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बांग्लादेश में सैनिक विद्रोह के मामले में 139 लोगों को सजा ए मौत

  • ढाका में हुआ था यह सैनिक विद्रोह

  • 57 अफसर सहित 74 लोग मारे गये थे

  • मामले में कुल 846 अभियुक्त बनाये गये थे

  • बीडीआर विद्रोह का फैसला 29 हजार पन्नों का जारी

विशेष प्रतिनिधि

ढाकाः बांग्लादेश में सैनिक  विद्रोह के मामले में अब कुल 139 लोगों को मौत की सजा

सुनायी गयी है। हाल के दिनों में पूरी दुनिया में एक साथ इतने अधिक लोगों को सजा ए

मौत देने की यह पहली घटना है। वर्ष 2009 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका के पिलखाना

में इस विद्रोह की आग भड़की थी। इस मामले पर अदालत ने अपनी राय जाहिर करते हुए

साफ कर दिया है कि इस विद्रोह के नाम पर सेना के 57 अफसरों के साथ साथ 74 लोगों

को मार डालने की घटना किसी सभ्य समाज में सहन करने के काबिल नहीं है। इसलिए

इस पूरे विद्रोह में शामिल लोग सामूहिक हत्याकांड के बराबर के दोषी है।

अदालत का यह फैसला कुल 29059 पन्नों का है।

अदालत ने इस विद्रोह के तमाम पहलुओं को अपने फैसले में शामिल किया है। यह कहा है

कि यह देश की व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक राष्ट्र विरोधी कार्रवाई थी। इसलिए

राष्ट्रद्रोह का मामला वैसे ही बनता है। लेकिन सबसे गंभीर बात इस विद्रोह के क्रम में सेना

के 57 अफसरों सहित 74 लोगों को मार डालने की घटना है। इसकी माफी कतई नहीं दी जा

सकती है।

लोकतांत्रिक देश की आजादी और सुरक्षा के साथ साथ गणतांत्रिक व्यवस्था में इस किस्म

की बगावत की छूट तो कतई नहीं दी जा सकती है। लिहाजा न्याय का शासन बहाल रखने

के लिए भविष्य के लिए भी अदालत का यह फैसला एक व्यवस्था कायम करेगा। सभी को

यह याद रखना होगा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस किस्म की अराजक हिंसा

की कोई छूट नहीं दी जा सकती है। फैसले के लिहाज से अत्यंत कठोर महसूस होने के बाद

भी देश के भविष्य के लिए ऐसा कठोर फैसला ही जरूरी है।

बांग्लादेश के सैनिक विद्रोह को अदालत ने गंभीर माना

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश के सैनिक विद्रोह में बीडीआर के मुख्यालय में सामूहिक हत्या

की गयी थी। इस मामले में शामिल होने वाले 846 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था।

वर्ष 2013 के 5 नवंबर इस मामले के कुल 152 लोगों फांसी की सजा सुनायी गयी थी। इन

अभियुक्तो में से एक को छोड़कर सभी बीडीआर (बांग्लादेश राइफल्स) के सैनिक थे।

इसमें से 161 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी थी। करीब 256 लोगों को

विभिन्न आरोपों में दस साल या उससे कम की सजा सुनायी गयी थी। आरोप प्रमाणित

नहीं होने की वजह से मामले क 278 अभियुक्तों को बेकसूर मानकर रिहा कर दिया गया

था। वैसे इस विद्रोह के बाद ही बांग्लादेश राइफल्स नामक इस सैन्य टुकड़ी का नाम

बदलकर बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश कर दिया गया था। वर्तमान में यही बीजीबी नाम से जाना

जाता है, जो बांग्लादेश का अन्यतम श्रेष्ठ सैनिक टुकड़ियों में से एक है।

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