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बांग्लादेश में अब दूसरे भी दान कर सकेंगे किडनी

  • याचिका पर सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया
  • सात सदस्यीय दल ने रिपोर्ट में इसकी छूट देने से इंकार किया
प्रतिनिधि

ढाकाः बांग्लादेश में अब रिश्तेदारों के अलावा दूसरे भी किसी मरीज को

अपनी किडनी दे सकेंगे। इस मामले में दायर एक याचिका पर लंबी

सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला आज सुनाया है। इससे पहले

किडनी के मामले में ऐसी छूट नहीं थी। पहले की व्यवस्था के मुताबिक

किडनी फेल होने की स्थिति में मरीज का कोई नजदीकी रिश्तेदार ही

मरीज को अपनी एक किडनी दान दे सकता था।

उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति मैनूल इस्लाम चौधरी और न्यायमूर्ति

खोंदकार दिलीरुजम्मान की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है। इसमें

याचिकादाता की तरफ से बैरिस्टर राशना इमाम ने बहस की थी।

उनके साथ अधिवक्ता खोंदकर नीलिमा यासमीन भी थीं।

बांग्लादेश में एक संस्था ने विरोध किया था

दरअसल इस मामले की नीव इसी वर्ष 28 अगस्त को पड़ी थी। ढाका के

बंगबंधु शेख मुजीब मेडिकल कॉलेज में वहां के प्रो वीसी और बांग्लादेश

रेनल एसोसियेशन के अध्यक्ष डॉ मोहम्मद रफीकुल आलम के नेतृत्व

में गठित एक सात सदस्यीय कमेटी ने इस बारे में अपनी रिपोर्ट दी

थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था किडनी ट्रांसप्लांट के मामले में

रिश्तेदारों से बाहर के किसी व्यक्ति को इसकी अनुमति नहीं दी जानी

चाहिए। अगर इसकी छूट दी गयी तो वास्तव में पैसे वाले इसी बहाने

गरीबों का भी शोषण करेंगे। मजबूरी में पड़े लोग पैसे की लालच में

अपनी किडनी बेचने से परहेज नहीं करेंगे।

इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के खिलाफ गणस्वास्थ्य केंद्र के संस्थापक

डॉ जफरुल्लाह चौधरी ने कहा कि वर्तमान कानून के तहत अंग

प्रतिस्थापन (ट्रांसप्लांट) के तौर तरीकों को बदला जाना चाहिए।

इस प्रतिबंध के होने की वजह से अनेक जरूरतमंदों को किडनी नहीं

मिल पाता है। इसी बहस के आगे बढ़ने पर मामला उच्च न्यायालय

तक पहुंचा था। जहां आज यह फैसला सुनाया गया है। जिसमें कहा

गया है कि कोई भी स्वस्थ्य इंसान अगर चाहे तो वह किसी जरूरतमंद

को अपनी एक किडनी का दान कर सकता है।

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