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समुद्री प्रवाल के अति सुंदर बगीचे समुद्र की अनजानी खाई में




  • 4.5 किमी की गहराई तक खोज करता है नया यंत्र

  • नये उपकरण से गहराई तक देखने की सुविधा

  • अति प्राचीन पृथ्वी के नमूने भी एकत्रित किये

  • समुद्री पारिस्थितिकी का हाल बताते हैं इलाके

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः समुद्री प्रवाल का समुद्र के जीवन पर बड़ा प्रभाव होता है। पर्यावरण बिगड़ने

और समुद्र का हाल खराब होने की वजह से अनेक इलाकों में प्रवाल के इलाके भी तेजी से

नष्ट होते जा रहे हैं। इसी वजह से दुनिया भर में उन्हें बचाने और नष्ट हो चुके प्रवाल के

इलाकों को फिर से बसाने की दिशा में युद्ध स्तर पर काम हो रहा है।

इसी क्रम में एक शोधदल को ऑस्ट्रेलिया के करीब एक अनजाने खाई में अति सुंदर समुद्री

प्रवाल का बगीचा देखने को मिला है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालय के शोध दल

ने दक्षिण पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र में यह खोज की है। जिस इलाके में इसे देखा गया

है उसे ब्रेमर कानयोन मेरिन पार्क कहा जाता है। वैसे वैज्ञानिकों को वहां अलग खाई होने

की जानकारी भी पहली बार मिली है।

वैज्ञानिकों को यह इलाका खोजने में नया उपकरण भी मददगार रहा है। स्मिड्ट ओसन

इंस्टिटियूट (एसओआइ) ने एक ऐसा परडुब्बी जैसा वैज्ञानिक उपकरण तैयार किया है जो

साढ़े चार हजार मीटर की गहराई तक खोज कर सकता है। इसे बाहर से निर्देशित किया जा

सकता है। इसी वजह से समुद्र के ऊपर होने के बाद भी शोध दल उसकी गहराइयों को देख

सकता है। इस नये उपकरण का नाम सूबास्टिन रखा गया है।

समुद्री प्रवाल का बगीचा देख हैरान हुए वैज्ञानिक

शोध दल ने वहां से समुद्री प्रवाल का यह अति सुंदर बगीचा खोज निकालने के साथ साथ

करीब चार हजार मीटर की गहराई से अनेक नमूने भी एकत्रित किये हैं। इस शोध दल के

मुख्य वैज्ञानिक जूली ट्रोटर ने इस बारे में कहा है कि एक साथ कई खोज किये जा सके हैं

और सभी के नमूनों को भी एकत्रित किया गया है। किसी सीधी पहाड़ की तरह बने इस

इलाके में विविध रंगों वाले कोरल यानी समुद्री प्रवाल को पहली बार देखा गया है। इस

इलाके में विविध प्रकार के समुद्री जीवन भी इन्हीं के आसरे जीवित है।

इनका पता चलने के बाद हर आंकड़े का विश्लेषण किया जा रहा है। इसका मुख्य मकसद

समुद्री जीवन को सुरक्षित रखने के लिए समुद्री प्रवाल को सुरक्षित रखने के और बेहतर

तरीकों को तैयार करना है। समुद्र में अनेक स्थानों पर प्रवाल समाप्त होने का मुख्य

कारण प्रदूषण और तापमान में अंतर है। इसी वजह से वहां के समुद्री जीवन भी नष्ट हो

गये हैं। कई इलाको में कृत्रिम तरीके से प्रवाल को फिर से स्थापित करने के प्रयासों को

सफलता मिली है। जहां इन्हें नये सिरे से स्थापित किया गया है वहां फिर से समुद्री जीवन

पटरी पर लौट आया है। समुद्र के अंदर की पारिस्थितिकी को कायम रखने के लिए यह

समुद्री प्रवाल प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया के समुद्रों में नहीं हुई है अधिक खोज

ऑस्ट्रेलिया में तीन तरफ से समुद्र हैं और इनमें से अधिकांश के गहराई पर अब तक

ज्यादा शोध नहीं हो पाया है। वैज्ञानिकों द्वारा पहली बार अन्य इलाकों में भी खोज की

गयी है। इसके तहत कुछ ऐसे इलाके भी मिले हैं जहां के प्रवाल नष्ट हो गये हैं। शोध से

जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि समुद्र को जल प्रदान करने का मुख्य स्रोत अंटार्कटिका ही है।

वहां से बर्फ के पिघलने से सभी समुद्रों को निरंतर जल मिलता है। इसी पर पूरी पृथ्वी का

मौसम चक्र भी आधारित है। समुद्र के अंदर का जीवन पानी को भाप बनाकर आसमान

तक भेजने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

दूसरी तरफ एक अन्य शोध में यह भी पाया गया है कि प्राचीन पृथ्वी के समुद्र में अभी से

ज्यादा ऑक्सीजन 18 हुआ करता था। यह निष्कर्ष समुद्र से मिले आंकड़े के आधार पर

तैयार कंप्यूटर मॉडल से निकाला गया है। इसके लिए एक सौ से अधिक नमूनों का

विश्लेषण किया गया है। जिनमें अभी से 3.2 बिलियन वर्ष पुरानी पृथ्वी के अस्तित्व का

पता चलता है।

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