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भारत के जरिए नेपाल को रेल परिवहन से जोड़ने का काम प्रगति पर




  • बांग्लादेश को वर्ष 2021 में इस परियोजना के पूरी होने की उम्मीद

  • इससे सभी देशों में सामान की परिवहन लागत बहुत कम होगी

  • समय से काफी विलंब से काम होने से योजना लागत भी बढ़ी

  • पर्यटन विकास के लिए नेपाल को जोड़ना बांग्लादेश की सोच

सुभाष दास

ढाकाः भारत के जरिए नेपाल तक सीधी रेल सेवा का काम समय से पीछे चल रहा है।

प्रस्तावित रेल परियोजना दरअसल सार्क बहुद्देशीय रेल परियोजना का हिस्सा है। इसके

जरिए नेपाल और भुटान तक रेलवे परिवहन सेवा का विस्तार किया जाना है। बांग्लादेश

इस रेल सेवा के जरिए परिवहन सुविधा बढ़ाने के साथ साथ विदेशी पर्यटकों को भी नेपाल

से बांग्लादेश तक लाने की कवायद कर रहा है।

वीडियो में देखिये इस परियोजना की झलक

बांग्लादेश में खुलना-मोंगला रेल लाइन पर काम चल रहा है। मोंगला इस देश का दूसरा

सबसे बड़ा बंदरगाह है। इसका इस्तेमाल भारत भी करता है जहां से माल को पूर्वोत्तर

भारत के राज्यों तक कम परिवहन लागत से पहुंचाया जाता है । नेपाल से रेल सेवा को

जोड़ने के लिए बांग्लादेश के चापाइन बॉबगंज, रोहनपुर होते हुए भारत के मालदा तक यह

रेल सेवा जाएगा। नेपाल की रेल सेवा इसी रास्ते से बांग्लादेश से जुड़ सकेगी। नेपाल में

विराटनगर तक रेल सेवा का विस्तार होगा। इससे नेपाल और भूटान का बांग्लादेश के

बंदरगाह तक सीधी रेल सेवा का विस्तार हो जाएगा। इस प्रस्तावित रेल सेवा में अपनी रेल

लाइन के लिए नेपाल भारतीय भूखंड का इस्तेमाल करेगा। बांग्लादेश में यह रेल सेवा

करीब 217 किलोमीटर की होगी।

भारत के जरिए नेपाल से पर्यटक भी यहां आयेंगे

बांग्लादेश रेलवे में दूसरे की टिकट पर सफर भी अब दंडनीय अपराधबांग्लादेश को उम्मीद है कि नेपाल से रेल सेवा जुड़ जाने से विदेशी पर्यटन नेपाल के साथ

साथ बांग्लादेश के सुदंरवन इलाके तक आना पसंद करेंगे। इससे सरकार को भी राजस्व

की आमदनी होगी और पर्यटन विकास होगा।

पहले जब इसका काम प्रारंभ हुआ था तो इसे 2010 साल के 31 दिसंबर तक की समय

सीमा दी गयी थी। यह तय किया गया था कि वर्ष 2013 तक यह परियोजन पूरी कर ली

जाएगी। लेकिन उसके बाद से किसी न किसी कारण से लगातार यह काम पिछड़ता जा

रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2021 के जून माह तक इसे पूरा कर लिया जा

सकेगा।

इस परियोजना के लिए भारत ने अपनी तरफ से एक हजार 22 करोड़ 31 लाख रुपये की

स्वीकृति दी थी। बांग्लादेश ने अपने खाते से 519 करोड़ 8 लाख रुपये का व्यय स्वीकार

किया था। विलंब होने की वजह से परियोजना की लागत लगातार बढ़ती ही जा रही है।

इस परियोजना के तहत ही नेपाल को भी बांग्लादेश में बंदरगाह की सुविधा प्रदान की गयी

है। वैसे नेपाल के साथ रेल परिवहन के दो रास्ते खोलने का विचार है। विराटनगर वाले

रास्ते के अलावा भी चापाइन बाबगंज, रोहनपुर, रक्सौल होते हुए नेपाल के वीरगंज तक

का रेल विस्तार करना है। यह दूरी करीब 514 किलोमीटर की है। नेपा ने विराटनगर तक

अपनी ब्रॉड गेज सेवा पहुंची दी है। अब बांग्लादेश भी इस पथ पर ब्रॉडगेज रेल पथ बनाने

का काम कर रहा है। वर्ष 2017 में खाद की एक रेलगाड़ी को इसी रास्ते से विराटनगर तक

पहुंचाया भी जा चुका है। अब कोरोना संकट के समाप्त होने के बाद इन दोनों पथों के

माध्यम से रेल परिवहन चालू होने की उम्मीद की जा सकती है।

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