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नए शावकों से बांधवगढ़ फिर दिलाएगा मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा


उमरियाः नए शावकों से बांधवगढ़ के टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने की कोशिशें तेज हुई है।

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के रहवास के लिए अनुकूल

परिस्थितियों के कारण बाघ लगातार बढ़े हैं। अच्छी खबर यह है कि नई पीढ़ी वयस्क भी अब

नई गिनती में शामिल होंगे। इसके अलावा नए शावकों में 3 से 12 माह आयु के 41 शावकों की

पुष्टि मई माह में की गई थी। इनमे 10 शावक तीन माह से कम उम्र के थे। वाइल्ड लाइफ के

अनुसार एक वयस्क बाघ तीन साल की आयु के बाद गिना जाता है। साल भर वह अपनी मां व

भाईयों के साथ एक टैरेटरी में रहता है। इस आयु वर्ग वाले कल्लावाह परिक्षेत्र में चार शावक,

ताला में बाघिन टी-17 के 4-5, पतौर में 12 शावक, धमोखर 4, पनपथा बफर में 2, पनपथा

कोर परिक्षेत्र में 2, मानपुर में 2, मगधी में 5 तथा खितौली परिक्षेत्र में 4 नए शावकों अपने

कुनबे के साथ तैयार हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क रीवा रियासत की शिकारगाह रहा है।

पहले हुए शिकार की वजह से घटी थी इनकी तादाद

बांधवगढ़ आज देश में बाघ संरक्षण की मिशाल है। साल 2018 की बाघ गणना ने इस पर

मुहर लगाने का काम किया। 124 बाघों के साथ बांधवगढ़ पूरे मध्यभारत का सिरमौर बना

हुआ है। आने वाली 2022 की गणना में भी प्रदेश को बांधवगढ़ से काफी उम्मीदें हैं। हालांकि

1536 वर्ग किमी में इनका रहवास भी चुनौती पूर्ण काम है। मध्यप्रदेश में कुल 526 बाघ हैं।

अकेले बांधवगढ़ में सर्वाधिक 124, कान्हा में 104, पेंच में 87, सतपुड़ा में 47, पन्ना में 31,

संजय धुबरी में 6 घोषित किए गए हैं। आईआईएफ संस्था के अध्ययन में पाया गया कि एक

सीजन में यहां पर्यटन से जुड़े कारोबार में 100 करोड़ से अधिक रुपए का बाहरी निवेश खर्च

होता है। इसका कुछ अंश बाघ सुरक्षा व जंगल के विकास में लगता है।

नए शावकों का प्रारंभिक जीवन अपनी माता के साथ होता है

बांधवगढ़ से ब्यौहारी, संजय धुबरी कॉरीडोर में पानी, भोजन के लिए कार्बेट फाउण्डेशन और

लास्ट विल्डरनेस संस्थाएं जागरूकता के साथ रूट दुरूस्त कर रही हैं। आसानी से बाघ संजय

धुबरी और शहडोल में मूवमेंट कर रहे हैं। 820 वर्ग किमी का क्षेत्र बफर में है। इसके अलावा

1030 वर्ग किमी इको सेंसटिव जोन के रूप में नोटिफिकेशन हुआ है। यहां कुछ गतिविधियां

प्रतिबंधित होंगी। इससे कारीडोर में पक्के निर्माण पर पूर्णत: प्रतिबंध लगेगा। शासकीय भूमि

पर अतिक्रमण नहीं हो सकेगा। बांधवगढ़ बघेल राजवंशों के शासन काल में शिकारगाह के रूप

में जाना जाता था। टाइगर रिजर्व गठन के पूर्व यहां करीब सौ बाघों का शिकार हुआ। 1968 के

पूर्व आईएएस अफसरों की एक टीम ने निरीक्षण किया। तब इसे टाइगर रिजर्व बनाने की

कार्रवाई हुई। 1968 में 105 वर्ग किमी ताला रिजर्व फारेस्ट टाइगर रिजर्व के रूप में नोटिफाई

किया गया। वर्ष 1982 में 343 वर्ग किमी का क्षेत्र उमरिया और कटनी फारेस्ट जोड़ा गया। वर्ष

1983 में 245 वर्ग किमी पनपथा सेंचुरी नोटिफाई की गई। वर्ष 1993 को भारत सरकार ने

टाइगर रिजर्व को प्रोजेक्ट टाइगर से रूप में घोषित किया।

बाघों के संरक्षण के लिए पहले से चल रही है परियोजनाएं

वर्ष 2007 में कोर एरिया 716.905 और बफर 820.035 वर्ग किमी घोषित हुआ। फिर 2013 में

कोर के साथ बफर को पार्क क्षेत्र संचालक के अधीन किया गया। वर्ष 2014 में यहां 100 से

कम बाघ थे। 2018 की गणना में 124 मिले। इनमे 104 बांधवगढ़ और 20 आसपास विचरण

वाले थे। क्षेत्र संचालक विन्सेंट रहीम ने बताया कि बांधवगढ़ बाघों के लिए सुरक्षित रहवास के

रूप में पहचान बना चुका है। इसका उदाहरण यहां मध्यभारत में सर्वाधिक बाघ संख्या 124

का होना है। सुरक्षित रहवास के लिए कॉरीडोर विस्तार व कोर एरिया से विस्थापन से मदद

मिली है। अब अप्रैल माह से विस्थापन नियमों में राशि 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख कर दी

गई है। इससे शेष 10 गांव के लोगों को विस्थापन करने के साथ दूसरे प्रयास जारी है।

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