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बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल तक नौ परिवहन चालू करने की कवायद

  • झारखंड के पाकुड़ की गिट्टी कारोबार को फायदा

  • दोनों देशों तक आसानी से माल परिवहन सस्ते में

  • हाइड्रोग्राफिक सर्वे से गहराई समझने का काम प्रगति पर

  • त्रिपुरा के बाद पश्चिम बंगाल का रास्ता खोलने पर काम

अमीनूल हक

ढाकाः बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल तक भी नौ परिवहन चालू करने का काम अब गति

पकड़ रहा है। त्रिपुरा के सोनामुड़ा तक के जल मार्ग का परीक्षण समाप्त होने के बाद अब

इस पर काम प्रारंभ हो चुका है। बांग्लादेश के राजशाही सुलतानगंज से पश्चिम बंगाल के

धुलियान तक यह जल परिवहन बहाल किया जाएगा।

वीडियो में देखिये क्या कहा बांग्लादेश के अधिकारी ने

उम्मीद की जा रही है कि अगले अक्टूबर माह तक इस जल मार्ग का भी परीक्षण हो

सकेगा। इसके लिए बांग्लादेश की संस्था बीआईडब्ल्यूटीए ने काम प्रारंभ कर दिया है।

योजना के मुताबिक बांग्लादेश से पश्चिमबंगाल के धुलियान स्थित मया नौबंदर तक

सामान पहुंचान की तैयारी है। इस मार्ग को खोलने का भी असली मकसद दोनों देशों के

माल परिवहन के खर्च को कम करना है। याद रहे कि जल परिवहन मार्ग से आने वाले

सामान की परिवहन लागत अपेक्षाकृत कम होती है।

वैसे बांग्लादेश के पश्चिम बंगाल तक की यह जल मार्ग कोई नया नहीं है। यह वर्ष 2008

तक पूरी तरह चालू था। बीच में उसे अन्य कारणों से रोक दिया गया था। अब तो नये सिरे

से जो काम हो रहा है, उसमें मानिकगंज आरिचा तक इसका विस्तार किया जा रहा है।

बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के धुलियान तक गंगा नदी पर परिवहन

इस काम को करने वाली संस्था बीआईडब्ल्यूटीए के निदेशक रफीकुल इस्लाम ने कहा कि

दाउदकांदी से सोनामुडा तक के ट्रायल रन के सफल होने के बाद उस मार्ग की अड़चनों को

दूर किया जाएगा। इसी बीच इस जल मार्ग को चालू करने का काम प्रारंभ कर दिया गया

है। पहले से ही यह स्पष्ट है कि इस प्रस्तावित जल मार्ग को लेकर दोनों देशों को

कारोबारियों का उत्साह भी अधिक है। सभी यह मानते हैं कि इस रास्ता के चालू होने से नौ

परिवहन के जरिए बेहतर कारोबार के अवसरों का सृजन होगा। दोनों देशों के एक संयुक्त

दल ने इस प्रस्तावित जल मार्ग का निरीक्षण भी किया है। इसके आधार पर ही इलाके में

कहां क्या कुछ किया जाना है, उस पर कार्य प्रारंभ किया गया है। प्रस्तावित जल मार्ग पर

कुछ स्थानों पर हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण भी किया गया है। इस मामले में शर्मिला खानम ने

कहा कि इन जल मार्गों को चालू होने से कोयला, गिट्टी, बोल्डर, पत्थर, सीमेंट, ईंट और

फ्लाई एश लाने और ले जाने की सुविधा और बेहतर हो जाएगी। याद रहे कि यमुना पुल के

निर्माण के बाद ही झारखंड के पाकुड़ से खास किस्म की गिट्टी का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

इसके लिए पंद्रह किलोमीटर का मार्ग अतिरिक्त तैयार किया गया है। बांग्लादेश से

पश्चिम बंगाल के मया बंदरगाह के बाद सिर्फ बीस किलोमीटर जल मार्ग से पाकुड़ की

गिट्टी, जो खास तौर पर रेलवे के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है, वह भी बांग्लादेश लाने में

सुविधा होगी।

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