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बैंककर्मियों की सुरक्षा के प्रभावी इंतजाम की जरूरत है

बैंककर्मियों की सुरक्षा का मामला कोरोना काल में सबसे अधिक उपेक्षित रहा है। ऐसी

स्थिति ऐसी है कि किसी भी देश का विकास उस देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भर होता है।

देश की अर्थव्यवस्था के विकास में बैंकों का बेहद महत्वपूर्ण योगदान होता है। इस वैश्विक

महामारी कोरोना के समय पूरा देश लॉकडाउन के कारण बंद था, लेकिन ऐसे में बैंक कभी

बंद नहीं हुए। स्वास्थकर्मियों, पुलिसकर्मियों के साथ-साथ वे बैंककर्मी ही हैं जो इस

महामारी के वक्त भी नहीं रुके और अपनी सेवा देते रहे। एक अनुमान के मुताबिक देश में

तकरीबन दो सौ से भी अधिक बैंकर्स कोरोना की भेंट चढ़े हैं। लेकिन दुखद ये है कि

अनवरत सेवा देने और जान गँवाने के बावजूद भी इन्हें बैंककर्मियों को कोरोना वॉरियर्स

का दर्जा तक नहीं मिला है। इस महामारी में कितने बैंकर्स की जान गयी है इसका भी

आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध तक नहीं है। एक खबर छपी थी कि उड़ीसा में 3066

बैंककर्मी कोरोना पॉजिटिव हैं और इनमे से 14 बैंककर्मियों का निधन भी हो चुका है। वहीं

सोशल मीडिया पर सक्रिय समूह बैंकर्स यूनाइटेड द्वारा अपने स्तर पर एकत्र आंकड़े की

माने तो 23 जुलाई, 2020 तक लगभग 76 बैंकर्स की मौत कोरोना के कारण हुई थी। सिर्फ़

एक राज्य का कोरोना संक्रमित की संख्या इतनी है तो अगर देश के अन्य राज्यों के

आंकड़ों को भी इसमें शामिल कर लें तो कोरोना संक्रमित बैंकर्स की संख्या का सहज

अनुमान लगाया जा सकता है।

बैंककर्मियों ने कोरोना संकट में भी अपनी जिम्मेदारी निभायी है

      विजया शर्मा, लेखक

बावजूद इसके हर तरह का खतरा उठाते हुए भी बैंककर्मी

लगातार अपने दायित्वों का निष्पादन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री

मोदी भारत को डिजिटल इंडिया बनाने की बात करते हैं।

इसके लिए सरकार की तरफ से कई जरूरी प्रावधान किये

गए हैं। पंचायतों को ब्रॉडबैंड और ऑप्टिकल फाइबर के नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है ताकि

डिजिटल ढांचे को मजबूती मिले। आज बैंकिंग भी डिजिटल होने की राह पर है। आज ऐसे

बहुतेरे विकल्प मौजूद है, जिसके सहारे डिजिटल बैंकिंग की जा रही है। ऐसे में अगर बैंकों

में 5 दिवसीय कार्य की व्यवस्था लागू हो जाए तो बैंक कर्मचारियों के प्रोफेशनल और

पारिवारिक जीवन में एक संतुलन बनेगा। दुनिया के सारे विकसित देशों में बैंकों में पांच

कार्य दिवस का ही प्रावधान लागू है।

कोरोना संकट तो अपनी जगह पर है ही दूसरी ओर आये दिन बैंककर्मियों के साथ

दुर्व्यवहार और मारपीट की खबरें मीडिया की सुर्खियों में होती है। इसी हप्ते के गुरुवार को,

जालंधर जिले के कालरा गांव मे दिनदहाड़े यूको बैंक के ब्रांच में लूट हुई और ड्यूटी पर

तैनात गार्ड सुरेंद्र सिंह को गोलियों से मार दिया गया। मौके पर ही गार्ड ने दम तोड़ दिया।

बीते साल बैंक ऑफ बड़ौदा के एक वरिष्ठ प्रबंधक आलोक चंद्रा की दिन दहाड़े गोली

मारकर हत्या महज इसलिए कर दी गई कि उन्होंने फर्ज़ी चल रहे ग्राहक सेवा केंद्रों को बंद

करवाया था। उनके पीछे उनके बूढ़े मां-बाप, पत्नी और 3 साल का बच्चा रह गया। आलोक

चंद्रा की मृत्यु के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से उनके परिवार की सहायता की गयी

तथा आलोक चंद्रा बहादुरी पुरस्कार की घोषणा की भी गयी।

बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंधक की हत्या कर दी गयी

आलोक चंद्रा के पैतृक गांव कुटरी, बिहार में शहीद आलोक चंद्रा द्वार भी बनाया गया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा का यह कार्य अत्यंत सराहनीय है। यह मामला उस समय काफी चर्चा में

रहा। लेकिन इस घटना के बाद यदि बैंकर सुरक्षा के प्रावधान हो गए होते तो शायद बाद में

ऐसी दुर्घटना लगातार घटित नहीं होती। आज भी बैंकर्स के साथ होने वाली हिंसा में कमी

नहीं आयी है। बीते महीने की 7 तारीख को भारतीय स्टेट बैंक के एक प्रबंधक की बेगूसराय

में गोली मारकर हत्या कर दी गयी। अभी बीते हप्ते 8 अक्टूबर 2020 को पटना में पंजाब

नेशनल बैंक के एक प्रबंधक को उनके ही केबिन बंद करके पीटा गया। हालाँकि इसके बाद

भी बैंकर्स के सुरक्षा की स्थिति में कुछ सुधार तो नहीं हुए हैं लेकिन वित्तमंत्री के

आश्वासन से कुछ उम्मीद जगी है। उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार जल्द ही

बैंकर्स की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम करेगी ।

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