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बांग्लादेश सेना के जवान भारतीय सीमा के अंदर पकड़े गये

  • पहचान की पुष्टि होने के बाद तुरंत वापस भेजा गया
  • हथियारबंद होने के बाद भी लोगों पर गोली नहीं चलायी
  • वहां हो रहे हंगामे का फायदा उठाकर भाग निकले दोनों तस्कर
भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः बांग्लादेश सेना के जवानों को आज भारतीय सीमा के अंदर अवैध तरीके से प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

वैसे उनके परिचय की पुष्टि होने के बाद तुरंत ही उन्हें बांग्लादेश सेना के सुपुर्द भी कर दिया गया।

इस बीच ग्रामीणों ने इनलोगों पर हमला भी कर दिया था।

काफी आधुनिक हथियार होने के बाद भी बांग्लादेश सेना के जवान गोली चलाने से हिचकते रहे।

बाद में उनलोगों ने स्पष्ट किया कि जिनलोगों ने उनपर हमला किया था, वे सामान्य नागरिक थे।

इसलिए ऐसे लोगों पर गोली चलाने का कोई औचित्य नहीं था।

इसी वजह से वह चुपचाप मार भी खाते रहे।

वैसे एकबारगी इतनी अधिक संख्या में हथियारबंद लोगों के पकड़े जाने की सूचना से सीमा पर

सतर्कता बढ़ा दी गयी थी।

बाद में इस बात की जल्दी ही पुष्टि हो गयी कि वे वाकई बांग्लादेश की सेना के ही जवान है।

दरअसल इस बीच हमलावर ग्रामीणों ने उनके पास के कई दस्तावेज और रुपये भी छीन लिये थे।

भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवानो के पहुंचने के बाद उन्हें सुरक्षित निकाला गया।

बीएसएफ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी की पुष्टि कर दी है।

बांग्लादेश सेना के जवानों की पहचान की तुरंत पुष्टि की गयी

बाद में बांग्लादेश सेना के लोगों ने बताया कि वे दरअसल एक ड्रग माफिया को पकड़ने आये थे।

इस दल में पांच लोग थे। ये सभी बांग्लादेश की श्रेष्ठ बटालियन रैपिड एक्शन के सदस्य हैं।

इस दल में तीन पुरुष और दो महिलाएं थी।

भारतीय सीमा के अंदर हथियार लेकर प्रवेश करते ही लोगों की नजर उनपर पड़ी थी।

दूसरी तरफ बांग्लादेश सेना के जवानों ने बताया है कि तस्कर अबू खैर और बांग्लादेशी तस्कर

माशूक मियां को पकड़ना उनका मकसद था।

वे दोनों पकड़े जाने के डर से पश्चिमी त्रिपुरा के रहिमपुर इलाके में भाग आये थे।

उन्हीं को पकड़ने के लिए वे भी सीमा पार चले आये थे।

पूछ-ताछ और संवाद आदान प्रदान से इन लोगों की तथ्यों की पुष्टि भी हो गयी।

दरअसल इस टुकड़ी को तस्करों को चुपचाप पकड़ने के काम में लगाया गया था।

उन्हें इस काम का आदेश एडिशनल एसपी मोइदुल इस्लाम और उनके कंपनी कमांडर द्वारा दिया गया था।

हंगामे के बीच दोनों मुजरिम फरार 

ग्रामीणों द्वारा घेरे जाने के बारे में उनका कहना था कि दरअसल तस्करों ने ही गांव वालों को आगे कर दिया।

जिसकी वजह से वे गोली भी नहीं चला सके। मौके का फायदा उठाकर दोनों तस्कर भाग निकले हैं।

दल के साथ मौजूद दोनों महिलाओं को गुप्तचर के तौर पर लाया गया था।

उनके पास से एक पिस्तौल, सात गोलियों के अलावा दो हथकड़ी और सेना का पहचान पत्र भी बरामद हुआ है।

वैसे उनके पास से डेढ़ लाख बांग्लादेशी मुद्रा भी बरामद हुई है।

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