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बंगबंधु शेख मुजीब के हत्यारे को रात 12 बजे के बाद फांसी

  • 23 साल तक लगातार भागता फिर रहा था

  • मंगलवार को मीरपुर इलाके से पकड़ा गया

  • इस नरसंहार के कई अपराधियों को पहले ही फांसी

  • सात में से छह अपराधी अब भी लापता

प्रतिनिधि

ढाकाः बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के हत्यारे को आज मध्यरात्रि फांसी दे दी जाएगी।

बांग्लादेश सरकार की तरफ से इस बारे में जो एलान किया गया है, उसके मुताबिक आज

यानी शनिवार और कल यानी रविवार के बीच की रात के 12 बजकर एक मिनट पर उसे

फांसी दी जाएगी। संवाद माध्यमों के गृह विभाग के सचिव शहीदुज्जमान ने यह जानकारी

दी है। बंगबंधु शेख मुजीब के इस हत्यारे का नाम अब्दुल माजेद है। उसे 45 वर्षों के बाद

यह सजा दी जा रही है। फांसी देने के लिए सारी तैयारियां यहां पूरी कर ली गयी है। इस

काम के लिए दस जल्लादों का एक विशेष दल यहां फांसी स्थल की तैयारियों का जायजा

भी ले चुका है।

इस फांसी को लेकर दूसरे कारणों से भी काफी उत्सुकता है। दरअसल पुराना ढाका से

बुढ़ीगंगा के दक्षिण हिस्से में इस जेल में यह पहली फांसी होगी। इस वजह से भी जेल

प्रशासन के तमाम लोगों के लिए भी यह पहला अनुभव ही होगा। इससे पहले इनमें से

किसी ने भी फांसी देने की जिम्मेदारी भी नहीं निभायी है। पहली बार इसके लिए फांसी का

कटघरा भी तैयार किया गया है। इससे पहले वहां फांसी देने का इंतजाम भी नहीं था। गृह

मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद पहली बार फांसी का अभ्यास भी किया गया है।

बंगबंधु की सपरिवार हत्या 15 अगस्त 1975 को हुई थी

याद रहे कि बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की सपरिवार हत्या 15 अगस्त 1975 साल में हुई

थी। एक जत्थे ने उनके घर पर हमला कर वहां मौजूद सभी को मार डाला था। शेख हसीना

उस वक्त घर पर नहीं होने की वजह से बच गयी थीं। इसके बाद लगातार मामले की जांच

में हत्या और उसकी साजिश में शामिल लोगों का पता लगता गया। इसी नरसंहार के

मामले में गत 27 जनवरी 2010 को मेजर वजलुल होदा, आर्टिलरी मुहीउद्दीन, ले. कर्नल

सैयद फारुख रहमान, सुलतान शहरियार, रशीद खान और लांसार महीउद्दीन अहमत को

फांसी दी गयी थी। मामले की सुनवाई के बाद जिनलोगों को आजीवन कारावास अथवा

फांसी की सजा सुनायी गयी थी, उनमें से सात लोग अब भी भागे हुए हैं। इनमें से अजीज

पाशा की वर्ष 2002 में जिंबाबवे में मर जाने की खबर है। गत 23 साल तक कानून को

चकमा देने वाले अब्दुल माजीद को गत मंगलवाल को गिरफ्तार किया गया था। वह

मीरपुर में नाम बदलकर छिपा हुआ था। पकड़े जाने के बाद पहले से जारी आदेश के तहत

ही उसे फांसी दी जा रही है। खबर है कि शुक्रवार  को माजेद ने अपने परिवार के पांच

सदस्यों के साथ मुलाकात भी कर ली है।


 

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