध के सामने आने के बाद यह माना जा रहा है कि यह अब तक की जानकारी के मुताबिक सबसे छोटा कंप्यूटर है जो महज चार सेलों की मदद से काम करता है। प्रयोगशाला में इसी आधार पर एक कंप्यूटर का विकास भी किया गया है लेकिन आम मधुमक्खी की तुलना में इस तैयार कंप्यूटर की क्षमता बहुत सीमित है।

शोध दल को मधुमक्खियों के आचरण पर जांच करते हुए यह पता चला कि सामान गिनने की क्षमता के साथ साथ हर सामान को बारिकी से देखने और समझने का गुण भी मधुमक्खियों में होता है। एक के बाद रखे दूसरे सामान को देखते हुए वे नये सिरे से अपनी गिनती याद रख पाती है। यह गुण इंसान में नहीं होता। इंसान गिनती प्रारंभ करने के बाद एक सिरे से सभी वस्तुओं को एक साथ गिन लेता है। इंसान मधुमक्खियों की तरह अलग अलग सामान को अलग अलग गिनने के लिए मानसिक तौर पर अभ्यस्त नहीं होता।

पहले हुए शोध में यह पाया गया था कि आम तौर पर मधुमक्खियों को चार या पांच सामान गिनने की क्षमता होती थी। इसके आधार पर वे आकार में छोटे और बड़े सामान का अंतर भी कर पाते थे। अब उनके अंदर शून्य गिनने की क्षमता भी पायी गयी है। यह अपने आप में इस छोटे से जीव के लिए बड़ी बात है।

भले ही मधुमक्खियां हमारी तरह गणित के सवाल हल नहीं करती हों लेकिन अपने काम के लिए उनकी यह क्षमता काफी काम आती है। इस काम के लिए मधुमक्खियों के पास अपने दिमाग का बहुत छोटा सा हिस्सा सक्रिय करना पड़ता है। उससे उनकी ऊर्जा भी कम खर्च होती है। वैज्ञानिक अनुसंधान में यह पाया गया है कि इस श्रेणी की मधुमक्खियों के मस्तिष्क के भीतर बहुत ही छोटे छोटे स्नायु कोष होते हैं। वे आपस में जुड़े होते हैं और एक दूसरे को सूचना भेजने में सक्षम भी होते हैं। इस शोध दल से जुड़े वीरा वसास का कहना है कि इससे आर्टिफिसियल इंटैलिजेंस की दुनिया में नई क्रांति आ सकती है। यहां तक कि मधुमक्खियों की दिमागी क्षमता के आधार पर नई पीढ़ी के रोबोट बनाये जा सकते हैं जो आकार में छोटे होने के बाद भी अत्यधिक कार्यकुशल होंगे। दिमाग के इतनी छोटे से हिस्से से अपनी जरूरत का काम करने में सक्षम मधुमक्खियों ने रोबोटिक्स के विकास में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिये हैं। अब इसके आगे मधुमक्खियों की आचरण और उड़ने की क्षमता का विश्लेषण कर रोबोट तैयार किये जा सकते हैं।

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