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बड़ा तालाब पर बड़े साहिब की बड़ी बात

बड़ा तालाब पर लोगों के लिए फिलहाल नहीं काफी अरसे से सालों भर

की कमाई का एक जरिया बना हुआ है। इस बड़े तालाब के संबंध में

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दो टूक लहजे में बड़ी बात कह दी है। इस दो

टूक बात से यह समझा जा सकता है कि हेमंत सोरेन मामले की

गहराई को अच्छी तरह समझ रहे हैं। बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण एवं

उसे बेहतर पर्यटन स्थल बनाने के नाम पर अनेक किस्म के प्रयोग

पहले भी होते आये हैं। हर ऐसे प्रयोग के बाद इस बड़ा तालाब की

स्थिति सुधरने के बदले बिगड़ी है। इसलिए अगर हेमंत ने बड़ा तालाब

को किसी भी कीमत पर छोटा नहीं होने देने की बात कही है तो यह एक

साथ कई समस्याओं को हल करने वाली बात है। शहर के बीचों बीच

बने इस तालाब को स्थायी तौर पर एक बेहतर पर्यटन स्थल बनाने के

लिए जिन बातों की तरफ मुख्यमंत्री को ध्यान देना है उन्हें दीर्घकालिन

योजना के तहत शामिल करना होगा। बड़ा तालाब की सबसे बड़ी खामी

वहां सतह के नीचे गंदगी का जमा होना है। कई दशकों से वहां तालाब

की निचली सतह पर जो सिल्ट जमा होता आ रहा है, वह एक दिन में

साफ होने वाली बात नहीं है। इसके लिए अब तक आजमाये गये

तमाम जुगाड़ साफ्टवेयर वाली तकनीकों के बदले ड्रेजिंग की

आवश्यकता है। यह लंबा काम है और यह कोई तकनीकी विशेषज्ञ ही

कर सकता है। तालाब को फिर से पूर्ववत अथवा वर्तमान जरूरत के

हिसाब से अधिक गहरा करने में वक्त लगेगा। यह सिर्फ सीमेंट के

निर्माण कार्य अथवा किनारे खड़ी जेसीबी मशीनों से खुदाई कर नहीं

किया जा सकता है।

बड़ा तालाब को पूरी तरह नया बनाने की अब जरूरत

एक बार तालाब की बिल्कुल नई जैसी स्थिति बन गयी तभी वहां से

पानी को नये सिरे से साफ करने अथवा उसमें गंदे पानी के बहाव को

रोकने की दिशा में स्थायी योजना बनाया जाना चाहिए। इससे कमसे

कम तालाब से फैल रहे प्रदूषण में कमी आयेगी। तालाब के गंदे पानी

की मुख्य वजह वहां के अंदर जमी काई भी है। इस काई को साफ करते

रहना एक निरंतर प्रक्रिया है। किसी भी अंतर्राष्ट्रीय जल पर्यटन के

इलाके में यह काम लगातार चलता रहता है। इसलिए हेमंत सोरेन ने

बड़ा तालाब को छोटा होने से रोकने के बारे में जो दो टूक बात कही है,

उसके गहरे निहितार्थ है। लेकिन लगातार टेंडर और रि टेंडर के खेल में

फंसे लोग भले ही इस बात को समझकर भी नासमझ बनने का भान

करें लेकिन असलियत क्या है, यह सभी को अच्छे तरीके से पता है।

यह तालाब की वास्तविक स्थिति क्या थी और आज क्या है। इसे

समझने के लिए हममें से कोई भी गूगल का सहारा ले सकता है। इसके

टाइम लाइन से बड़ा तालाब पहले के मुकाबले कितना सिकुड़ गया और

किस तरफ से कितना उसका अतिक्रमण हुआ है, इसे देखा जा सकता

है। दरअसल नगर निगम और अन्य जानकर अब तक इस बात को

स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं कि आम जनता भी अब इन खेलों

को अच्छी तरह समझ रही है। इसलिए हेमंत सोरेन की बातों को

गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह बेहतर पहल होगी कि शहर के

ठीक बीचोंबीच एक बेहतर पर्यटन स्थल विकसित हो। इससे शहर के

लोगों को अपने मनोरंजन के लिए एक बेहतर विकल्प उपलब्ध होगा।

लेकिन ऐसे पर्यटन स्थलों के सिर्फ विकास से उसमें स्थायित्व नहीं आ

जाता।

तालाब को लगातार साफ सुथरा रखने का काम हमेशा चले

स्थायित्व के लिए उसे लगातार ही साफ सुथरा और बेहतर तरीके से

आकर्षक बनाने रखने की जरूरत पड़ती है। उचित और नियमित रख

रखाव के अभाव में कोई भी ऐसा पर्यटन स्थल अंततः खंडहर में

तब्दील हो सकता है, इसके अनेक उदाहरण हमारे सामने मौजूद हैं।

लेकिन पर्यटन के साथ साथ हर मौके पर हमें इस बात को याद रखना

चाहिए कि दरअसल यह तालाब किस मकसद से बनाया गया है। यह

शहर की बहुत बड़ी आबादी के लिए भूमिगत जलस्रोत का सबसे बड़ा

साधन है। ऐसे में जब शहर की आबादी काफी बढ़ चुकी है तो इस जल

भंडार की स्थिति को और बेहतर बनाने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी

पर है। अब तक जिस शालीन लेकिन कठोर तरीके से हेमंत सोरेन

फैसले ले रहे हैं उससे यह उम्मीद की जा सकती है कि वह बड़ा तालाब

पर अधिक कुशलता का परिचय देंगे। यह उम्मीद इसलिए भी अधिक

हो जाती है कि एक राजनीतिज्ञ होने के साथ साथ वह शैक्षणिक

तौर पर एक इंजीनियर भी हैं, जिन्हें इन तमाम तकनीकी विषयों को

जानकारी आम जनता अथवा टेंडर के खेल में जुटे रहने वाले अफसरों

से बेहतर जानकारी है। इस ज्ञान का स्थायी लाभ रांची की जनता को

हेमंत सोरेन से इसलिए मिलने की अधिक उम्मीद है क्योंकि अपनी

शैक्षणिक योग्यता की वजह से वह चीजों को बेहतर तरीके से समझ

सकते हैं।

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