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बाजपट्टी मधुबन बाज़ार पर बनाया गया शैचालय किसी काम का नही




बाजपट्टी / सीतामढ़ी: बाजपट्टी मधुबन बाज़ार का एक मात्र सार्वजनिक शौचालय विगत




वर्ष से बस दिखावटी धरोहर के रुप में रह गयी है । कोरोना संक्रमण के इस भयावह

महामारी काल में भी अगर आपको बिहार के पहले ओडीएफ घोषित ज़िले में शौच करने के

लिए नदी किनारे जाना पड़े तो आपकों अचरज नहीं होना चाहिए,क्योंकि सीतामढ़ी ज़िले

के सरकारी शौचालयों का हाल ही ऐसा है कि आपके पास कोई और उपाय नहीं बचता

है,लेकिन सरकारी ज़िम्मेदार और स्थानीय जनप्रतिनिधि को आम लोगों कि परेशानियों

से क्या ही फ़र्क पड़ता है वो तो अपनी धुन में हैं । प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र के ही मधुबन

बाज़ार जहां से हर वर्ष सरकारी खज़ाने में लाखों राजस्व जाते हैं और वहां शौच करने के

लिए बाजार में आने वाले व्यापारियों, किसानों एवम् आम लोग खासकर महिलाओं को

पीछले वर्ष भर से बेहद पीड़ा झेलनी पड़ती है तो इस से दुर्भाग्य क्या कहा जाए । लेकिन




शौच करने वाले बेचारें करें भी तो क्या ! मुंह ढककर, चेहरा छिपाकर नदी किनारे बैठ जाते

हैं क्योंकि शौच को तो रोक नहीं सकते।

विगत वर्ष से बाजार क्षेत्र में स्थित सरकारी शौचालय के एक गेट में ताले जड़े हैं तो एक में

गेट ही नहीं है । स्तिथि कैसा खस्ताहाल है और क्या ही बताया जाएं । साथ ही शौचालय के

समीप स्थित सरकारी चापाकल भी अतिक्रमण का शिकार है ।

बाजपट्टी मधुवन बाजार का चापाकल भी अतिक्रमण का शिकार

स्थानिय लोगों के अनुसार किसकी जुर्रत जो कोई उस अतिक्रमित चापाकल से एक बूंद

पानी भी लें ले,क्योंकि अतिक्रमणकारी का खौफ इतना है कि लोग उस तरफ़ अपने कदम

भी नहीं बढ़ाते । इस समस्या के कारण आम जन परेशान हैं अब जीस जगह से सरकारी

राजस्व कि हर वर्ष लाखों कि वसूली होती हो उस जगह जनहित से जुड़ी सुविधा इस तरह

समस्या से जूझ रही हो तो लोगों को परेशानी होना बेहद चिंतनीय विषय है ।



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