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बलात्कार की कड़ी सजा का दो दिन पुराने कानून और पांच को फांसी

  • नारी एवं शिशु प्रताड़ना प्राधिकार का फैसला

  • इस कांड के तीन अपराधी अभी फरार हैं

  • वर्ष 2012 में लड़की इनके चंगुल में फंसी

  • बांग्लादेश में सड़कों पर आ गयी थी जनता

अमीनूल हक

ढाकाः बलात्कार का कानून महज दो दिन पहले ही देश में लागू करने की घोषणा की गयी

थी। दरअसल इस मुद्दे पर पूरे देश में जोरदार आंदोलन चल रहा था। इसी कारण

प्रधानमंत्री शेख हसीना की अगुवाई वाले मंत्रिमंडल ने बलात्कार के अपराधी को मौत की

सजा सुनाने संबंधी कानून को पारित किया था। इस कानून के पारित होने के दो दिन के

भीतर ही इस सजा को अमल में लाते हुए ऐसे ही एक बलात्कार कांड में शामिल पांच

अपराधियों को फांसी की सजा सुनायी गयी है। बांग्लादेश के राष्ट्रपति एडवोकेट अब्दुल

हमीद ने महज दो दिन पहले इस कानून पर हस्ताक्षर किया है।

वीडियो में देखिये कैसे हो रहा था बांग्लादेश में प्रदर्शन

जिस मामले में पहली बार पांच लोगों को मौत की सजा सुनायी गयी है वह देश के टांगाइल

के भुआंपुर की घटना है। वहां के पांच लोगों ने मिलकर मदरसा में पढ़ने वाली एक छात्रा के

साथ बलात्कार का था। गुरुवार को इस मामले में सजा की तिथि तय की गयी थी। पूरे देश

का ध्यान इस मामले की तरफ था। नारी एवं शिशु प्रताड़ना के लिए गठित प्राधिकार के

न्यायाधीश हाकिम खालिदा यासमिन ने इस फैसले में पहली बार इस कानून का

इस्तेमाल किया और सभी को सजा ए मौत दी है। वैसे जिस मामले में यह सजा सुनायी

गयी है, उसके दो अभियुक्त ही पकड़े गये थे। इस कांड के शेष तीन अभियुक्त अभी फरार

हैं। इसके अलावा भी देश के कई इलाकों में इस किस्म के अपराधों की शिकायत के बाद

जनता सड़क पर आ गयी थी। जगह जगह पर बड़े प्रदर्शन होने की वजह से भी सरकार को

आनन फानन में इस पर फैसला लेना पड़ा है। कोरोना की वजह से संसद का सत्र स्थगित

होने की वजह से राष्ट्रपति ने मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर इस अध्यादेश को जारी कर

इसे कानूनी जामा पहनाने का काम किया है।

बलात्कार के मामले में मृत्युदंड पाने वाले ने गुनाह स्वीकारा

जिनलोगों को फांसी की सजा सुनायी गयी है उनमें मधुपुर के चारालजानि गांव के बदन

चंद्र मणि ऋषि का 28 वर्षीय पुत्र संजीत, गोलाबाड़ी के दिगेन चंद्र शील का 30 साल का

बेटा गोपी चंद्र शील, सुनील चंद्र शील का 33 साल का पुत्र सागर चंद्र शील, सुनील मणि

ऋषि का 28 वर्षीय पुत्र सुजन मणि ऋषि और मणिंद्र चंद्र का 26 साल का पुत्र राजन चंद्र

है। इमें से सागर, सुजन और मणि जमानत पर रिहा होने के बाद फरार हो चुके हैं। अदालत

में लोक अभियोजक नछीमूल अख्तर ने बताया कि 2012 साल में सजा प्राप्त इन

अपराधियों के साथ मदरसा की छात्रा का परिचय मोबाइल से हुआ था। इसी पहचान का

फायदा उठाये हुए उसी साल 15 जनवरी को इस लड़की को एक ऑटो में बहला फुसलाकर

एलेंगा ले जाया गया था। वहां राजन के घर पर ठहरने के बाद चार दोस्तो ने मिलकर उसे

अपने दोस्ता से शादी करने को कहा था। इससे इंकार करने की वजह से रात को सभी ने

उसके साथ बलात्कार किया था। 17 जनवरी को मधुपुर के बंशाई नदी के किनारे फिर यही

कहानी दोहरायी गयी थी। लेकिन वहां से सारे अपराधी उसे उसी अवस्था में छोड़कर भाग

गये थे। स्थानीय लोगों की मदद से लड़की के घरवालों तक सूचना पहुंचने के बाद उसे घर

लाया गया था। उसके बाद इस कांड की प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। पुलिस द्वारा

गिरफ्तार सुजन मणि ऋणि ने अदालत में भी अपना और अपने दोस्तों का अपराध

स्वीकार कर लिया था। इसी आधार पर पांचों को मौत की सजा सुनायी गयी है।

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